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सोमवार, 9 नवंबर 2020

भाटिया कमेटी का अनाकोंडा !!

रविंदरसिंघ मोदी 


यहां लोग बहुत जल्द किसी के भी बहकावे में आ जाते हैं. यदि चार - पांच लोग किसी रस्सी को निरंतर सांप बताते रहे तो अन्य लोग भी सांप ! सांप ! सांप !!! दोहराने लगते हैं. सांप निकल जाने के बाद लकीर पिटवाने वालों का हर समाज में एक हाहाकारी धड़ा होता हैं. हमारे पास बगैर सांप देखें ही तांडव मचाने वाले कुछ तत्व सक्रिय रहते हैं. परदे के पीछे के खिलाड़ी हैं, वो छुपकर बीन बजाते हैं. 

अब "भाटिया समिति" से निकला एक केचुआ पता नहीं कब कैसे बीन बाजक शक्तियों के लिए सांप बन गया? सुना हैं कि यह सांप अब 'उनके' सपनों में 'एनाकोंडा' के अवतार में उभर रहा हैं. अब एनाकोंडा तो मन्त्र जाप से भागेगा नहीं ! डिस्कवरी चैनेल के सपेरे भी इस एनाकोंडा को पकड़ नहीं पाएंगे. फिर क्या कीजियेगा ?  फिर ! हजुरसाहिब की लाठियों में बहुत दम हैं ना ! यहां की लाठियां कारगर हैं. 'बाहरी तत्व' काम पड़ने पर अक्सर यहां की लाठियों को सहलाने लगते हैं. जाहीर हैं, बाहरी ताकतों को लकीर पिटवाना नहीं है. अबके उन्हें इस अचानक उभरे, अकल्पित  एनाकोंडा को ठिकाने लगाना हैं. 

(भाटिया समिति रिपोर्ट )

हजूर साहब में एनाकोंडा को लेकर जुगाड़ जारी हैं. राजनीतिक हस्तियां गहराई में विचारतंद्रा मग्न हैं. अनाकोंडा के मुकाबले के लिए गुरुद्वारा बोर्ड कानून की धाराएं खंगालना जारी हैं. अभी यह बेचारा  'एनाकोंडा' रिपोर्ट का आवरण ओढ़कर निद्रा में हैं. लेकिन उसके जागने के डर से आशंकित शक्तियां अब मांग बढ़ा रहीं हैं कि, सरकार, अपने विशेष सपेरों से उस सोये हुए अनाकोंडा को जागने से पहले ही दबोचकर 'सरकारी पिटारे' में बंद करवा दें. सरकार! जब इस अनाकोंडा (रिपोर्ट) को किसी सरकारी पिटारे में बंद कर देगी, तब हजूरी लाठियां भी निरुपयोगी हो जायेगी ! बंद पिटारे पर सिंहासन जमाकर यह लाठियां दरबार में सजाई जाएंगी. यह लाठियां किस पर बरसेगी? जाहीर हैं, अपनों पर ही बरसेंगी ! शोशल मीडिया के महारथी शोशल मीडिया पर ही हुनर दिखाते रह जायेंगे. 90 प्रतिशत लोगों के मौन की दुहाई देंगे. 

इसलिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश सरदार जगमोहनसिंघ भाटिया कमेटी की रिपोर्ट में दर्ज सिफारिशों की भी समीक्षा का सही समय आ गया है. यह समीक्षा होनी ही चाहिए. उनके सुझावों की अनुकूल एवं अच्छी सिफारिशों पर विचार करने में क्या हर्ज है? जो बातें हजूर साहब के विरोध में हो उसे हमारे द्वारा ठुकरा दीं जाएं. गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड को चाहिए कि भाटिया समिति की रिपोर्ट तुरंत सार्वजनिक कर दें.  गुरुद्वारा बोर्ड के स्वच्छ संचालन के लिए प्रस्तुत हो रहीं कमियों को दूर करना ही होगा. बरसों से गुरुद्वारा बोर्ड संचालन में कुछ बातें बाधाएं बनकर खड़ी हैं. उनका निराकरण करना आज के समय की अनिवार्यता हो गई हैं. अब "अनाकोंडा" की वास्तविकता उन लोगों को भी पता चलनी चाहिए जो गुरुद्वारा बोर्ड प्रतिनिधि चयन में "मतदान" करते हैं. 

पंजाब और मुंबई के राजनीतिक तत्व इस अंदेखिएं एनाकॉन्डा से बुरी तरह बिफर गये हैं ! या हजूर साहब के लोगों का ध्यान बाँटने के लिए बीन बजवाई जा रहीं है? यह वास्तविकता है कि हजुरसाहब के लोगों को एकता की दुहाई देकर एनाकोंडा से भिड़ाया जा रहा हैं. बगैर वास्तविकता जानें अथवा कुछ अंतर्गत गुप्त समझौतों के कारण संभवतः आज भाटिया समिति का खुलकर विरोध जताया जा रहा हो लेकिन बीते पांच साल इस विषय पर समीक्षा के लिए कोई राजी नहीं हुआ यह भी एक विडंबना है. अब विरोध का कारण भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए. 

(आपको क्या लगता हैं..? यह लेख कैसा लगा, नीचे massage box में दर्ज करवाएं.)


