लेख : हिन्दी दिवस
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सोमवार, 14 सितंबर 2020
हिन्दी समृद्धि की ओर
रविवार, 13 सितंबर 2020
मेरी ख़ामोशी को मेरी कमजोरी ना समझें - उद्धव ठाकरे
मेरी ख़ामोशी को, मेरी कमजोरी ना समझें - उद्धव ठाकरे
कोविड की दूसरी लहर !
रविंदरसिंघ मोदी
महाराष्ट्र में बढ़ती जा रहीं राजनीतिक गतिविधियों और विपक्ष के तेज होते हमलों को जवाब देते हुए मुख्यमंत्री श्री उद्धव ठाकरे ने चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि कुछ लोग राजनीति की हद पार कर महाराष्ट्र सरकार और महाराष्ट्र प्रदेश को बदनाम कर रहें हैं. उन्हें अपनी राजनीति से बाज़ आ जाना चाहिए. ये सब बर्दाश्त नहीं किया जायेगा. मेरी ख़ामोशी को कोई मेरी कमजोरी कह कर ना आंके. उद्धव ठाकरे रविवार की दोपहर टेलीविजन मीडिया पर सभी नागरिकों को संबोधित कर रहें थे. उद्धव ठाकरे ने मराठा आरक्षण को लेकर अपनी भूमिका भी स्पष्ट की. बहुत दिनों बाद उद्धव ने आज महाराष्ट्र की जनता और मीडिया का सामना किया. उनका स्वागत है.
जाहिर हैं कि उद्धव ने अपनी बात रखते हुए इशारों इशारों में दिल्ली में शतरंज की बाजी सजाये बैठें राजनीति के पासेबाजो को भी सीधी चेतावनी दे डाली. दूसरी ओर महाराष्ट्र में राजनीति कर रहें स्थानीय नेताओं को भी अपनी भूमिका से अवगत करवा दिया. विगत दो - तीन माह से महाराष्ट्र राजनीतिक पटल पर अशांत हैं. अभिनेता सुशांतसिंह राजपूत की आत्महत्या मामला, अभिनेत्री रेहा चक्रवर्ती की सी. बी. आई. जाँच का मामला, फिल्म अभिनेत्री कंगना राणावत द्वारा प्रस्तुत की जा रहीं राजनीतिक चुनौतियों का ताजा मामला, विपक्ष की आक्रामकता, अधिवेशन के संसदीय कामकाज का तनाव, सरकार में शामिल मित्र दलों का रवैय्या और मीडिया पर उछाली जा रहीं शिवसेना की छवि जैसे मुद्दों से मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे चिंता में हैं.
ऐसे में अभी मुंबई में शिवसैनिकों द्वारा एक पूर्व नेवी अधिकार की गई पिटाई का मामला भी शिवसेना को क्षति पहुंचा गया. मराठा आरक्षण भी विषय सरकार के खिलाफ माहौल दिखाई दे रहा हैं. गली से लेकर दिल्ली तक शिवसेना को आहत करने का प्रयास हो रहा हैं. ऐसे हालातों में शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत अकेले ही बोले जा रहे हैं. उद्धव ठाकरे उपर्युक्त विषयों पर चुप्पी साधे बैठें थे.
आज उद्धव ठाकरे को अपनी उपस्थिति दर्ज करानी पड़ गई कि, है, मैं भी हूँ राजनीति में. मैं भी सवालों का जवाब दे सकता हूँ. सही समय पर उद्धव ठाकरे ने अपनी बात कही. जिसका एक असर तो राज्यपाल महामहिम से मिलने पहुंची कंगना राणावत के व्यवहार में भी देखने को मिला. राज्यपाल से मिलने के कंगना राणावत ने यह कहा कि, मैं एक नागरिक की हैसियत से महामहिम राज्यपाल से मिलने आई थी. उनसे मिलकर मैंने अपने घर पर हुईं बी.एम. सी. की करवाई की शिकायत की हैं. कंगना द्वारा कोई अन्य राजनीतिक बयान नहीं दिया गया. उद्धव के मीडिया में सक्रिय होने का इसे परिणाम कहा जा सकता हैं.
