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शनिवार, 7 नवंबर 2020

 श्री गुरु ग्रंथसाहिब जी के स्वरुप गायब होने का मामला 

पश्च्याताप समारोह के मायने!

एसजीपीसी निशाने पर 

रविंदरसिंघ मोदी 

शिरोमणि अकाली दल डेमोक्रेटिक द्वारा ता. 08-11-2020 को पश्च्यापात समागम मनाया जा रहा है. पूर्व सांसद सरदार सुखदेवसिंह ढींढसा के नेतृत्व में यह कार्यक्रम अमृतसर नगरी में आयोजित हो रहा. पिछले दिनों शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी अमृतसर की टॉस्क फोर्स और श्री गुरु ग्रंथसाहिब जी के 328 लापता स्वरूपों का हिसाब मांगने धरने पर बैठें जत्थेबंदियां, निहंगसिंघ और सिखों के बीच हुईं हिंसक झड़प के बाद यह कदम उठाया जा रहा हैं. गुरुद्वारा श्री अटारी साहिब (पातशाही 6 वीं ) स्थान पर यह समागम सम्पन्न करवाया जाना है. भाई मोहकमसिंघजी और भाई मनजीतसिंघजी भोसा और अन्य हस्तियां आयोजन में सहायक की भूमिका में हैं. 


स्पष्ट है कि यह कार्यक्रम सांकेतिक है. इसलिए पंजाब सरकार भी इस आयोजन में दिक्कतें पैदा नहीं करेंगी. लेकिन यह कार्यक्रम शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान भाई गोबिंदसिंह लोंगोवाल की धार्मिक सत्ता के लिए चुनौति प्रस्तुत कर सकता है, इसलिए कार्यक्रम को लेकर पंजाब की साधसंगत में खासी उत्सुकता दिखाई दें रहीं हैं. "पश्च्याताप" के मायने क्या हैं इस विषय को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में बहस छिड़ीं हुईं हैं. पंजाब के वर्तमान हालात को देखते हुए और आगामी विधानसभा चुनावों की सुगबुगाहट देखते हुए श्री गुरु ग्रंथसाहिब जी की बेअदबी और श्री गुरु ग्रंथसाहिब जी के 328 स्वरूपों के लापता होने का विषय प्रमुख रूप से राजनीतिक पार्टियों का एजैंडा रहेगा इसमें कोई शक नहीं हैं. 


पंजाब में शिरोमणि अकाली दल (बादल) और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की लोकप्रियता में निरंतर कमी नापी जा रहीं हैं. शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी कार्यप्रणाली में "सत्ता" का उन्माद सर्वोपरि देखा गया हैं. सिखों के पांचों तखतों पर और दिल्ली गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी पर साम्राज्य स्थापित करने का अहम भी साधसंगत की नाराजगी की मुख्य वजह दिखाई दें रहीं हैं. साधसंगत से यह भी आरोप लग रहें है कि भाई गोबिंदसिंह लोंगोवाल "बादल" पार्टी के आगे नतमस्तक हैं. जिसके कारण ही गत दिनों अमृतसर में धरना दें रहीं जत्थेबंदियां और साधसंगत पर लाठियां बरसाईं गई थीं. 

जाहीर है पश्च्याताप समागम में उन बातों का हिसाब तो पूछा ही जायेगा. गौरतलब है कि, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी प्रशासन के अंतर्गत श्री गुरु ग्रंथसाहब जी के दुर्लभ 328 बीड साहब के गायब (चोरी) होने का मामला सुर्खियों में आया था. उक्त प्रकरण में सिख जत्थेबंदियों द्वारा एसजीपीसी से सवाल पूछने के लिए सिख जत्थेबंदियां धरना धरे बैठीं थीं. ता. 15-10-2020 के दिन एसजीपीसी कार्यालय के बाहर तैनात टॉस्क फोर्स द्वारा धरना दें रहें लोगों पर हमला बोला गया. सिखों की दस्तारों को गिराया गया जिसमें पंथ की बदनामी का चित्र देश ने मीडिया के माध्यम से देखा. जत्थेबंदियों द्वारा आरोप लगाया गया हैं कि, एसजीपीसी के प्रधान भाई गोबिंदसिंघ लोंगोवाल ने राजनीतिक नेताओं के संकेतों के तहत ही धरना दें रहें लोगों पर हमला करवाया. पत्रकारों के साथ  हाथापाई की घटना को भी अंजाम दिया गया.इन घटनाओं के कारण  एसजीपीसी के खिलाफ रोष व्यक्त हो रहा हैं. 

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