भाटिया कमेटी का अनाकोंडा !!
अब "भाटिया समिति" से निकला एक केचुआ पता नहीं कब कैसे बीन बाजक शक्तियों के लिए सांप बन गया? सुना हैं कि यह सांप अब 'उनके' सपनों में 'एनाकोंडा' के अवतार में उभर रहा हैं. अब एनाकोंडा तो मन्त्र जाप से भागेगा नहीं ! डिस्कवरी चैनेल के सपेरे भी इस एनाकोंडा को पकड़ नहीं पाएंगे. फिर क्या कीजियेगा ? फिर ! हजुरसाहिब की लाठियों में बहुत दम हैं ना ! यहां की लाठियां कारगर हैं. 'बाहरी तत्व' काम पड़ने पर अक्सर यहां की लाठियों को सहलाने लगते हैं. जाहीर हैं, बाहरी ताकतों को लकीर पिटवाना नहीं है. अबके उन्हें इस अचानक उभरे, अकल्पित एनाकोंडा को ठिकाने लगाना हैं.
(भाटिया समिति रिपोर्ट )
हजूर साहब में एनाकोंडा को लेकर जुगाड़ जारी हैं. राजनीतिक हस्तियां गहराई में विचारतंद्रा मग्न हैं. अनाकोंडा के मुकाबले के लिए गुरुद्वारा बोर्ड कानून की धाराएं खंगालना जारी हैं. अभी यह बेचारा 'एनाकोंडा' रिपोर्ट का आवरण ओढ़कर निद्रा में हैं. लेकिन उसके जागने के डर से आशंकित शक्तियां अब मांग बढ़ा रहीं हैं कि, सरकार, अपने विशेष सपेरों से उस सोये हुए अनाकोंडा को जागने से पहले ही दबोचकर 'सरकारी पिटारे' में बंद करवा दें. सरकार! जब इस अनाकोंडा (रिपोर्ट) को किसी सरकारी पिटारे में बंद कर देगी, तब हजूरी लाठियां भी निरुपयोगी हो जायेगी ! बंद पिटारे पर सिंहासन जमाकर यह लाठियां दरबार में सजाई जाएंगी. यह लाठियां किस पर बरसेगी? जाहीर हैं, अपनों पर ही बरसेंगी ! शोशल मीडिया के महारथी शोशल मीडिया पर ही हुनर दिखाते रह जायेंगे. 90 प्रतिशत लोगों के मौन की दुहाई देंगे.
इसलिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश सरदार जगमोहनसिंघ भाटिया कमेटी की रिपोर्ट में दर्ज सिफारिशों की भी समीक्षा का सही समय आ गया है. यह समीक्षा होनी ही चाहिए. उनके सुझावों की अनुकूल एवं अच्छी सिफारिशों पर विचार करने में क्या हर्ज है? जो बातें हजूर साहब के विरोध में हो उसे हमारे द्वारा ठुकरा दीं जाएं. गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड को चाहिए कि भाटिया समिति की रिपोर्ट तुरंत सार्वजनिक कर दें. गुरुद्वारा बोर्ड के स्वच्छ संचालन के लिए प्रस्तुत हो रहीं कमियों को दूर करना ही होगा. बरसों से गुरुद्वारा बोर्ड संचालन में कुछ बातें बाधाएं बनकर खड़ी हैं. उनका निराकरण करना आज के समय की अनिवार्यता हो गई हैं. अब "अनाकोंडा" की वास्तविकता उन लोगों को भी पता चलनी चाहिए जो गुरुद्वारा बोर्ड प्रतिनिधि चयन में "मतदान" करते हैं.
पंजाब और मुंबई के राजनीतिक तत्व इस अंदेखिएं एनाकॉन्डा से बुरी तरह बिफर गये हैं ! या हजूर साहब के लोगों का ध्यान बाँटने के लिए बीन बजवाई जा रहीं है? यह वास्तविकता है कि हजुरसाहब के लोगों को एकता की दुहाई देकर एनाकोंडा से भिड़ाया जा रहा हैं. बगैर वास्तविकता जानें अथवा कुछ अंतर्गत गुप्त समझौतों के कारण संभवतः आज भाटिया समिति का खुलकर विरोध जताया जा रहा हो लेकिन बीते पांच साल इस विषय पर समीक्षा के लिए कोई राजी नहीं हुआ यह भी एक विडंबना है. अब विरोध का कारण भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए.
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