श्री ठाकरे ने आज महाराष्ट्र में व्याप्त कोरोना संक्रमण के हालातों पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि कोरोना की यह दूसरी लहर लौट आई है और नागरिक इससे सुरक्षित रहे. उन्होंने अस्पतालों में साहित्य सामग्री उपलब्ध करवाने और कोविड संक्रमण का डटकर सामना करने का आश्वासन दिया. महाराष्ट्र में हालात चिंताजनक होने की बात उन्होंने स्वीकार की. प्रदेश के इन हालातों में कुछ लोग सत्ता का खेल, खेलकर महाराष्ट्र में सत्ता परिवर्तन का दांव लगा रहे हैं. इसके लिए बाहर से मोहरे आयात किये जा रहे हैं.
सुशांतसिंह राजपूत की मौत महाराष्ट्र की सरकार पर प्रहार करने और बिहार के चुनाव अपने पक्ष में प्रभावित करने का अच्छा खेल शुरू हैं. विपक्ष के नेता अपने राज्य से अधिक दिल्ली से अधिक लगाव रखते हैं यह अलग से कहने की बात तो नहीं हैं. लेकिन मुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख के रूप में उद्धव ठाकरे की मीडिया में वापसी जरुरी हो गई थी. यदि उद्धव ठाकरे इस बात का अहसास नहीं करवाएंगे कि शिवसेना एक आक्रामक राजनीतिक पार्टी है, तो विपक्ष प्रति पल शिवसेना को नोचता रहेगा इसमें संदेह नहीं है. ख़ामोशी में अक्सर बहुत से सवालों के जवाब दबकर रह जाते हैं. फब्तियां कसने वाले ऐसे समय राजनीतिक भड़ास निकाल लेते हैं. उद्धव ठाकरे को अपनी "पुरानी शिवसेना छवि" जागृत करनी होगी. अन्यथा पार्टी का राजनीतिक आधार घट जायेगा. इसलिए इस वापसी का संज्ञान उन लोगों को भी लेना चाहिए जो अपने घर बैठकर शल मीडिया को हथियार बनाने में लगे हुए हैं. शिवसेना पार्टी को पिछले 60 वर्षों का इतिहास हैं. पार्टी का कार्य महाराष्ट्र की बुनियादी मुद्दों से सलग्न हैं. विचलन, संकट और विरोधाभास में भी स्वर्गीय बालासाहब ठाकरे ने शिवसेना की आक्रामकता कम नहीं होने दी थीं यह इतिहास अलग से अवगत करवाने की आवश्यकता नहीं हैं.
शुक्रवार, 11 सितंबर 2020
महाराष्ट्र में कोरोना संक्रमण चरम पर
महाराष्ट्र में कोरोना चरम पर
पॉजिटिव मरीजों की संख्या 10 लाख पार !
रविंदरसिंघ मोदी
कोरोना संक्रमितों की संख्या को लेकर महाराष्ट्र अब विश्व में पांचवें स्थान पर पहूंच गया है. महाराष्ट्र प्रदेश में 11सितंबर 20 के दिन संक्रमितों की संख्या दस लाख को पार कर गईं. वहीं विगत छह माह से उत्पन्न इस त्रासदी में राज्य में जान गंवा चूके लोगों का आकड़ा 28, 282 हो गया हैं. आज 448 लोगों की जानें चली गईं. वहीं नये मरीजों की आज की संख्या 23446 बताई जा रही हैं. कुलमिलाकर महाराष्ट्र प्रदेश कोरोना के संक्रमण से सराबोर हो चला हैं.
दूसरी ओर भारत (देश) में शुक्रवार को संक्रमित मरीजों का आकड़ा 46 लाख 46 हजार से अधिक हो चला हैं. सबसे अधिक चिंतावाली बात यह हैं कि एक दिन में 86 हजार 344 केसेस सकारात्मक पाए गए. एक दिन में देश में 1052 मौतें हुई और छह माह की इस त्रासदी में मरनेवालों का अंक 77 हजार 336 पर पहूंच गया. यह चित्र देखने के बाद देश में महाराष्ट्र की स्थिति किस तरह से गंभीर हो गईं हैं उसका अंदाजा लगाया जा सकता हैं. सितंबर का यह माह गंभीर परिणाम दे रहा हैं. इसलिए सभी से यह अपेक्षा की जा सकती हैं कि जितना अधिक समय आप घर पर रहोगे, उतना सुरक्षित रहोगे.
