सिरसा जी यह पाप सिर पर ना लीजिये!
मुंबई में एसजीपीसी वालों की गुप्त मीटिंग !
'कलम ग्यारह' चर्चा की आड़ में 'भाटिया कमिटी' करेंगे लागु?
रविंदरसिंघ मोदी
एसजीपीसी के मुंबई स्थित सदस्य स. गुरविंदरसिंघ बावा ने अचानक से मुंबई स्थित उनके घर (होटल) पर आनेवाली ता. 17 और 18 अगस्त को एक बैठक आयोजन करने का ऐलान किया हैं. बावा के विशेष दूत और एसजीपीसी के सदस्य परमज्योतसिंघ चहल उस बैठक के आयोजन के लिए जी तोड़ प्रयास कर रहें हैं. उन्होंने कलम 11 विचार मंथन के नाम से एक व्हाट्सप्प ग्रुप भी शुरू किया है जिसमें हजुरसाहिब के सक्रिय नेताओं और कार्यकर्ताओं को जोड़ा जा रहा हैं. यह अचनाक से कलम ग्यारह के निराकरण के विषय में मुंबई में बैठक रखने का अधिकार उन्हें किसने दिया? सब जानते हैं कि वो पिछला अधूरा काम यानी भाटिया कमेटी की रिपोर्ट के तहत 'कलम 6 के प्रावधान' को बदलकर मुंबई के 6 सदस्य, ठाणे, पुणे और महिला सदस्य बोर्ड में नॉमिनेशन के जरिये लादने का मनसूबा पूरा करने का यह प्रयास कर रहें है. पहले उस समय, हमने आपकी उस हिमायत को रोक कर सरकार से वो प्रावधान रुकवाया था. तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस ने वो बिल निरस्त करने की घोषणा की थीं. लेकिन विधानसभा में उसे रद्द नहीं किया गया था. अब पूरा का पूरा गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड हाईजैक करने की छुपी योजना (साजिश) पूर्ण करना चाह रहें हैं. यह हजुरसाहिब के सच्चे हक़दारों के सामने करने की आपकी हिमायत कैसे हो रहीं हैं? आपकी राजनीतिक दादागिरी नहीं चलेगी. हजुरसाहिब निवासियों के हाथों से गुरु घर के प्रबंधन को हमेशा हमेशा छीनने का "पाप" शायद भाजपा नेता मनजिंदर सिंघ सिरसा से करवाया जा रहा हैं. आनेवाली 17 अगस्त को आयोजित परमज्योतसिंघ चाहल के समन्वय वाली उस मुंबई की बैठक में हजुरसाहिब के बहुत से दिग्गज उपस्थित होने जा रहें हैं. मीटिंग में उपास्थित रहने के लिए अभ्यार्थियों को ट्रेन के टिकट देना का प्रयोजन किया गया हैं. रहने की व्यवस्था भी गुरविंदरसिंघ बावा के होटल में की जा रहीं हैं, ऐसी खुलीं चर्चा यहाँ चल रहीं हैं.
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| मनजिंदरसिंघ सिरसा और दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी मुंबई में श्री देवेंद्र फडणवीस के बँगले पर बयान जारी करते हुए. |
अभी दो दिन पहले तखत सचखंड हजुरसाहिब बोर्ड के प्रशासक नियुक्ति के विषय को लेकर जो नाट्यक्रम घटित हुआ वो जग जाहीर हैं. सबने देखा और बहुत कुछ महसूस किया. हजुरसाहिब के लोगों को गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड के प्रबंधन से कैसे दूर रखा जाए उसके लिए एसजीपीसी और शिरोमणि अकाली दल ने कितनी तत्परता दिखाई. कितनी ताकत दिखाई सबने देखा हैं. किस तरह मनजिंदरसिंघ सिरसा ने एक ही बैठक में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और आधुनिक राजनीति के चाणक्य श्री देवेंद्र फडणवीस को शीशे में उतार दिया. सिरसा ने अपनी इच्छा (मांग) मनवा भी लीं और यह संदेश दें दिया कि हजुरसाहिब बोर्ड पर वहां के स्थानीय लोगों की नहीं बल्कि भाजपा और शिरोमणि अकाली दल के आधिपत्य वाली सत्ता रहेगी. श्री सिरसा ने नांदेड़ के जिलाधीश डॉ अभिजीत राऊत को तब्दील कर डॉ विजय सतबीरसिंघ की नियुक्ति करवा डाली. इस नियुक्ति को लेकर मुंबई निवासी एसजीपीसी वालों ने जो स्वार्थी खेल की चौसर बिछाई हैं, उसमें हजुरसाहिब के लोग फँसनेवाले हैं. पहले प्रधान पद गया अब पूरा कि पूरा बोर्ड हाथ से जानें वाला हैं.