शनिवार, 7 नवंबर 2020

 श्री गुरु ग्रंथसाहिब जी के स्वरुप गायब होने का मामला 

पश्च्याताप समारोह के मायने!

एसजीपीसी निशाने पर 

रविंदरसिंघ मोदी 

शिरोमणि अकाली दल डेमोक्रेटिक द्वारा ता. 08-11-2020 को पश्च्यापात समागम मनाया जा रहा है. पूर्व सांसद सरदार सुखदेवसिंह ढींढसा के नेतृत्व में यह कार्यक्रम अमृतसर नगरी में आयोजित हो रहा. पिछले दिनों शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी अमृतसर की टॉस्क फोर्स और श्री गुरु ग्रंथसाहिब जी के 328 लापता स्वरूपों का हिसाब मांगने धरने पर बैठें जत्थेबंदियां, निहंगसिंघ और सिखों के बीच हुईं हिंसक झड़प के बाद यह कदम उठाया जा रहा हैं. गुरुद्वारा श्री अटारी साहिब (पातशाही 6 वीं ) स्थान पर यह समागम सम्पन्न करवाया जाना है. भाई मोहकमसिंघजी और भाई मनजीतसिंघजी भोसा और अन्य हस्तियां आयोजन में सहायक की भूमिका में हैं. 


स्पष्ट है कि यह कार्यक्रम सांकेतिक है. इसलिए पंजाब सरकार भी इस आयोजन में दिक्कतें पैदा नहीं करेंगी. लेकिन यह कार्यक्रम शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान भाई गोबिंदसिंह लोंगोवाल की धार्मिक सत्ता के लिए चुनौति प्रस्तुत कर सकता है, इसलिए कार्यक्रम को लेकर पंजाब की साधसंगत में खासी उत्सुकता दिखाई दें रहीं हैं. "पश्च्याताप" के मायने क्या हैं इस विषय को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में बहस छिड़ीं हुईं हैं. पंजाब के वर्तमान हालात को देखते हुए और आगामी विधानसभा चुनावों की सुगबुगाहट देखते हुए श्री गुरु ग्रंथसाहिब जी की बेअदबी और श्री गुरु ग्रंथसाहिब जी के 328 स्वरूपों के लापता होने का विषय प्रमुख रूप से राजनीतिक पार्टियों का एजैंडा रहेगा इसमें कोई शक नहीं हैं. 


पंजाब में शिरोमणि अकाली दल (बादल) और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की लोकप्रियता में निरंतर कमी नापी जा रहीं हैं. शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी कार्यप्रणाली में "सत्ता" का उन्माद सर्वोपरि देखा गया हैं. सिखों के पांचों तखतों पर और दिल्ली गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी पर साम्राज्य स्थापित करने का अहम भी साधसंगत की नाराजगी की मुख्य वजह दिखाई दें रहीं हैं. साधसंगत से यह भी आरोप लग रहें है कि भाई गोबिंदसिंह लोंगोवाल "बादल" पार्टी के आगे नतमस्तक हैं. जिसके कारण ही गत दिनों अमृतसर में धरना दें रहीं जत्थेबंदियां और साधसंगत पर लाठियां बरसाईं गई थीं. 

जाहीर है पश्च्याताप समागम में उन बातों का हिसाब तो पूछा ही जायेगा. गौरतलब है कि, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी प्रशासन के अंतर्गत श्री गुरु ग्रंथसाहब जी के दुर्लभ 328 बीड साहब के गायब (चोरी) होने का मामला सुर्खियों में आया था. उक्त प्रकरण में सिख जत्थेबंदियों द्वारा एसजीपीसी से सवाल पूछने के लिए सिख जत्थेबंदियां धरना धरे बैठीं थीं. ता. 15-10-2020 के दिन एसजीपीसी कार्यालय के बाहर तैनात टॉस्क फोर्स द्वारा धरना दें रहें लोगों पर हमला बोला गया. सिखों की दस्तारों को गिराया गया जिसमें पंथ की बदनामी का चित्र देश ने मीडिया के माध्यम से देखा. जत्थेबंदियों द्वारा आरोप लगाया गया हैं कि, एसजीपीसी के प्रधान भाई गोबिंदसिंघ लोंगोवाल ने राजनीतिक नेताओं के संकेतों के तहत ही धरना दें रहें लोगों पर हमला करवाया. पत्रकारों के साथ  हाथापाई की घटना को भी अंजाम दिया गया.इन घटनाओं के कारण  एसजीपीसी के खिलाफ रोष व्यक्त हो रहा हैं. 

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गुरुवार, 5 नवंबर 2020

Social and political Serve 

सामाजिक और राजनीतिक सर्वेक्षण 


हजुरसाहिब की वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक हालातों का जायजा लेने हेतु Vision media & publicize services द्वारा एक छोटा सा सर्वे आयोजित किया गया हैं. अठारह वर्ष पूर्ण कोई भी हजूर साहब निवासी सिख व्यक्ति महिला अथवा पुरुष हिस्सा लें सकता हैं. जिसमें आपको चार सवालों के जवाब भेजनें हैं.  