दूसरी ओर अमरीका में कोरोना संक्रमितों का आकड़ा 65 लाख 98 हजार से अधिक हैं. अमरीका में पॉजिटिव केसेस अब घटने लगे हैं. भले ही वहां मरनेवालों का आकड़ा 1 लाख 96 हजार 470 हैं लेकिन आज के दिन 24 घंटों में मौतों का अंक 152 तक नियंत्रित करने में उन्हें सफलता अर्जित हुई हैं. अमरीका आज कोरोना केसेस में भले एक नंबर पर हैं, लेकिन कोरोना संक्रमण का डटकर मुकाबला किया जा रहा हैं. भारत दूसरे स्थान पर हैं. वहीं तीसरे स्थान पर ब्राजील और चौथे स्थान पर रूस हैं.
पेरू, कोलम्बिया, दक्षिण अफ्रीका, फ्रांस, स्पेन आदि देशों ने कोरोना संक्रमितों में मरनेवालों का आकड़ा शून्य पर लाया हैं. भारत में भी अन्य देशो की तरह उपाय योजना आवश्यक हैं. विशेषकर महाराष्ट्र की बिगड़ती चली जा रहीं परिस्थिति को नियंत्रित किया जाना जरुरी हैं.
श्री दशम ग्रन्थ साहब की कथा का विरोध क्यों?
श्री दशम ग्रन्थ साहब की कथा का विरोध क्यों?
रविंदरसिंघ मोदी
तिथि 1/09/2020 से 8/09/2020 के दरम्यान गुरुद्वारा श्री बंगलासाहब, दिल्ली में श्री दशम ग्रंथसाहब अंतर्गत दशमेश पिता श्री गुरु गोबिंदसिंघजी महाराज की आत्मकथा पर आधारित कथा करवाई गईं. दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा यह कथा दरबार आयोजित करवाया गया था. इसलिए इस धार्मिक संस्था की सराहना होनी चाहिए, इस कार्य के लिए संस्था के अध्यक्ष विधायक मनजिंदर सिंघ सिरसा भी बधाई के पात्र है.
श्री गुरु गोबिंदसिंघजी महाराज खालसा पंथ के सृजनहार है. उन्होंने अमृत की दात के साथ पांच ककार अंगीकृत एक विशेष पहरावा भी प्रदान किया. जिसके कारण आज भीड़ में खड़ा सिख (खालसा) आसानी से पहचाना जा सकता है. ऐसे गुरु के आत्मचरित्र 'बचित्र नाटक' की कथा का विरोध तखत श्री दमदमा साहब के पूर्व जत्थेदार (विज्ञानी) भाई केवलसिंघजी द्वारा किया गया है. अखबारों में बयान जारी कर इस कथा का विरोध और श्री दशम ग्रन्थ साहब का विरोध उन्होंने शुरू किया है. वें पंत के विद्धवान माने जाते है ! मुझे लगता है, उनका विरोध संकुचित बुद्धि का उदाहरण माना जाना चाहिए.
तखत दमदमा साहब वो स्थान है जहाँ श्री गुरु गोबिंदसिंघ जी महाराज ने श्री आदि गुरु ग्रंथसाहब की दुबारा से संपादन करवाई थीं. गुरु जी दमदमा साहब में लगभग चार वर्ष का समय लगाकर गुरूजी ने दुबारा से श्री आदि गुरु ग्रन्थ साहब जी का स्वरुप पूर्ण करवाया था. कहा जाता है कि वहां तैयार की गईं प्रतियों में से एक मुख्य स्वरुप को गुरूजी अपने साथ लेकर श्री हजुरसाहब पहुंचे थे जिस पर महाराज के दस्तखत भी मौजूद थे. तखत दमदमा साहब का इतिहास बहुत कुछ कहता है लेकिन वहां के जत्थेदार रह चूके भाई केवलसिंघ जी उस इतिहास को सुनना नहीं चाहते. लग गए अपने ही गुरु की आत्मकथा का विरोध करने!
