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शनिवार, 21 नवंबर 2020

तैयार रहिएगा संभाव्य इमरजेंसी के लिए!

कोरोना केसेस 90 लाख 50 हजार 

दूसरी लहर आने से हड़कंप 

रविंदर सिंह मोदी 

देश और विदेशों में कोरोना संक्रमण का दूसरा अटैक यानी दूसरी लहर का प्रारंभ हो चुका है. भारत देश में पिछले दस दिनों से कोरोना के केसेस में लगातार वृध्दि देखने को मिल रहीं हैं. आज देश में कोरोना संक्रमितों के आँकड़े बढ़कर 90 लाख 50 हजार पार हुए हैं जो सबसे बड़ी चिंता का कारण हैं. दिल्ली, राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, मध्यप्रदेश राज्यों के ताज़ा हालात देखकर हम यह तैयारी कर सकते हैं कि बहुत जल्द देश में कोरोना संक्रमण के प्रसार से आपदा की स्थिति बन जायेगी. एक अघोषित और संभाव्य आपातकाल हमें आगाह कर रहा हैं. इसलिए भारत के हर राज्य को संभाव्य आपातकाल के मुकाबले के लिए तैयार हो जाना चाहिए. 

राजस्थान में कोरोना संक्रमण के हालातों की वजह से सावधानी बरतते हुए हर जिले में धारा 144 (कर्फ्यू) लागु कर दिया गया. गुजरात के अहमदाबाद में रात का कर्फ्यू जारी हैं. हरियाणा में दूसरी लहर के कारण शिक्षा संस्थाओं को फिर से बंद कर दिया गया. महाराष्ट्र में भी पुणे और अन्य जिलों में संक्रमण में हल्की वृद्धि जारी हैं. जिसे देखकर लग रहा हैं कि दिसंबर माह में दुबारा से सरकार कड़क उपाय योजना लागु कर सकती हैं. यह भी कड़वी सच्चाई है कि आगामी 2021 का साल पाबंदियों के अधीन ही होगा. 

अमरीका में चुनावों के बाद कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर तबाही मचा रहीं है. प्रति दिन दो लाख पॉजिटिव मरीजों की वृद्धि हो रहीं हैं. अन्य देशों में भी कोरोना संक्रमण तेजी से प्रसारित हो रहा हैं. पिछले 24 घंटों में कोरोना से 11 हजार से अधिक मौतें होने के समाचार हैं, अकेले अमेरिका में पिछले चौबीस घंटों में मारने वालों का अकड़ा दो हजार से अधिक हैं. भारत कोरोना संक्रमण में छठे स्थान पर हैं और पिछले 24 घंटों के दौरान 548 लोगों ने जानें गंवाई हैं. 

कहा जा रहा हैं कि, कोरोना संक्रमण की वापसी का कारण हालिया त्योहारों का बीता काल कारणीभूत हैं. लोग त्योहारों में सारी सावधानी, सतर्कता दांव पर लगाकर बाजारों में शामिल हुए थे. जिससे संक्रमण में वृद्धि हुईं. दूसरे देश के अलग अलग राज्यों में चुनावों के कारण भी लोगों ने सार्वजनिक स्थानों पर जमघट लगाकर संक्रमण को बढ़ावा दिया. मतदान प्रकिया के दौरान भी सोशल डिस्टेंस मन्त्र को तिलांजलि दीं गईं. इसके अतिरिक्त पब्लिक ट्रांसपोर्ट के शुरू हो जाने के कारण भी संक्रमण विस्तारित हो रहा है. हवाई यात्रा के बढ़ जाने से स्थिति में परिवर्तन हो रहा है. रेल यात्रा के दौरान सावधानी नहीं बरतने से संक्रमण प्रसारित हो रहा हैं. 

महाराष्ट्र में इस बात का चिंतन शुरू हो गया हैं कि, आगामी दिसंबर में सर्दी और ठण्ड का मौसम कोरोना संक्रमण को बढ़ावा दें सकता हैं. आनेवाले दो से तीन माह कोरोना संक्रमण के लिए पोषक वातावरण पैदा कर सकते हैं. इसलिए सामाजिक कार्यक्रम, सभा, सांस्कृतिक आयोजन, रैली आदि पर अंकुश कस सकता हैं. 