प्रश्न A -  हजूर साहब के सिख समाज में वरिष्ठ, सक्षम और अनुभवी नेता (महिला अथवा पुरुष) आप किसे मानते है ?  

प्रश्न B - राजनीति में सबसे सक्रिय युवा नेता (पुरुष) कौन है ? 

प्रश्न C -  समाज सेवा में कौन व्यक्ति सबसे सक्रिय कार्य कर रहा अथवा कर रहीं हैं ? 

प्रश्न D - विधान परिषद में किस सिख नेता (पुरुष अथवा महिला) को भेजा जाना चाहिए? 

उत्तर में आपको नीचे massage box में ऑप्शन a, b, c, d.

A - लिखकर पसंदीदा नाम लिखना हैं 

B - लिखकर पसंदीदा नाम लिखना हैं 

C - लिखकर पसंदीदा नाम लिखना हैं 

D - लिखकर पसंदीदा नाम लिखना है. 

ऑप्शन के उत्तर आप hajursahib.blogspot.com पर massage box में अपने नाम और मोबइल नंबर के साथ भेज दें. अथवा व्हाट्सअप नंबर 9420654574 पर भी ऑप्शन + answer भेज सकते हैं. आपका नाम गुप्त प्रणाली में रहेगा. अंतिम तारीख 12-11-2020.


https://youtu.be/mjHpPpaMwMo



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मंगलवार, 3 नवंबर 2020

रविंदरसिंघ मोदी खत्म हो गया ?

 रविंदरसिंघ मोदी ख़तम हो गया?

आलोचना तो होनी ही चाहिए !


ख़बर बड़ी रोचक है! मैं भी अवसाद का आलम त्यागकर खुश हुए बगैर नहीं रह पाया. लोगों में बड़ी शिद्दत के साथ यह ख़बर फैलाई जा रहीं है कि पत्रकार रविंदरसिंघ मोदी का सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव ख़तम हो गया हैं. सिख समाज में अब उसका कोई अस्तित्व नहीं रहा इस आशय की बातें पूरी ईमानदारी से फैलाई जा रहीं है. अपने अस्तित्व की मौत की बात सुनकर मैं सही मायने में खुश हुआ. यह ख़बर तो किसी अख़बार के किसी कोने का हिस्सा होनी चाहिए ताकि लोग संवेदना तो जता सकें. खैर! कौन किस मंशा से, किस अपेक्षा से ऐसी चर्चाओं को प्रोत्साहन दें रहा हैं मुझे सही मायने में कोई ख़बर नहीं हैं. शायद मेरा अलिप्त रहना भी कुछ लोगों को नागवार गुजर रहा हो?  

पिछले एक वर्ष से लगातार सिख समाज में संचालित बहुत से व्हाट्सअप ग्रुप में कुछ प्रभावी राजनीतिक तत्व और कुछ गैर सिख राजनीतिक प्रोत्साहित संघठन मेरी आलोचना करने और बदनाम करवाने का उद्योग प्रामाणिकता से कर रहें थे. मुझे, हमारे किसी भी आलोचक सिख भाई को जवाब देना नहीं था, क्योंकि मेरे और समाज के संबंध राजनीतिक समीकरणों पर आधारित नहीं थे. सभी की आलोचना मैंने विनम्रतापूर्वक स्वीकार की है और आज भी कर रहा हूँ. अगस्त 2020 के बाद मैंने गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड द्वारा स्थापित मीडिया एडवाइज़र पद से अपना त्यागपत्र सौंप दिया क्योंकि मैंने एक वर्ष के लिए ही यह पद केवल और केवल धर्मप्रचार के प्रोत्साहन के लिए स्वीकार किया था. एक वर्ष पूर्ण हुआ. मैं फिर से अपने पुराने पेशे 'पत्रकारिता' में शामिल हो गया. अब इस बात की भी नाराजी समाज को और विशेष कर राजनीति में सक्रिय कुछ नेताओं को क्यों होनी चाहिए?  

हमने क्या कभी किसी का राजनीतिक अस्तित्व ख़तम किया हैं ? Qक्या राजनीति में किसी की आलोचना कर चुनावी टिकट कटवाएं हैं?  मुझे पता नहीं कि सिख समाज के कितने व्हाट्सप्प ग्रुप्स में मेरे बारे में असभ्य बातें कही गई और कही जा रहीं हैं. कौन कर रहा हैं यह भी नहीं जनता. कौन करवा रहा हैं यह भी नहीं जानता. मैं जिस ग्रुप में नहीं हूँ वहाँ ये कृत्य किये जा रहे हैं. संदेह हैं कि बहुत से तत्व व्यावसायिक तौर पर भी आलोचना उद्योग में जुटे हुए होंगे. लेकिन मैं किसी भी सिख भाई की आलोचना का अनादर नहीं करूँगा. मैं आपकी आलोचनाओं में भी अपने स्वयं की गलतियां खोज रहा हूँ. अपनी कमजोरी, गलती, सफलता - असफलता के विषय में आलोचना बहुत मायने रखती हैं. इसलिए सिख समाज के युवा वर्ग को मैं धन्यवाद देता हूँ. लेकिन उन तत्वों से मेरी नाराजगी जरूर रहेगी जो अपनी पहचान छुपाकर मुझ पर शब्दास्त्र चला रहे हैं और करवा रहे हैं. साथ ही कुछ लोग, कुछ गैर सिख संघटनों को खुश करने के लिए भी मेरी आलोचना में विश्वास कर रहें हैं. उन्हें भी दिल से प्रणाम, आप खुश रहिएगा. 