श्री दशम ग्रन्थ साहब सिखों के अमर इतिहास की सबसे बड़ी साक्ष्य है. यह सिख इतिहास का सबसे प्रामाणिक संदर्भ ग्रन्थ है. इससे प्रामाणिक विरासत कोई दूसरी नहीं हो सकती. अपने अंतिम समय में श्री गुरु गोबिंदसिंघ जी महाराज ने श्री आदि गुरु ग्रन्थ साहब को गुरुता प्रदान कर सिखों को आदेश दिया था "अगिया भई अकाल की तबै चलायो पंथ, सभ सिखन को हुकूम हैं गुरु मानियो ग्रन्थ "
यह संदर्भ जाँच लीजिए भाई केवलसिंघ जी ! गुरु जी ने कहीं भी यह नहीं कहा कि श्री दशम ग्रन्थ को "गुरु" का संबोधन दिया जाये. ग्यारहवें गुरु तो वहीं है जिनका चयन गुरु जी ने गुरुतागद्दी के लिए कहा था. हम सब भी वहीं आदेश मानते हैं. लेकिन गुरु जी ने यह भी नहीं कहा कि उनके द्वारा रचे गए श्री दशम ग्रन्थ का तिरस्कार करो. गुरु जी द्वारा बहुत परिश्रम के साथ श्री दशम ग्रन्थ साहब की रचना की गईं जिसमें 1428 पृष्ठ शामिल हैं. इस अद्धभुत ग्रन्थ में सभी धर्मो की जानकारी प्रदान की गईं हैं. गुरूजी के जीवन काल के समय में अध्यात्म क्षेत्र में जितने अवतार और धार्मिक कथाएं प्रचलित थीं, उनको गुरूजी ने अध्यन कर सिखों के लिए इस ग्रन्थ के माध्यम से प्रस्तुत की जो साहित्य का अद्धभुत और बहुगुणी उद्धारहण माना जाना चाहिए.
खालसा पंथ की दीक्षा में जो अमृतपान करवाया जाता हैं, वो अमृत पांच बाणियों के मंथन से सृजित करने की प्रथा हैं. उन पांच बाणियों से श्री दशम ग्रन्थ साहब की तीन बाणिया भी शामिल हैं, जहाँ तक श्री हजूर साहब की अमृतपान शैली का समावेश हैं. भाई केवलसिंघजी को अमृत की दात प्राप्त करते समय ही विचार करना चाहिए था कि खालसा जीवन शैली का बुनियादी मापदंड श्री दशम ग्रन्थ साहब की नींव पर निर्भर हैं. अब इस उम्र में, क्या सिक्खी त्यागोगे?
बुधवार, 9 सितंबर 2020
आज मेरा घर टूटा है..
आज मेरा घर टूटा है,
कल तुम्हारा घमंड टूटेगा!
मुंबई बनीं राजनीति की युद्धभूमि
रविंदरसिंघ मोदी
फिल्म अभिनेत्री कंगना राणावत का मुंबई पहुँचने के बाद जारी किया गया बयान बहुत मार्मिक है. कंगना ने अपने बयान में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री का नाम लिए बगैर कहा, "आज मेरा घर टूटा है, कल तेरा घमंड टूटेगा. जो हुआ अच्छा ही हुआ है मुझे कश्मीरी पड़ितों के दर्द का पता तो चला. मै, अब कश्मीर पर भी एक फिल्म बनाउंगी. "
जाहिर है कि जिसका मकान टूटता है, उसे तो दर्द होता ही है. शिवसेना सरकार द्वारा कंगना के खिलाफ उठाया गया कदम एक तरह से उसे सहानुभूति प्रदान कर गया. हालांकि बीएमसी ने मकान का कुछ हिस्सा ही ढाया है, लेकिन कंगना को उस करवाई से शोहरत और सहानुभूति मिल गईं. अब कंगना केवल फिल्म अभिनेत्री नहीं बल्कि एक नेता और एक्टिविस्ट के रूप जाने जानी लगी है. इस घटना से कंगना के दिल्ली (गुजरात) कनेक्शन मजबूत हो गए हैं.
कंगना विषय में शिवसेना पार्टी अब प्रदेश में भी अलग थलग होती नजर आ रही हैं. बीएमसी की करवाई से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के सुप्रीमो श्री शरद पवार भी नाराज दिखाई दे रहे हैं. वहीं कांग्रेस पार्टी मौन धारण किये हुए है. मुंबई में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मीडिया डेरा डाले हुए हैं. एक तरह से मुंबई युद्धभूमि बनीं हुई हैं. आगे क्या होगा इस बात की उत्कंठा सभी को हैं.
