सिरसा ने पासा फीट करवा दिया?
विजय सतबीरसिंघ गुरुद्वारा बोर्ड के प्रशासक बनें
भाटिया समिति की सिफारिशें लादने की रणनीति
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| मुंबई में देवेंद्र फडणवीस से मुलाक़ात कर नांदेड़ के कलेक्टर को हटाने की मांग प्रस्तुत करते भाजपा नेता मनजिंदर सिंघ सिरसा. |
रविंदरसिंघ मोदी
भारतीय जनता पार्टी के नेता मनजिंदरसिंघ सिरसा का मुंबई में बनाया गया वीडियो (क्लिप) शोशल मीडिया पर खूब धूम मचाए हुए हैं. उस वीडियो क्लिप के माध्यम से श्री सिरसा महाराष्ट्र सरकार से पहले यह घोषणा करते नज़र आ रहें हैं कि गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड के नवनियुक्त प्रशासक नांदेड़ के जिलाधीश श्री अभिजीत राऊत को हटाकर उनके स्थान पर पूर्व आईएएस अधिकारी और पूर्व प्रशासक श्री विजय सतबीरसिंघ की नियुक्ति की जा रहीं हैं. सिरसा ने कुछ फोटो ट्वीटर पर भी जारी किये हैं जिनमें उपमुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस के साथ त्रिसदस्यीय शिष्टमंडल की चर्चा का दृश्य दिखाई पड़ रहा हैं.
गौरतलब है कि पूर्व विधायक और भाजपा का सिख चेहरा श्री मनजिंदरसिंघ सिरसा और दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के श्री हरमीतसिंघ कालका की अगुवाईवाले शिष्टमंडल ने ता. 11 जुलाई 2023 की सुबह मुंबई में महाराष्ट्र के गृहमंत्री एवं उपमुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस से उनके निवासस्थान पर भेट की. श्री सिरसा ने नांदेड़ स्थित गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड संस्था के प्रशासक के रूप में गैर सिख की नियुक्ति का विरोध प्रस्तुत कर उन्हें पद से हटाकर सिख अधिकारी या पूर्व आईएएस अधिकारी विजय सतबीरसिंघ बाठ की नियुक्ति की मांग प्रस्तुत कर डाली. नियुक्ति करवा भी डाली.
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| श्री विजय सतबीरसिंघ, पूर्व IAS |
श्री देवेंद्र फडणवीस, भाजपा के अपने सहकारी की मांग भला कैसे टालते. उन्होंने फटाफट आश्वासन भी दे डाला कि नये प्रशासक अभिजीत राऊत को हटाकर श्री विजय सतबीरसिंघ (सेवा निवृत्त आईएएस अधिकारी) की गुरुद्वारा बोर्ड के प्रशासक के रूप में नियुक्ति की जाये. फिर क्या था..... महाराष्ट्र के राजस्व मंत्रालय के हरकत में आने से पहले श्री सिरसा ने वीडियो जारी कर बयान शुरू कर दी. वैसे सिरसा जी से सर्वसामान्य रूप से पूछना चाहूंगा कि आपको इस कार्य के लिए भेजा किसने हैं? एसजीपीसी ने, शिरोमणि अकाली दल ने, भाजपा ने या मुंबई में बैठकर गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड पर भाटिया आयोग की सिफारिशें लागु करवाने हेतु बोर्ड के साथ खिलवाड़ कर रहें कुछ एसजीपीसी के प्रतिनिधियों ने? या आप स्वयं ही पधार गए?
श्री सिरसा शिष्टमंडल की कार्यतत्परता से यह स्पष्ट हो जाता है कि महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर मनजिंदरसिंघ सिरसा का प्रभाव सकारात्मक हैं. एक समय वो भी था जब श्री सिरसा ने देवेंद्र फडणवीस को खुश करने की नियत से शिवसेना नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री श्री उद्धव ठाकरे और उनके बेटे श्री आदित्य ठाकरे के खिलाफ ट्वीटर पर मोर्चा खोल डाला था. उद्धव ठाकरे के खिलाफ राजनीतिक द्वंद कर रहीं फ़िल्म अभिनेत्री कंगना राणावत को भी उन्होंने खूब प्रोत्साहित किया था. तत्काल में उनकी इन बातों ने महाराष्ट्र के भाजपा सर्वोसर्वा श्री देवेंद्र फडणवीस का मन जीत लिया था. इस कारण देवेंद्र फडणवीस कभी मनजिंदरसिंघ सिरसा की मांग टाल नहीं सकते यह स्पष्ट हैं. इस कारण सिरसा ने बहुत सोची समझी रणनीति के तहत विजय सतबीरसिंघ को प्रशासक के रूप में नियुक्त करवा दिया कि वें एक सिख है. पंजाब और अन्य प्रदेशों में गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड पर गैर सिख प्रशासक नियुक्ति का विषय गहराया हुआ था. विजय सतबीरसिंघ की नियुक्ति के बाद सिरसा समर्थकों ने और एसजीपीसी के नेताओं ने जैसे जश्न मना डाला. शोशल मीडिया पर सिरसा की कामयाबी के कशीदे छपने शुरू हो गए. विजय सतबीरसिंघ की नियुक्ति को अब एसजीपीसी के प्रधान भाई हरजिंदरसिंघजी धामी से लेकर सामान्य भाजपा कार्यकर्त्ता भी उचित मान रहा हैं. नांदेड़ के भाजपा कार्यकर्त्ता भी मौन अपना कर सिरसा की कृति को बल प्रदान कर रहें हैं. हजुरसाहिब में सर्वसामान्य स्थानीय कार्यकर्ता विजय सतबीरसिंघ के परिवार की सिक्खी को लेकर शोशल मीडिया में प्रश्न उठा रहें हैं. कुलमिलाकर गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड अब इन राजनीतिकों के लिए राजनीति का मैदान बन गया है.