मेरी असमय मौत की ख़बर मुझे स्वीकार हैं. क्योंकि मैं किसी व्यक्ति विशेष, राजैनितक दल, जिले के लोकल लीडर को प्रभावित करने के लिए काम नहीं कर रहा हूँ. मेरे रहने या नहीं रहने से इस समाज को कोई खासा फर्क नहीं पड़ेगा. मेरा स्वयं का हठी धर्म है जो मैं सिख समाज के सामाजिक मुद्दों को लेकर काम करता आया हूँ. यह हठी धर्म मेरी व्यक्तिगत आवधारणा पर आधारित है. कुछ आलोचक अनावश्यक रूप से मेरे नाम का समावेश बुद्धिजीवि के रूप में कर रहे हैं, सच मानियेगा मैं भी उनकी तरह ही इस संभ्रम का बोझ उठा रहा हूँ. सच्चे बुद्धिजीवि तो वो हैं जो मेरे अस्तित्व की मौत का चुपचाप जश्न मना रहें हैं. पर मुझे मेरे अस्तित्व की मौत स्वीकार है. इस मौत के लिए तीन - तीन राजनीतिक दल और एक गैर सिख संघठन को एक साल परिश्रम करना पड़ा. मुंबई से इशारे मिलते रहे, पंजाब से संकेत मिलते रहें और मुझ पर छींटाकशी होती रहीं. सुना है अब कुछ लोग भी इस आलोचना उद्योग से निवर्त्त होना चाह रहें है. कब तक मोहरे बनें रहना चाहेंगे. अंततः मैं यहीं प्रार्थना करूँगा कि यदि मेरे अस्तित्व पतन से समाज का भला होता होगा तो सौ बार मेरा अस्तित्व समाप्त कीजिए. राजनीतिक शक्तियों को उबरने के लिए सामाजिक कार्यकर्ताओं का पतन होना ही चाहिए. 


रविंदर सिंघ मोदी एक सीधा, साधा और मामूली व्यक्ति है. ऐसे वजूद का पतन और खात्मा होना ही चाहिए. मैं, ऐसी चर्चा, ऐसी खबरों से नाराज नहीं हूँ. शहर के हर चौराहा, हर नुक्कड़, हर गली और घर - घर मेरी आलोचना होनी चाहिए. आपके आरोप, आपकी घृणा, आपका तिरस्कार, आपकी अवहेलना स्वीकार हैं. मुझे आज भी लग रहा है कि मैंने समाज के लिए कुछ नहीं किया! मैंने कभी कोई योगदान नहीं दिया हैं! मुझे मेरा अस्तित्व पतन स्वीकार है, सौ बार स्वीकार हैं. धन्यवाद.

(आपको ब्लॉग कैसा लगा जरूर बताइयेगा)



 महत्वपूर्ण समाचार - 3 नवंबर 

जिस पर एक नज़र डाली जाए. 

अजीत समाचार 👇

🖕🖕 सिख पंथ के चतुर्थ गुरु श्री रामदास जी का प्रकाशपर्व श्रद्धा के वातावरण में मनाया गया. श्री हरिमंदिर साहब में श्रद्धालओं ने दर्शन किये और दिनभर शबद कीर्तन, कथा और परिक्रमा जैसे कार्यक्रम संपन्न हुए. गुरु रामदास जी ने अमृतसर सरोवर का निर्माण करवाया था. उस सरोवर में श्री हरिमंदिर साहब दरबार साहब का निर्माण पंचम गुरु श्री अर्जुन देव जी ने करवाया, जो आज सिक्खी का बड़ा केंद्र है. 


पंजाब केसरी 👇



ता. 02-11-2020
👇पंजाब केसरी 👇
.........समाप्त.......




रविवार, 1 नवंबर 2020

 पंजाब में समयावधि से पूर्व होंगे चुनाव?

रविंदरसिंह मोदी 

( मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह )

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदरसिंह इस बात पर गहन विचार - विमर्श कर रहे हैं कि पंजाब विधानसभा के चुनाव समयावधि से पूर्व यानी वर्ष 2021 की शुरुआत में ही करवाए जाए. उन्होंने महामहिम राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद से मुलाक़ात का कार्यक्रम भी नियित किया है पंजाब में चुनाव करवाने की पेशकश की जाए. लेकिन इस कार्यक्रम में आम आदमी पार्टी के विधायक शामिल नहीं होना चाह रहे हैं. पंजाब विधानसभा में आम आदमी पार्टी के बीस विधायक हैं. यदि वें कांग्रेस के चुनाव प्रस्ताव पर साथ आते हैं तो महामहिम राष्ट्रपति चुनाव आयोग के पास वो प्रस्ताव प्रेषित कर सकते है.