कंगना की बेछूट बयानबाजी ने शिवसेना को आहत कर रखा हैं. मुंबई पहुँचने के बाद पहले बयान में ही उसने उद्धव ठाकरे का नाम लिए बगैर "घमंडी" करार दिया. साथ ही चुनौती भी पेश की कि, आनेवाला कल तुम्हारे लिए ठीक नहीं होगा. कंगना ने आज ही "बाबर " और "बाबर की सेना" जैसे शब्द प्रयोग किये थे. जिससे यदि कोई आहत हुआ होगा तो निश्चित ही श्री उद्धव ठाकरे और उनके निकटतम सहयोगी श्री संजय राउत का नाम अग्रणी हैं. अब कंगना मुंबई पहुँच चुकी हैं तो निश्चित ही मुंबई में उनकी सुरक्षा को लेकर सारी जिम्मेदारी भी महाराष्ट्र सरकार की ही होगी. इसलिए जब तक कंगना मुंबई में रहेगी, तब तक मुंबई राजनीति की युद्धभूमि बनीं रहेगी इसमें कोई दोराय नहीं हैं.
चल गया हथौड़ा... !
चल गया हथौड़ा.... !!
रविंदरसिंघ मोदी
मराठी में एक कहावत बहुत प्रसिद्ध है, "सत्ते पुढे शहाणपण चालत नाही. ". सत्ता जब हाथ हो तो सारे नियम, कानून, कार्यालय, पुलिस और प्रशासन सब कुछ अपने हाथ ! देखिए कंगना राणावत के मुंबई पहुंचने से पहले ही उनके मुंबई के पाली हिल स्थित कार्यालय (बंगले) पर महानगर पालिका ने हथौड़ा चला दिया. अवैध निर्माण और निश्चित लेआउट में बदलाव कर निर्माण कार्य करने के आरोप में यह करवाई की गई हैं ऐसा प्रथमदृश्यनी मामला सामने आया है अथवा लाया गया है.
जैसे कि विगत कुछ दिनों से कंगना राणावत और महाराष्ट्र सरकार के बीच आरोप - प्रत्यारोप का दौर जारी हैं. इस दरम्यान तिथि 9 सितंबर को कंगना राणावत मुंबई पहुँचने वाली थीं. महाराष्ट्र की तुलना पीओके से करने और मुंबई पुलिस की तुलना बाबर सेना से करने के बाद कंगना ने बुधवार की सुबह चंडीगढ़ से फ्लाइट पकड़ने के बाद इधर मुंबई बीएमसी द्वारा उनके बंगले पर दल - बल के साथ पहुंचकर बुलडोजरयुक्त हथौड़ा चला दिया.
बीएमसी का कहना हैं कि, कंगना ने बीएमसी में प्रस्तुत निश्चित लेआउट में बदलाव करते हुए निर्माण कार्य किया. जिसकी जानकारी कंगना द्वारा बीएमसी को प्रस्तुत नहीं की गईं. कल अवैध निर्माण कार्य के लिए बीएमसी द्वारा कंगना के कार्यालय पर नोटिस चिपकाई गईं थीं. इससे पहले कि कंगना मुंबई पहुंचती अथवा उनके वकील मुंबई न्यायलय पहुँच पाते, बीएमसी द्वारा करवाई को अंजाम देते हुए अवैध निर्माण के खिलाफ हथौड़ा चला दिया गया.
बीएमसी की करवाई पर कंगना द्वारा "ऑफिस वहीं बनायेंगे" की बात कही गईं. शिवसेना की तिकड़ी सरकार द्वारा नियोजित रूप से करवाई को अंजाम दिया गया इसमें संदेह नहीं हैं. कंगना ने अवैध निर्माण की बात से साफ इंकार किया हैं. दूसरी ओर महाराष्ट्र सरकार इसे बीएमसी की करवाई बता कर पल्ला झाड़ रहीं हैं. लेकिन जाहिर हैं कि बगैर सरकारी बल के यह सबकुछ संभव नहीं हैं.
भाजपा नेता आशीष शेलार ने बीएमसी की करवाई पर आक्षेप प्रकट करते हुए मांग की कि, मुंबई के अवैध निर्माण वाले सभी इमारतों की सूची बीएमसी को प्रस्तुत की जाएगी. उन सभी स्थानों पर तुरंत करवाई की जानी चाहिए. भाजपा अब प्रतिदिन अवैध निर्माण के सन्दर्भ में सूचनाएं और सूची बीएमसी को सौंपी जाएगी. नेता प्रवीण दरेकर ने भी शहर के सभी अवैध निर्माण कार्यों पर करवाई करने की मांग की. दूसरी ओर शिवसेना प्रवक्ताओं ने मामले पर मौन धर लिया हैं.
