पंजाब में समयावधि से पूर्व होंगे चुनाव?
रविंदरसिंह मोदी
( मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह )
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदरसिंह इस बात पर गहन विचार - विमर्श कर रहे हैं कि पंजाब विधानसभा के चुनाव समयावधि से पूर्व यानी वर्ष 2021 की शुरुआत में ही करवाए जाए. उन्होंने महामहिम राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद से मुलाक़ात का कार्यक्रम भी नियित किया है पंजाब में चुनाव करवाने की पेशकश की जाए. लेकिन इस कार्यक्रम में आम आदमी पार्टी के विधायक शामिल नहीं होना चाह रहे हैं. पंजाब विधानसभा में आम आदमी पार्टी के बीस विधायक हैं. यदि वें कांग्रेस के चुनाव प्रस्ताव पर साथ आते हैं तो महामहिम राष्ट्रपति चुनाव आयोग के पास वो प्रस्ताव प्रेषित कर सकते है.
(धरना दें रहे पंजाब के किसान)
पंजाब विधानसभा में कुल 117 सीटों में कांग्रेस पार्टी के 77 विधायक हैं. आम आदमी पार्टी का समर्थन प्राप्त होने पर यह संख्या 97 हो जायेगी. उधर शिरोमणि अकाली दल बादल के पास कुल 15 विधायक हैं और उसकी सहकारी भाजपा के केवल 3 विधायक हैं. कुलमिलाकर कांग्रेस का पलड़ा भारी हैं. पंजाब विधानसभा में कांग्रेस सरकार के पास स्पष्ट बहुमत उपलब्ध हैं. ऐसे में निर्धारित पंचवार्षिक पूर्ण करने के बजाए मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह पंजाब की जनता के सिर चुनाव क्यों लादना चाह रहे हैं?
इस तरह की सोच के पीछे मुख्य कारण हैं कि, वर्तमान समय में पंजाब के किसान केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में आंदोलन संचालित कर रहे हैं. किसानों की नाराजगी भांपते हुए शिरोमणि अकाली दल की नेता श्रीमती हरसिमरत कौर बादल ने आनन - फानन में अपने केंद्रीय मंत्री पद का त्यागपत्र सौंप दिया था. पंजाब में जाट किसानों का मतप्रतिशत अधिक होने के कारण सभी समीकरण किसानों के वोटों पर आकर रुक जाते हैं. संभवतः कैप्टेन अमरिंदर सिंह किसानों की केंद्र के प्रति नाराजी को 'कॅश' करना चाहते हैं. वैसे पंजाब विधानसभा की मियाद मार्च 2022 तक हैं यानी अभी पंद्रह महीनों की कालावधि शेष है. चर्चा हैं कि आनेवाले तीन से चार दिनों में कैप्टेन अमरिंदर सिंह दिल्ली का रुख अपना सकते हैं.
नवज्योतसिंह सिध्दू को मनाने के प्रयास !
तेजतर्रार वक्ता एवं राजनेता नवज्योतसिंह सिध्दू ने कैप्टेन अमरिंदरसिंह से नाराजगी के चलते एक वर्ष पूर्व अपने मंत्रीपद का त्यागपत्र सौंप दिया था. पिछले दिनों किसान आंदोलन के समय नवज्योतसिंह सिद्धू के भाषण काफ़ी लोकप्रिय हुए. आमआदमी पार्टी के साथ साथ भाजपा ने भी उन्हें पार्टी में शामिल होने की दावत दीं. शिरोमणि अकाली दल भी उनसे मतभेद भुलाने को तैयार हो गया. समय की गंभीरता देखते हुए कैप्टेन अमरिंदरसिंह ने सिद्धू के सामने दुबारा से कैबिनेट मंत्रीपद स्वीकारने के लिए प्रस्ताव भेज दिया. दीपावली पर्व के बाद पंजाब मंत्रिमंडल का विस्तार संभव हैं ऐसा कहा जा रहा हैं.
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