(धरना दें रहे पंजाब के किसान)

पंजाब विधानसभा में कुल 117 सीटों में कांग्रेस पार्टी के 77 विधायक हैं. आम आदमी पार्टी का समर्थन प्राप्त होने पर यह संख्या 97 हो जायेगी. उधर शिरोमणि अकाली दल बादल के पास कुल 15 विधायक हैं और उसकी सहकारी भाजपा के केवल 3 विधायक हैं. कुलमिलाकर कांग्रेस का पलड़ा भारी हैं. पंजाब विधानसभा में कांग्रेस सरकार के पास स्पष्ट बहुमत उपलब्ध हैं. ऐसे में निर्धारित पंचवार्षिक पूर्ण करने के बजाए मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह पंजाब की जनता के सिर चुनाव क्यों लादना चाह रहे हैं? 


इस तरह की सोच के पीछे मुख्य कारण हैं कि, वर्तमान समय में पंजाब के किसान केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में आंदोलन संचालित कर रहे हैं. किसानों की नाराजगी भांपते हुए शिरोमणि अकाली दल की नेता श्रीमती हरसिमरत कौर बादल ने आनन - फानन में अपने केंद्रीय मंत्री पद का त्यागपत्र सौंप दिया था. पंजाब में जाट किसानों का मतप्रतिशत अधिक होने के कारण सभी समीकरण किसानों के वोटों पर आकर रुक जाते हैं. संभवतः कैप्टेन अमरिंदर सिंह किसानों की केंद्र के प्रति नाराजी को 'कॅश' करना चाहते हैं. वैसे पंजाब विधानसभा की मियाद मार्च 2022 तक हैं यानी अभी पंद्रह महीनों की कालावधि शेष है. चर्चा हैं कि आनेवाले तीन से चार दिनों में कैप्टेन अमरिंदर सिंह दिल्ली का रुख अपना सकते हैं. 

नवज्योतसिंह सिध्दू को मनाने के प्रयास ! 


तेजतर्रार वक्ता एवं राजनेता नवज्योतसिंह सिध्दू ने कैप्टेन अमरिंदरसिंह से नाराजगी के चलते एक वर्ष पूर्व अपने मंत्रीपद का त्यागपत्र सौंप दिया था. पिछले दिनों किसान आंदोलन के समय नवज्योतसिंह सिद्धू के भाषण काफ़ी लोकप्रिय हुए. आमआदमी पार्टी के साथ साथ भाजपा ने भी उन्हें पार्टी में शामिल होने की दावत दीं. शिरोमणि अकाली दल भी उनसे मतभेद भुलाने को तैयार हो गया. समय की गंभीरता देखते हुए कैप्टेन अमरिंदरसिंह ने सिद्धू के सामने दुबारा से कैबिनेट मंत्रीपद स्वीकारने के लिए प्रस्ताव भेज दिया. दीपावली पर्व के बाद पंजाब मंत्रिमंडल का विस्तार संभव हैं ऐसा कहा जा रहा हैं. 


https://youtu.be/_jfnW-Wk0uU


Vision media & publicize services

Nanded


https://www.youtube.com/channel/UCOy6XPhBT09sdeYBEmDVSXg



शनिवार, 31 अक्टूबर 2020

 ख़ुशख़बर !! अमृतसर - नांदेड़ हवाई सेवा होगी शुरू !

सप्ताह में तीन दिन फ्लाइट 

हजुरसाहिब, नांदेड़ 31 अक्टूबर (समाचार)

हजुरसाहिब के निवासियों के लिए सकारात्मक समाचार यह है कि बहुत शीघ्र गुरु की नगरी अमृतसर से श्री हजूरसाहब नांदेड़ के लिए विमान सेवा शुरू हो रहीं हैं. जी हाँ, प्राप्त जानकारी के मुताबिक तिथि 10-11-2020 से अमृतसर से सुबह 11.30 बजे एयर इंडिया का हवाई जहाज नांदेड़ की ओर उड़ान भरेगा. दोपहर 2 बजकर 05 मिनिट पर नांदेड़ के श्री गुरु गोबिंदसिंघजी हवाई अड्डे पर लैंड करेगा. 

यह हवाई यात्रा सप्ताह में तीन दिन चलाई जायेगी. मंगलवार, गुरुवार और शनिवार को फ्लाइट उपलब्ध होगी जिसके लिए एयर इंडिया ने टिकट बुकिंग शुरू कर दीं हैं. जिस दिन फ्लाइट नांदेड़ पहुंचेगी, उसी दिन दोपहर 3 बजे अमृतसर के लिए वापसी की उड़ान भरेगी. शाम 5.30 बजे यह फ्लाइट अमृतसर पहुंचेगी. उल्लेखनीय हैं कि कोरोना संक्रमण के चलते गत मार्च माह से अमृतसर और नांदेड़ के बीच हवाई यात्रा बंद हैं. दीपावली और गुरुतागद्दी पर्व के मौके पर हवाई यात्रा का शुरू होना सुखदः माना जा रहा है. 