मंगलवार, 8 सितंबर 2020
"अर्नब" के बहाने "सामना" पर निशाना !
"अर्नब" के बहाने "सामना" पर निशाना !
रविंदरसिंघ मोदी
रिपब्लिकन भारत चैनल के सर्वोसर्वा अर्नब गोस्वामी के तेवर इन दिनों देखने योग्य हैं. उनकी भाषा की दबंगई और स्वर में ललकार हैं. ये किसी आम इंसान के लिए नहीं बल्कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और शिवसेना के सुप्रीमो श्री उद्धव ठाकरे के लिए प्रयोग हो रहीं हैं. ये भाषा, यह दबंगई प्रदेश के गृहमंत्री श्री अनिल देशमुख के खिलाफ उपयोग में लाई जा रहीं हैं.
पत्रकारिता के शीर्ष पर पहुंचकर अर्नब गोस्वामी का महाराष्ट्र के नेताओं के प्रति यह ढ़ीठ रवैय्या स्पष्ट संकेत कर रहा हैं कि यह बोल किसी ने अर्नब गोस्वामी को उधार में दिए हैं. वहीं महाराष्ट्र विधानसभा अधिवेशन में आज नेता विपक्ष श्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा यह कहकर अर्नब गोस्वामी का बचाव करना कि, दैनिक सामना में भी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ अपमानित भाषा का प्रयोग किया जाता हैं ! यह सुनकर बात स्पष्ट हो जाती है कि "अर्नब' को वहीं से बल मिल रहा है, जहाँ से कंगना को "वाई" सिक्योरिटी मिली हैं.
माजरा स्पष्ट हैं कि दैनिक सामना पर निशाना साधने के लिए अर्नब गोस्वामी के 'बोल' को हथियार बनाया गया हैं. भाजपा के पास महाराष्ट्र की तिकड़ी सरकार को घेरने के लिए एक हाथ में 'अर्नब' तो दूसरे हाथ में 'कंगना' हैं. ये भी तय लग रहा हैं कि 'अर्नब' और 'कंगना' को कमसे कम राज्यसभा का टिकट तो पक्का हो गया हैं. यह दोनों हथियार महाराष्ट्र की वर्तमान सरकार को जितना "डैमेज" करेंगे, उतना दिल्ली में बैठे मोटा भाई खुश हो जायेंगे. मानना पड़ेगा कि मोटा भाई गजब की राजनीति खेल रहे हैं.
महाराष्ट्र सरकार ने आज अर्नब के खिलाफ विधानसभा में "हक्कभंग" प्रस्ताव पास किया. वहीं कंगना को रोकने के लिए भी कदम उठाये हैं. कल (9 सितम्बर ) को कंगना मुंबई पहुँच रहीं हैं. यदि कंगना मुंबई यात्रा पर पहुँचती हैं तो राजनीतिक उथल पुथल संभव हैं. कल का दिन सामना के संपादक संजय राउत के लिए बहुत अहम हैं. करो अथवा मरो जैसे हालात उनके सामने हैं. देखना होगा कि अब संजय राउत हालात का मुकाबला करने के लिए किस किस हथियार का प्रयोग करते हैं.
लेकिन यहाँ महाराष्ट्र सरकार कुछ घिरी हुई नजर आ रहीं हैं. पत्रकारों के खिलाफ सरकारीस्तर से दबावतंत्र का प्रयोग होने के आरोप दिल्ली का मीडिया लगा रहा हैं. देश के अन्य हिस्सों से भी यहीं सवाल उठ रहे हैं. ऐसे में मुख्यमंत्री श्री उद्धव ठाकरे अब क्या तिकड़म भिड़ाते हैं देखना होगा. दिल्ली वालों का दांव तो चल गया है. कल क्या होनेवाला है वो भी विशेष ही होगा !
रविंदरसिंघ मोदी
फिर एक नई शुरुआत
फिर एक नई शुरुआत..!