कलम ग्यारह का निराकरण करवाएं सिरसा !
इधर नांदेड़ में बैठें हजूरी, सिंघ सरदार भी हैरत में है कि महाराष्ट्र सरकार, विशेष कर नेता श्री देवेंद्र फडणवीस ने कैसे एक ही मुलाकात में सिरसा की बात को स्वीकार कर लिया हैं. यहाँ तक कि चार दिन पहले जारी सरकारी नोटिफिकेशन को बदलने का निर्णय कुछ क्षणों में ले लिया? ताज्जुब है कि श्रीमान देवेंद्र फडणवीस और महाराष्ट्र सरकार नांदेड़ के सिखों की बात कभी क्यों नहीं सुन पायीं हैं? नांदेड़ का सिख समाज विगत आठ वर्षों से श्रीमान देवेंद्र फडणवीस से निवेदन करता आ रहा हैं कि उनके द्वारा ता. 15 फरवरी, 2015 के दिन विधानसभा में बतौर विधेयक गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड कानून 1956 की धारा 6 के प्रावधान मुताबिक अध्यक्ष नियुक्ति अथवा निर्वाचन को प्रभावित करती कलम ग्यारह में किये गए संशोधन को रद्द कर कानून की धारा 11 को पूर्ववत करने की जाए. कलम ग्यारह के पूर्व प्रावधान लौटाए जाए. लेकिन श्री देवेंद्र फडणवीस गत आठ वर्षों से नांदेड़ के सिखों की मांग अनसुनी कर रहें हैं. श्री फडणवीस यह बताये कि सिखों की इस धार्मिक संस्था के अध्यक्ष नियुक्ति के अधिकार सरकार के अधीन क्यों कर लिए गए है? इन सवालों के जवाब नांदेड़ के सिख समाज को कब सुनने को मिलेंगे.
याद दिला दें कि कुछ साल पहले मनजिंदरसिंघ सिरसा और शिरोमणि अकाली दल के सभी नेताओं ने वीडियो जारी कर कलम ग्यारह रद्द करने का विषय गर्म किया था. लेकिन जैसे ही एसजीपीसी के सदस्य भूपिंदरसिंघ मिनहास को प्रधान नियुक्त किया गया वैसे ही सबने चुप्पी साध लीं. अचरज है कि गुरु घर की बातें सामने रखकर तिकड़म भिड़ानेवाले सिरसा कभी कलम ग्यारह के संशोधन रद्द करवाने की बात लेकर देवेंद्र फडणवीस से नहीं मिलें. सिरसा चाहे तो एक दिन में कलम ग्यारह के विषय का निराकरण करवा सकते हैं. लेकिन श्री सिरसा इस विषय में प्रतिनिधित्व नहीं कर रहें हैं.
विजय सतबीरसिंघ क्यों पक्ष में है भाटिया कमेटी की रिपोर्ट पर?
2014 से 2015 का वो कार्यकाल स्मरण में लाया जाना चाहिए जब श्री विजय सतबीरसिंघ ने भाटिया कमेटी की रिपोर्ट को लागु करवाने के सभी रास्तें अनुकूल बना डाले थे. मुंबई, ठाणे, पुणे और नासिक शहरों से गुरुद्वारा बोर्ड पर सदस्य मनोनीत करने की सिफारिशों को उन्होंने उचित करार दिया था. हजुरसाहिब में भाटिया कमिटी की सिफारिशें लागु करने के विषय में विरोध होता आया हैं. पहले, उस विषय को तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस तक पहुंचाकर विरोध किया गया था. सन 2015 में भाजपा के पूर्व विधायक स्व. तारासिंह ने गुरुद्वारा एक्ट में सीधे ही बदलाव करवाकर खुद को प्रधान बना कर जबरन बोर्ड के सूत्र हाथ में लिए थे. उस समय विजय सतबीरसिंघ को प्रशासक पद से हटाया गया था. लेकिन उससे पूर्व विजय सतबीरसिंघ ने जस्टिस जगमोहनसिंघ भाटिया समिति के प्रारूप को अमल में लाने की पूर्ण व्यवस्था अपना ली थीं. मुंबई, ठाणे, पुणे सिंघ सभा के सदस्य लादने की रणनीति पर भरपूर कार्य हुआ हैं. अब फिर एक बार विजय सतबीरसिंघ वही पुराना विषय लागु कर सकते हैं. उनकी नियुक्ति बहुत सोच समझकर करवाई गई है ऐसी चर्चा यहाँ जारी हैं. ईश्वर हजुरसाहिब को परदे के पीछे बैठें षड़यंत्रकारियों से बचाये यहीं अरदास हैं.
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