रविंदरसिंघ मोदी. नांदेड़. 

https://youtu.be/_jfnW-Wk0uU

https://youtu.be/_jfnW-Wk0uU



 News cutting  - Today 

डेली अजीत समाचार 

(जालंधर)

आज के डेली अजीत समाचार, जालंधर की खबर के मुताबिक शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान भाई गोबिंद सिंह लोंगोवाल ने शुक्रवार (ता. 30-10-20) को मुख्यमंत्री आवास के सामने धरना देकर मांग की कि, गत दिनों एसजीपीसी के दफ़्तर के बाहर अनशन पर बैठी सिख बिरादरी और एसजीपीसी टॉस्क फोर्स के बीच हुईं झड़पों में अनशनकर्ताओं द्वारा हिंसा फैलाकर शिरोमणि कमेटी के अधिकारी, कर्मचारी और सेवादारों के साथ मारपीट करने का आरोप लगाते हुए मामले अनशनकर्ताओं के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की. 👇👇👇


अजीत समाचार जालंधर 👇👇

केंद्र सरकार की कृषि नीतियों के खिलाफ आंदोलन कर रहे पंजाब के किसानों द्वारा भूमिका स्पष्ट करते हुए कहा गया कि पंजाब में किसान आंदोलन जारी रहेगा. किसान संघठन रेलवे पटरी पर डटकर धरना आंदोलन जारी रखेंगे. 


एक नवम्बर को पंजाब स्थापना दिवस 

सन 1966 में पंजाबी सूबे की मांग स्वीकार कर पंजाब राज्य की स्थापना की गई थी. पंजाबी सूबे पर आधारित प्रदेश रचना को लेकर दिल्ली में व्यापक आंदोलन चलाया गया था. इस समय हरियाणा को पंजाब से निकाल कर अलग राज्य बनाया गया. 👇👇




चंडीगढ़ को सबसे सुसाशित केंद्र शासित प्रदेश का ख़िताब बहाल किया जा रहा है. 👇👇



https://youtu.be/_jfnW-Wk0uU

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शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2020

नवंबर महीना सिख धर्मियों के त्योहारों का महीना 

लॉकडाउन का सिलसिला समाप्त होने के आसार? 

(तखत स्नान का फाइल फोटो)

रविंदरसिंघ मोदी 

महाराष्ट्र में त्योहारों का अपना एक सांस्कृतिक महत्व हैं. नवंबर का महीना आम तौर पर त्योहारों की दृष्टि से अनेक धर्मियों के लिए व्यस्त महीना साबित होता हैं. सिख धर्मियों के लिए तो यह महीना पूर्णतः धार्मिक आयोजनों का महीना होता हैं. इसलिए यह आशावाद उभर कर सामने आ रहा हैं कि आनेवाले सभी त्योहारों को मनाने के लिए एक स्वतंत्र वातावरण की निर्मिति हो. नागरिक आजादी से लेकिन पूर्ण सावधानीवश अपने त्योहारों का आनंद प्राप्त कर सकें. 

(श्री गुरुग्रंथ साहिब जी गुरुतागद्दी परंपरा की फाइल फोटो)

महाराष्ट्र प्रदेश में गत मार्च - 20 माह से कोविड कोरोना 19 संक्रमण की विभीषिका के कारण लॉकडाउन और अनलॉक का प्रभाव जारी हैं. मुख्यमंत्री के पिछले आदेशानुसार आनेवाली 31 अक्टूबर तक लॉकडाउन की मियाद कार्यान्वित रहेगी. उसके पश्चात लॉकडाउन बढेगा या नहीं इस विषय में उत्सुकता बनीं हुईं है. जिस तरह से पिछले एक सप्ताह से सरकार की गतिविधियां जारी हैं और कोरोना के वर्तमान हालात पैदा हुए हैं. उसको देख कर तो यहीं लग रहा है कि कुछ भी हो सकता है. आने वाले दो सप्ताह तक लॉकडाउन बढ़ाने के विषय में भी विचार चल रहा है. लेकिन अभी कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ है और 31 अक्टूबर को ही सरकार का अंतिम निर्णय जारी होगा. 


https://www.youtube.com/channel/UCOy6XPhBT09sdeYBEmDVSXg

जैसे कि आगामी नवंबर (2020) का महीना, त्योहारों का महीना है. इसलिए प्रदेश की अधिकतर जनता त्योहारों में स्वतंत्र वातावरण की अपेक्षा व्यक्त कर रहीं है. दीवाली, भाऊबीज जैसे बड़े त्यौहार मनाये जाने है. वहीं सिख धर्मियों के तखत स्नान, दीपमाला, हल्ला महल्ला, श्री गुरु ग्रन्थ साहिब जी गुरुतागद्दी, परलोकगमन दशमेश पिताजी और श्री गुरु नानक देवजी जयंती पर्व आदि आनेवाले नवम्बर महीने में मनाये जा रहे हैं. कुलमिलाकर नवंबर का महीना सिखों के आध्यातिमक संप्रभुता के प्रचार - प्रसार का माह हैं. इसलिए लॉकडाउन की मियाद समाप्त हो ऐसी प्रार्थना सभी सिख दिल से कर रहे हैं.  

शिवसेना और भाजपा टकराव में नुकसान : 


भारतीय जनता पार्टी द्वारा पिछले दो - तीन माह से शिवसेना की महाआघाडी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला गया हैं. कोरोना संक्रमण के हालात और आपातकाल में सरकार और विपक्ष को एक साथ, एक राय से नागरिकों के हितों के निर्णय लेने चाहिए. लेकिन भाजपा ने मंदिर खोले जाने के विषय में आक्रामकता का रुख अपनाकर अलग तरह की भूमिका का स्वीकार किया. आक्रामकता को बढ़ावा देकर शिवसेना और महाआघाडी सरकार को चुनौति प्रस्तुत की. धार्मिक स्थल खोले जाने के विषय को राजनीतिक मुद्दा बनाकर बिहार के चुनावों में वातावरण निर्मिति का प्रयत्न किया गया.