विगत एक वर्ष में मैं, पत्रकारिता कार्य में कुछ अलिप्त सा रहा. कुछ लेख लिखने के अलावा पत्रकारिता क्षेत्र में ज्यादा कुछ योगदान नहीं कर पाया. वजह थीं, सितंबर 2019 से अगस्त 2020 तक मैं गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड नांदेड़ (श्री हजूरसाहब) इस धार्मिक संस्था में मानद पद पर 'मीडिया एडवाइजर' की भूमिका निभा रहा था. जिसके चलते पूर्ण एक वर्ष जैसे एक्टिव पत्रकारिता को मैंने विराम सा दे दिया था. अब जबकि मै, मीडिया एडवाइज़र की जिम्मेदारी से मुक्त होकर फिर से पत्रकारिता में प्रवेश कर रहा हूँ, तब सभी के साथ और सहकार्य की पूर्ण अपेक्षा कर रहा हूँ.
दशमेश पिता श्री गुरु गोबिंदसिंघजी महाराज के परम आशीर्वाद से मै अपने आप में एक नई चेतना महसूस कर रहा हूँ. इस पावन भूमि के स्पर्श और संतों के आशीर्वाद से मै, अपने पुराने क्षेत्र में कार्य शुरू कर रहा हूँ. सन 1993 से लेकर आज तक लगभग 27 वर्षों की प्रदीर्घ पत्रकारिता में कायम रहना एक कसौटी मानी जानी चाहिए. यह सब गुरु महाराज के आशीर्वाद और संतों के आशीर्वाद से पूर्ण हुआ हैं. आगे भी मेरा भविष्य उन्हीं के आशीर्वाद पर निर्भर रहेगा इसका मुझे अहसास हैं.
आज के दौर में पत्रकारिता क्षेत्र में कार्य करना जीवन का सबसे बड़ा संघर्ष माना जा रहा हैं. कोरोना कोविड - 19 के संक्रमण से समस्त विश्व त्रस्त हैं. आज नौकरियां नहीं मिल रहीं हैं. प्रदेश में लगभग डेढ़ हजार अख़बार इस कोरोना संघर्ष काल में बंद हो चुके हैं. बड़ी संख्या में पत्रकारों ने अपनी नौकरियां गंवाई हैं. प्रिंट मीडिया के प्रचलन पर भी आंच आई हैं. संक्रमण काल में 'ई - पेपर' समाचार पत्र प्रसार प्रणाली को बढ़ावा मिला हैं. ब्लॉग, बुलेटेन, यूट्यूब चॅनेल्स की चलती हो गई.
इस दौर में मैं भी आज आम पत्रकारों की तरह संघर्षरत हूँ यह कहने में परहेज नहीं करूँगा. लेकिन संतोष इस बात का हैं कि मेरे पास अभी काम उपलब्ध हैं. मराठी, हिंदी और पंजाबी समाचार पत्रों के लिए कार्य आरंभ कर दिया हैं. साथ ही मेरा अपना यू - ट्यूब चैनल "hazursahib today" को भी संचालित कर दिया हैं. आज से ब्लॉग लेखन भी शुरू कर दिया हैं. इसलिए सभी संपादक साहब, वरिष्ठ पत्रकार, मेरे सभी पत्रकार सहकारी, पत्रकार संगठन के पदाधिकारी और सदस्यों के साथ फिर एक नई शुरुआत करते हुए सभी से सहकार्य की अपील करता हूँ.
बीते एक वर्ष में कुछ लोगों ने मेरी पत्रकारिता की प्रमाणिकता पर अप्रत्यक्षरूप से सवाल उठाये थे. उन्हें यहीं कहना चाहूंगा कि पिछले एक वर्ष मैं पत्रकारिता कार्य से अलिप्त था. क्योंकि मै एक धार्मिक संस्था में, एक महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी निभा रहा था. उस पद पर बैठकर बयानबाजी करना मैंने टाल रखा था. क्योंकि उस पद की गरिमा बनाये रखना एक जिम्मेदार और प्रामाणिक अधिकारी का फ़र्ज था. लेकिन अब पुन्हा पत्रकारिता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता उपलब्ध हैं. ऐसे में अपने क्षेत्र, अपने प्रदेश और सामाजिक एवं विकासात्मक मुद्दों को लेकर मेरी पत्रकारिता जारी रहेगी. पुन्हा आप सबसे सहकार्य की अपील कर नया लेखन प्रारंभ कर रहा हूँ.
धन्यवाद !"
