सिख रेजिमेंट की शानदार वापसी
देश के सिखों में ख़ुशी की लहर
रविंदर सिंघ मोदी
भारतीय गणतंत्र दिवस के अवसर पर देश की राजधानी दिल्ली में ता. २६ जनवरी, २०१९ के दिन आयोजित राष्ट्रिय परेड (संचलन) में जब सिख रेजिमेंट के सशस्त्र दस्ते ने अपनी पारंपरिक वर्दी में पथ संचालन किया तो देश के सिखों का सीना एक बार फिर फूलकर चौड़ा हो गया. देश में सन १८४६ से सेवारत सिख रेजिमेंट को सन २०१६ में अचानक से पथ संचलन परेड में हिस्सा लेने से रोक दिया गया था.
सिख रेजिमेंट का इतिहास लगभग १७२ वर्षों का है. सिखों ने हर मोर्चे पर युद्ध में हिस्सा लिया और अपना जौहर दिखाया. पाकिस्तान, चीन, बांगलादेश सहित अनेक स्थानों पर सिख रेजिमेंट ने युद्ध में हिस्सा लेकर अपनी वीरता का परिचय दिया. सन १९९९ में हुए कारगिल युद्ध में सिख रेजिमेंट की बटालियन द्वारा टाइगर हिल से पाकिस्तानी सेना को हटाकर वहां कब्ज़ा किया था. जिसमें १० सिख जवानों ने अपनी जानें गँवाई थी.
सिख रेजिमेंट के पास ७२ लड़ाईयों के सम्मान प्राप्त हैं. शहादत देकर रेजिमेंट द्वारा दो परमवीर चक्र, १४ महावीर, ५ कीर्ति चक्र, ६७ वीर चक्र सहित लगभग १६०० सम्मान प्राप्त हैं.
सिख राज्य के लुप्त होने के बाद महाराजा रणजीत सिंघजी की प्रेरणा पर सिख सैनिकों को एकत्र कर अंग्रेजों ने सिख रेजिमेंट की स्थापना की थी. बाद में प्रथम विश्वयुद्ध और द्वितीय विश्व युद्ध के समय भी विदेशों में सिख रेजिमेंट ने अपनी वीरता से सभी को स्तब्ध कर दिया था. स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद सिख रेजिमेंट को भारतीय सेना में प्रमुख फौजी रेजिमेंट के रूप में शामिल किया गया. स्वंत्रता के बाद अचानक हुए सीमा पर आक्रमण के समय सिख रेजिमेंट ने दुश्मनों के सभी आक्रमण विफल किये. सिख गुरुओं की शिक्षाओं पर मार्गक्रमण करनेवाली सिख रेजिमेंट को जब गणतंत्र दिवस के परेड में शामिल नहीं किया गया था तो देशभर के सिखों की भावनाएँ आहत हुई थी.
अब जब २०१९ की परेड में लाल रंग की प्रभावी वर्दी में सिख रेजिमेंट के दस्ते ने मार्च परेड किया तो तालियों की गड़गड़ाहट से उनका स्वागत हुआ. साथ ही परेड देख रहें लोगों में उत्साह का वातावरण बन गया. टी.वी. पर ये दृश्य देखनेवालों ने सिख रेजिमेंट की भूरी-भूरी प्रसंशा कर डाली. देश की रक्षा में सिख रेजिमेंट का योगदान सदा गौरवशाली रहा हैं. हर मोर्चे पर सिख रेजिमेंट अग्रसर रही हैं. ऐसी बहादुर रेजिमेंट के परेड में शामिल नहीं रहने से दुश्मनों के लिए कई तरह की चर्चाओं को अवसर मिल गया. सिख कौम में देशभक्ति का प्राकृतिक गुण है. देश की रक्षा, संस्कृति की रक्षा के सभी गुण सिख गुरुओं की शिक्षा से सृजित हैं. ऐसी सिख रेजिमेंट पर सिख ही क्या नागरिक को फक्र होना चाहिए. गणतंत्र दिवस की परेड में पथ संचलन के बाद निश्चित ही रेजिमेंट का मनोबल ऊँचा हुआ होगा. सिख रेजिमेंट के पथ संचलन के बाद देश के सभी सिखों में जज्बात जाग गए हैं. देश के लिए मर मिटने के लिए सिख युवा फिर अग्रसर हो उठे हैं.
अब जब २०१९ की परेड में लाल रंग की प्रभावी वर्दी में सिख रेजिमेंट के दस्ते ने मार्च परेड किया तो तालियों की गड़गड़ाहट से उनका स्वागत हुआ. साथ ही परेड देख रहें लोगों में उत्साह का वातावरण बन गया. टी.वी. पर ये दृश्य देखनेवालों ने सिख रेजिमेंट की भूरी-भूरी प्रसंशा कर डाली. देश की रक्षा में सिख रेजिमेंट का योगदान सदा गौरवशाली रहा हैं. हर मोर्चे पर सिख रेजिमेंट अग्रसर रही हैं. ऐसी बहादुर रेजिमेंट के परेड में शामिल नहीं रहने से दुश्मनों के लिए कई तरह की चर्चाओं को अवसर मिल गया. सिख कौम में देशभक्ति का प्राकृतिक गुण है. देश की रक्षा, संस्कृति की रक्षा के सभी गुण सिख गुरुओं की शिक्षा से सृजित हैं. ऐसी सिख रेजिमेंट पर सिख ही क्या नागरिक को फक्र होना चाहिए. गणतंत्र दिवस की परेड में पथ संचलन के बाद निश्चित ही रेजिमेंट का मनोबल ऊँचा हुआ होगा. सिख रेजिमेंट के पथ संचलन के बाद देश के सभी सिखों में जज्बात जाग गए हैं. देश के लिए मर मिटने के लिए सिख युवा फिर अग्रसर हो उठे हैं.
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