 

चर्चा हैं कि, विपक्ष नेता श्री देवेंद्र फडणवीस का राजनीतिक कद बिहार में वृद्धिगत हो इसलिए महाराष्ट्र की अधिक से अधिक जनता को धार्मिक स्थल खोले जाने के आंदोलन में शामिल करने का प्रयास किया गया. एक तरह से धार्मिक भावनाओं का उपयोग करने की छुपी नीति पर भाजपा ने कार्य को अंजाम देने में कोई कसर नहीं छोड़ी कहा जाए तो गलत नहीं होगा. भाजपा ने राष्ट्रीय मीडिया में छाए रहने के लिए मंदिर खोलो आंदोलन को हवा दीं ऐसे आरोप होते रहे हैं. कहा जा रहा हैं कि शिवसेना सरकार ने भाजपा की नीतियों को शिकस्त देने के लिए ही दशहरा त्यौहार के दौरान मंदिर और अन्य धार्मिक आयोजन पर लॉकडाउन का प्रभाव जारी रखा. राजनीतिक पार्टियों के आपसी टकराव से आगे सिख धर्म का कोई भी पर्व प्रभावित ना हो यह सभी की नैतिक जिम्मेदारी हैं. इसलिए अब सिख समाज को किसी भी राजनीतिक पार्टी के धार्मिक एजैंडा से प्रभावित होने की आवश्यकता नहीं है. 

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https://youtu.be/_jfnW-Wk0uU

https://hajursahib.blogspot.com/2020/10/blog-post_21.html

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बुधवार, 28 अक्टूबर 2020

 माता साहिब देवजी जन्मोत्सव का समापन 

कीर्तन दरबार, लंगरप्रसाद और नेजाबाजी !

(माता साहिब देवाजी का 339 वां जन्मोत्सव कार्यक्रम)

गुरुद्वारा माता साहिब देवाजी स्थान पर विगत तीन दिनों से मनाये जा रहे 339 वें 'माता साहिब देवाजी जन्मोत्सव' का समापन बुधवार (28-10-2020) की दोपहर श्रद्धा और उत्साह के वातावरण में संपन्न हुआ. तखत सचखंड श्री हजूरसाहब के मुख्य जत्थेदार संत बाबा कुलवंतसिंघ जी और आदरणीय पंजप्यारे साहिबान की उपस्थिति ने कार्यक्रम की चकाचौंध बढ़ा दीं. कार्यक्रम में सहायक जत्थेदार संत बाबा रामसिंघजी, मीत ग्रंथी भाई गुरमीतसिंघजी, भाई जगिंदरसिंघजी, ज्ञानी भाई अवतारसिंघजी शीतल, कथाकार भाई विजेंद्रसिंघजी, संतबाबा बलविंदरसिंघजी कारसेवा वाले, संतबाबा गुरदेवसिंघजी सहित विविध दल पंथ के जत्थेदार और धार्मिक हस्तियां मंच पर उपस्थित थे. 


(संत बाबा बलविंदरसिंघजी कारसेवा वाले)

ता. 26-10-20 की सुबह माताजी के जन्मोत्सव कार्यक्रम की शुरुआत हुईं थीं. आज समापन के दिन (बुधवार) को श्री अखंडपाठ साहब की समाप्ति, पाठ, कथा, कीर्तन दरबार आदि कार्यक्रम संपन्न हुए. इस अवसर पर सहायक जत्थेदार संत बाबा रामसिंघजी ने माता साहिब देवाजी का संक्षिप्त जीवन वृतांत सुनाया. उन्होंने कहा, माताजी ने गुरुद्वारा मातासाहिब देवाजी स्थान पर सतयुग में तपस्या की थी. यह ऐतहासिक और पावन स्थान है. यह खालसा पंथ की माताजी का स्थान हैं. आज उनके जन्मोत्सव को मनाते हुए समूह पंथ को शुभकामनायें. संतबाबा बलविंदरसिंघजी कारसेवा वालों ने भी उपस्थित श्रद्धालुओं को सम्बोधित किया. 



नगर कीर्तन और नेजाबाजी से तीन दिवसीय समागम का समापन किया गया. इस दौरान भव्य लंगर प्रसाद कार्यक्रम हुआ.

(समाप्त)

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सोमवार, 26 अक्टूबर 2020

समाचार :

माता साहब देवाजी जन्मोत्सव प्रारंभ

पाठ, कथा, कीर्तन और धार्मिक दीवान 

(माता साहेब देवाजी 339 वां जन्मोत्सव, गुरुद्वारा माता साहेब)

हजूरसाहब, नांदेड़ 26 अक्टूबर 20

श्री गुरु गोबिंदसिंघजी महाराज के महल माता साहेब देवाजी के 339 वें जन्मोत्सव समारोह तपोस्थान और ऐतिहासिक गुरुद्वारा माता साहब देवा जी स्थान पर सोमवार (ता. 26-10-2020) की सुबह प्रारंभ हुआ. यह समारोह तीन दिनों तक चलेगा. आगामी बुधवार को दोपहर समारोह का समापन होगा. 