स. रविंदरसिंघ मोदी, हजुरसाहब.
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बुधवार, 20 मार्च 2019
मंगलवार, 12 मार्च 2019
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| फाइल फोटो |
गुरुवार, 7 मार्च 2019
शुक्रवार, 22 फ़रवरी 2019
राजिंदरसिंघ पुजारी तनखैया घोषित !
मंगलवार, 19 फ़रवरी 2019
शुक्रवार, 1 फ़रवरी 2019
Railway news 1 st feb 2019
सभी साधसंगत हजुरसाहिब से लेकर पंजाब तक यह मांग प्रस्तुत करें.
बुधवार, 30 जनवरी 2019
रविवार, 27 जनवरी 2019
अब जब २०१९ की परेड में लाल रंग की प्रभावी वर्दी में सिख रेजिमेंट के दस्ते ने मार्च परेड किया तो तालियों की गड़गड़ाहट से उनका स्वागत हुआ. साथ ही परेड देख रहें लोगों में उत्साह का वातावरण बन गया. टी.वी. पर ये दृश्य देखनेवालों ने सिख रेजिमेंट की भूरी-भूरी प्रसंशा कर डाली. देश की रक्षा में सिख रेजिमेंट का योगदान सदा गौरवशाली रहा हैं. हर मोर्चे पर सिख रेजिमेंट अग्रसर रही हैं. ऐसी बहादुर रेजिमेंट के परेड में शामिल नहीं रहने से दुश्मनों के लिए कई तरह की चर्चाओं को अवसर मिल गया. सिख कौम में देशभक्ति का प्राकृतिक गुण है. देश की रक्षा, संस्कृति की रक्षा के सभी गुण सिख गुरुओं की शिक्षा से सृजित हैं. ऐसी सिख रेजिमेंट पर सिख ही क्या नागरिक को फक्र होना चाहिए. गणतंत्र दिवस की परेड में पथ संचलन के बाद निश्चित ही रेजिमेंट का मनोबल ऊँचा हुआ होगा. सिख रेजिमेंट के पथ संचलन के बाद देश के सभी सिखों में जज्बात जाग गए हैं. देश के लिए मर मिटने के लिए सिख युवा फिर अग्रसर हो उठे हैं.
बुधवार, 23 जनवरी 2019
आंदोलन की धमक अब देशभर
होली हल्ला महल्ला यात्रा मार्ग की दुरुस्ती करें : मनबीरसिंघ ग्रंथी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार समूह) के युथ प्रदेश सचिव स. मनबीर...
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जता जताकर और सता सताकर ! दिया जाए तो उसका मोल क्या ? रविंदरसिंघ मोदी (तखत सचखंड श्री हजूर साहब जो मुरादों की पूर्ति का दर हैं !) गुरुद्वा...
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आखरी मीटिंग, आखरी दाँव ? कलम ग्यारह पर तारासिंह की नकारात्मक भूमिका ---------- रविन्दरसिंघ मोदी फरवरी के अंतिम सप्ताह में महार...
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समाचार रजिंदरसिंघ पुजारी तनखैया घोषित पंज तख्तों पर सेवा लगाई नांदेड़, हजूर साहिब, २२ फरवरी - शुक्रवार की शाम गुरुद्वा...
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मंत्रालय से दशहरा हल्ला महल्ला को अनुमति नहीं !! मुंबई उच्चन्यायालय से उम्मीद रविंदरसिंघ मोदी (दशहरा महोत्सव फाइल फोटो) तखत सचखंड श्री हज...
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डेली वेजस कर्मचारियों पर टेढ़ी नज़र? गुरुद्वारा बोर्ड प्रशासन अब कर्मचारियों पर दुश्मनी निकालने की फिराक में ! जब से गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड ...
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गुरुद्वारा बोर्ड के जिम्मेदारानं की चुप्पी योग्य नहीं हैं ! ज्ञानी हरिंदरसिंघ जी अलवर वाले का चिंतन रविंदरसिंघ मोदी ( ज्ञानी हरिंदरसिंघ ...
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सिख श्रद्धालुओं के साथ हुईं मारपीट का निषेध भोजपुर बिहार में ट्रक पर पत्थराव और तोड़फोड़! (बिहार के भोजपुर में चंदा उगाही कर रहे युवकों के सम...






























