रविंदरसिंघ मोदी ख़तम हो गया?
आलोचना तो होनी ही चाहिए !
ख़बर बड़ी रोचक है! मैं भी अवसाद का आलम त्यागकर खुश हुए बगैर नहीं रह पाया. लोगों में बड़ी शिद्दत के साथ यह ख़बर फैलाई जा रहीं है कि पत्रकार रविंदरसिंघ मोदी का सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव ख़तम हो गया हैं. सिख समाज में अब उसका कोई अस्तित्व नहीं रहा इस आशय की बातें पूरी ईमानदारी से फैलाई जा रहीं है. अपने अस्तित्व की मौत की बात सुनकर मैं सही मायने में खुश हुआ. यह ख़बर तो किसी अख़बार के किसी कोने का हिस्सा होनी चाहिए ताकि लोग संवेदना तो जता सकें. खैर! कौन किस मंशा से, किस अपेक्षा से ऐसी चर्चाओं को प्रोत्साहन दें रहा हैं मुझे सही मायने में कोई ख़बर नहीं हैं. शायद मेरा अलिप्त रहना भी कुछ लोगों को नागवार गुजर रहा हो?
पिछले एक वर्ष से लगातार सिख समाज में संचालित बहुत से व्हाट्सअप ग्रुप में कुछ प्रभावी राजनीतिक तत्व और कुछ गैर सिख राजनीतिक प्रोत्साहित संघठन मेरी आलोचना करने और बदनाम करवाने का उद्योग प्रामाणिकता से कर रहें थे. मुझे, हमारे किसी भी आलोचक सिख भाई को जवाब देना नहीं था, क्योंकि मेरे और समाज के संबंध राजनीतिक समीकरणों पर आधारित नहीं थे. सभी की आलोचना मैंने विनम्रतापूर्वक स्वीकार की है और आज भी कर रहा हूँ. अगस्त 2020 के बाद मैंने गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड द्वारा स्थापित मीडिया एडवाइज़र पद से अपना त्यागपत्र सौंप दिया क्योंकि मैंने एक वर्ष के लिए ही यह पद केवल और केवल धर्मप्रचार के प्रोत्साहन के लिए स्वीकार किया था. एक वर्ष पूर्ण हुआ. मैं फिर से अपने पुराने पेशे 'पत्रकारिता' में शामिल हो गया. अब इस बात की भी नाराजी समाज को और विशेष कर राजनीति में सक्रिय कुछ नेताओं को क्यों होनी चाहिए?
हमने क्या कभी किसी का राजनीतिक अस्तित्व ख़तम किया हैं ? Qक्या राजनीति में किसी की आलोचना कर चुनावी टिकट कटवाएं हैं? मुझे पता नहीं कि सिख समाज के कितने व्हाट्सप्प ग्रुप्स में मेरे बारे में असभ्य बातें कही गई और कही जा रहीं हैं. कौन कर रहा हैं यह भी नहीं जनता. कौन करवा रहा हैं यह भी नहीं जानता. मैं जिस ग्रुप में नहीं हूँ वहाँ ये कृत्य किये जा रहे हैं. संदेह हैं कि बहुत से तत्व व्यावसायिक तौर पर भी आलोचना उद्योग में जुटे हुए होंगे. लेकिन मैं किसी भी सिख भाई की आलोचना का अनादर नहीं करूँगा. मैं आपकी आलोचनाओं में भी अपने स्वयं की गलतियां खोज रहा हूँ. अपनी कमजोरी, गलती, सफलता - असफलता के विषय में आलोचना बहुत मायने रखती हैं. इसलिए सिख समाज के युवा वर्ग को मैं धन्यवाद देता हूँ. लेकिन उन तत्वों से मेरी नाराजगी जरूर रहेगी जो अपनी पहचान छुपाकर मुझ पर शब्दास्त्र चला रहे हैं और करवा रहे हैं. साथ ही कुछ लोग, कुछ गैर सिख संघटनों को खुश करने के लिए भी मेरी आलोचना में विश्वास कर रहें हैं. उन्हें भी दिल से प्रणाम, आप खुश रहिएगा.
मेरी असमय मौत की ख़बर मुझे स्वीकार हैं. क्योंकि मैं किसी व्यक्ति विशेष, राजैनितक दल, जिले के लोकल लीडर को प्रभावित करने के लिए काम नहीं कर रहा हूँ. मेरे रहने या नहीं रहने से इस समाज को कोई खासा फर्क नहीं पड़ेगा. मेरा स्वयं का हठी धर्म है जो मैं सिख समाज के सामाजिक मुद्दों को लेकर काम करता आया हूँ. यह हठी धर्म मेरी व्यक्तिगत आवधारणा पर आधारित है. कुछ आलोचक अनावश्यक रूप से मेरे नाम का समावेश बुद्धिजीवि के रूप में कर रहे हैं, सच मानियेगा मैं भी उनकी तरह ही इस संभ्रम का बोझ उठा रहा हूँ. सच्चे बुद्धिजीवि तो वो हैं जो मेरे अस्तित्व की मौत का चुपचाप जश्न मना रहें हैं. पर मुझे मेरे अस्तित्व की मौत स्वीकार है. इस मौत के लिए तीन - तीन राजनीतिक दल और एक गैर सिख संघठन को एक साल परिश्रम करना पड़ा. मुंबई से इशारे मिलते रहे, पंजाब से संकेत मिलते रहें और मुझ पर छींटाकशी होती रहीं. सुना है अब कुछ लोग भी इस आलोचना उद्योग से निवर्त्त होना चाह रहें है. कब तक मोहरे बनें रहना चाहेंगे. अंततः मैं यहीं प्रार्थना करूँगा कि यदि मेरे अस्तित्व पतन से समाज का भला होता होगा तो सौ बार मेरा अस्तित्व समाप्त कीजिए. राजनीतिक शक्तियों को उबरने के लिए सामाजिक कार्यकर्ताओं का पतन होना ही चाहिए.
रविंदर सिंघ मोदी एक सीधा, साधा और मामूली व्यक्ति है. ऐसे वजूद का पतन और खात्मा होना ही चाहिए. मैं, ऐसी चर्चा, ऐसी खबरों से नाराज नहीं हूँ. शहर के हर चौराहा, हर नुक्कड़, हर गली और घर - घर मेरी आलोचना होनी चाहिए. आपके आरोप, आपकी घृणा, आपका तिरस्कार, आपकी अवहेलना स्वीकार हैं. मुझे आज भी लग रहा है कि मैंने समाज के लिए कुछ नहीं किया! मैंने कभी कोई योगदान नहीं दिया हैं! मुझे मेरा अस्तित्व पतन स्वीकार है, सौ बार स्वीकार हैं. धन्यवाद.
(आपको ब्लॉग कैसा लगा जरूर बताइयेगा)


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