तपोस्थान माता साहेब देवा जी 

जन्मोत्सव कार्यक्रम की शुरुआत सोमवार की सुबह तखत सचखंड श्री हजूर साहब के मीत ग्रंथी भाई गुरमीतसिंघ जी की प्रमुख उपस्थिति में हुईं. इस अवसर पर गुरुद्वारा श्री लंगर साहब के संत बाबा बलविंदरसिंघजी कारसेवा वाले, गुरुद्वारा माता साहब देवा जी के जत्थेदार संत बाबा तेजासिंघजी और धार्मिक क्षेत्र की हस्तियां उपस्थित थीं. 


गुरुद्वारा माता साहब देवाजी के पूर्व जत्थेदार एवं शिरोमणि पंथ अकाली बूढ़ा दल 96 करोडी के पूर्व मुख्य जत्थेदार सचखंड वासी संतबाबा प्रेमसिंघजी की प्रेरणा अनुसार आज मातासाहब देवाजी का 339 वां जन्मोत्सव कार्यक्रम की शुरुआत श्री गुरुग्रंथ साहब जी के अखण्ड पाठ के पठन से हुईं. अरदास उपरांत धार्मिक दीवान कार्यक्रम शुरू हुए जिसमें भाई जगतेश्वर सिंघजी पटियाला वाले रागी जत्था द्वारा शबद - कीर्तन किया गया. पश्च्यात भाई जीवनसिंघजी व भाई सुखदेवसिंघजी लुधियानावाले रागी जत्था ने भी शब्दकीर्तन प्रस्तुत किया. स्थानीय रागी जत्थों द्वारा भी कीर्तन और पाठ प्रस्तुत किये गए. 
जन्मोत्सव समारोह में आगामी तीन दिनों तक सुप्रसिद्ध रागी, कथाकार, कीर्तनकार और धार्मिक क्षेत्र की हस्तियां, पंजप्यारे साहिबान, निहंग सिंघ दल, पंथ, संप्रदाय और गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति होगी. 
कोरोना संक्रमण की परिस्थिती देखते हुए माता साहेब परिसर में विशेष सावधानी बरतीं जा रहीं हैं. परिसर वैद्यकीय सेवा पथक भी नियुक्त किया गया हैं. सोशल डिस्टन्सिंग का विशेष ख्याल रखा गया हैं.  

लंगर प्रसाद : 

मातासाहब गुरुद्वारा में जन्मोत्सव के लिए विशेष लंगर संचालित हो रहा हैं. बाबा लालसिंघजी कारसेवा वाले और गुरुद्वारा लंगर साहेब  के सेवादार अविरत रूप से यहां लंगर सेवा कर रहे हैं. ब्रेड पकोड़े और चाय का लंगर भी संचालित हो रहा हैं.  

पुलिस बंदोबस्त : 

जन्मोत्सव कार्यक्रम के संचालन हेतु मुदखेड पोलिस स्थानके के निरीक्षक श्री सुनील निकाळजे के मार्गदर्शं में भव्य पोलिस बंदोबस्त तैनात किया गया हैं. मातासाहेब परिसर में पुलिस द्वारा कोरोना को लेकर भी सुरक्षा हेतु आवाहन किया जा रहा हैं. 

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रविवार, 25 अक्टूबर 2020

हजूर साहब में दशहरा हल्ला महल्ला उत्साह से मनाया 

रविंदरसिंघ मोदी 

( तखत सचखंड श्री हजूर साहिब में दशहरा हल्ला महल्ला यात्रा का दृश्य )

तखत सचखंड श्री हजूर साहब में परंपरागत दशहरा हल्ला महल्ला हार उत्साह के साथ मनाया गया. रविवार ता. 25 अक्टूबर 20 को सुबह तड़के तखत साहब के दर्शन शरू हुए. दोपहर दशहरा महात्म श्री चंडी साहब पाठ का समापन संपन्न हुआ. तखत साहब के जत्थेदार संतबाबा कुलवंतसिंघजी और पंजप्यारे साहिबान की उपस्थिति में शास्त्र पूजन किया गया. पश्च्यात अरदास कर पारंपरिक हल्ला महल्ला यात्रा निकाली गई. यात्रा में रागी जत्थे, कीर्तन जत्थे, गुरु महाराज के घोड़े शामिल थे. संतबाबा बलविंदरसिंघ जी यात्रा में उपस्थित थे. यह यात्रा मुख्य डयोढ़ी गेट नंबर एक से गुरुद्वारा मुख्य रोड़, गुरुद्वारा चौराहा से महावीर चौक पहुंची जहाँ प्रथानुसार हल्ला कार्यक्रम संपन्न हुआ. हल्ला कार्यक्रम में बड़ी संख्या में नौजवानों ने हिस्सा लिया. देर शाम यह यात्रा तखत सचखंड हजूर साहब पहुंची. हल्ला महल्ला यात्रा में हजुरसाहब साधसंगत और नौजवान बड़ी संख्या में उपस्थित थे.  





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