मुंबई में गुप्त मीटिंग?
सरदार मनजिंदरसिंघ सिरसा, उनके हालिया मुंबई दौरे में सरदार गुरविंदरसिंघ बावा के पास ठहरें थे. मुंबई में श्री सिरसा और गुरविंदरसिंघ बावा की टीम के बीच गुरुद्वारा तखत सचखंड बोर्ड के एक्ट संशोधन को लेकर गुप्त मीटिंग भी हुईं. उस मीटिंग में संभवतः यह तय हुआ है कि कलम ग्यारह के पिछले संशोधन को निरस्त करवाते समय जो मसौदा सरकार द्वारा पारित करवाना है वो मसौदा भाटिया समिति की रिपोर्ट के आधार पर 22 सदस्यीय बोर्ड का हो. जिसमें मुंबई शहर के छह सिंघ सभा गुरुद्वारा के प्रधान अथवा प्रतिनिधि को सीधे बोर्ड का सदस्य मनोनीत किया जाए. ठाणे से भी एक सदस्य मनोनित किया जाए. वहीं मुंबई से एक महिला प्रतिनिधी की सीधी नियुक्ति की जाए, ऐसे कुल 12 सीटों पर एसजीपीसी प्रोत्साहित लोगों की नियुक्ति के प्रावधान हैं. मराठवाड़ा के सिखों के लिए सात सीटों पर चुनाव करवाएं जायेंगे. यानी, हजुरसाहिब वालों के बजाए मुंबई के लोग जनमोजन्मो तक बोर्ड की सत्ता पर रहेंगे. उनके पास 12 का बहुमत हमेशा उपलब्ध रहेगा. हजुर साहिब के लोग चुनाव लड़कर बँटे रहेंगे. यह काम अब पूर्ण ताकत और क्षमता के साथ होने जा रहा हैं. अब सिरसा एंड कंपनी तथा शिरोमणि अकाली दल की हिमायत को ना श्री अशोकराव चव्हाण रोक पाएंगे ना कि नांदेड़ के सांसद श्री प्रतापराव पाटिल चिखलीकर ही रोक पाएंगे. क्योंकि बोर्ड का संचालन इन दिनों जलगांव से संचालित हो रहा है! नांदेड़ जिले के पालकमंत्री महोदय भी आजकल गुरुद्वारा की समस्याओं के प्रति सुध नहीं लेते. नांदेड़ के नेताओं के हाथ कुछ नहीं रहा. एसजीपीसी उनके सिर पर प्रशासन कर रहीं हैं. यदि भाटिया समिति की रिपोर्ट लागु हुईं तो माना जायेगा कि दी सिख गुरुद्वारा ऑल इंडिया एक्ट का रास्ता साफ हो जायेगा.
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| नांदेड़ के पालक मंत्री किसके साथ? |
हमारा सवाल है स. परमज्योतसिंघ चाहल से कि आदरणीय पंजप्यारे साहिबान द्वारा सन 2019 में स्थापित सात सदस्यीय समिति का कलम ग्यारह के संशोधन को रद्द करवाने के लिए ड्राफ्ट बनाकर पंजप्यारे साहिबान के पास क्यों पेश नहीं किया गया? चार सालों में एक छोटा सा ड्राफ्ट मंत्रालय तक नहीं पहुँचा पाए? आप भूपिंदरसिंघ बोर्ड के समन्वयक थे. कलम ग्यारह रद्द करवाने का आश्वासन आपके साथ सभी ने दिया था. सात सदस्य समिति ने वो ड्राफ्ट पेश नहीं किया और बात अभी वहीं रुकीं हुईं हैं. मुंबई मीटिंग से पहले उस ड्राफ्ट का मसौदा आदरणीय पंजप्यारे साहिबान के पास पेश किया जाए ऐसी नैतिक मांग है. हजुरसाहब बोर्ड के संबंध में सभी बैठक हजुरसाहिब में होनी चाहिए. हजुरसाहिब की साधसंगत के प्रति गुरविंदर बावा एंड कंपनी अपना द्वेष ख़त्म करें यहीं परामर्श हैं. अंत में याद दिला दूँ, श्री अकाल तखत साहिब जी का हुकुमनामा (आदेश) है कि "एक ही घर में श्री गुरु ग्रंथसाहिब और शराब साथ नहीं रह सकते!"
सरदार जगदीप सिंघ नंबरदार द्वारा जानकारी कानून के तहत संगृहीत की गई जानकारी में देखिए 👇👇
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| जगदीपसिंघ नंबर ने माहिती अधिकार में जाँच की तो पता चला की सात सदस्य समिति द्वारा सरकार से कोई पत्रव्यवहार किया नहीं गया!👇 |
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