महाराष्ट्र में पिछले 24 घंटों में 5640 नये केसेस की वृद्धि हुईं हैं. सबसे बड़ी चिंता की बात तो यह हैं कि, संक्रमण के चलते एक दिन में 155 मरीजों की मौत हुईं हैं. अब तक राज्य में संक्रमित मरीजों की संख्या 17 लाख 69 हजार पार होने के समाचार हैं. ऐसे हालातों के चलते इस दूसरी लहर का डर सरकार को सता रहा हैं. संभव हैं कि ता. 30-11-2020 को महाराष्ट्र सरकार लॉकडाउन को लेकर कोई नया कदम उठाये. इस दृष्टि से नागरिकों को संभाव्य आपात स्थिति के मुकाबले के लिए अभी से तैयारी शुरू कर देनी चाहिए. विदेशों में दुबारा से लॉकडाउन लागु हो चला हैं. भारत में भी आपातकाल संभव दिखाई दें रहा हैं. 

 

गुरुवार, 19 नवंबर 2020

 कोरोना संक्रमण फिर आक्रमण पर !

दूसरी लहर लौट आई 

अहमदाबाद, इंदौर और दिल्ली अस्वस्थ 


जैसे कि बार बार दूसरी लहर की चेतावनी दीं जा रहीं थीं, वह डर सही साबित हो रहा हैं ! जाते - जाते कोरोना संक्रमण फिर आक्रामक हो उठा हैं. दिल्ली, मध्यप्रदेश, गुजरात, हरियाणा और अन्य राज्यों में कोरोना की दूसरी लहर लौट आई हैं. एक ही दिन में देशभर में 38 हजार 617 केसेस दर्ज हुए हैं जो चिंता की सबसे बड़ी वजह बताई जा रहीं हैं. गुजरात के अहमदाबाद में कोरोना के संक्रमण की विभीषिका को देखते हुए रात का कर्फ्यू लागु कर दिया गया हैं. वहीं मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज चव्हाण ने भी इंदौर और अन्य शहरों की स्थिति का जायजा लिया हैं और वहाँ फिर से लॉकडाउन लगने की संभावना बढ़ गईं. 

देश की राजधानी दिल्ली में कोरोना का संक्रमण तेजी से प्रसारित हो रहा हैं. पिछले 24 घंटों में दिल्ली में कोरोना के चौबीस हजार से ज्यादा केसेस बढ़ गए हैं. इस दौरान 131 लोगों की एक ही दिन में मौत का मामला भी सामने आया हैं. मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने गुरुवार को प्रेस कॉनफेरेन्स लेकर चेतावनी जारी की हैं कि लोग सतर्कता बरतें. केजरीवाल ने मास्क का उपयोग नहीं करनेवाले लोगों से दो हजार रूपये जुर्माना वसूलने का कानून भी लागु कर दिया. उसी तरह से कोरोना से निपटने के लिए 1400 बेड की व्यवस्था करने के निर्देश भी उन्होंने जारी किये गए. 

हरियाणा में स्कूलों के खुलने के विपरीत परिणाम सामने आ रहें हैं. जींद में लगभग सौ स्कूली बच्चों में संक्रमण पाया गया. जिसके बाद स्कूलों को बंद करने पर सरकार द्वारा विचार शुरू कर दिया गया. इंदौर के एक ज्वेलर्स शॉप में एक वक्त 31 लोग संक्रमित पाए जाने से हड़कंप मच गया हैं. कहा जा रहा हैं, देश में कोरोना की दूसरी लहर लौट आई हैं. 

दीपावली त्यौहार के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के घर से बाहर निकलने के कारण संक्रमण में तेजी आई हैं. सर्द मौसम में संक्रमण प्रसार और भी बढ़ सकता हैं. धार्मिक, सामाजिक आयोजनों के कारण भी संक्रमण में तेजी आने की संभावना बढ़ सकती हैं. भारत में कोरोना की दूसरी लहर खासी तबाही मचा सकती हैं. क्योंकि कोरोना संक्रमण पर प्रभावकारी उपचार वैक्सीन अभी भी बाजार में उपलब्ध नहीं हैं. ऑक्सफ़ोर्ड की वैक्सीन जनवरी में अमल में लाने की तैयारी की जा रहीं है. भारत में जनवरी में ही वैक्सीन वितरण कार्य प्रारम्भ होने की संभावना दिखाई दें रहीं हैं. देश में आज कोरोना स संक्रमण का अंक 89 लाख 13 हजार के लगभग हैं वहीं मरनेवालों का अंक एक लाख 31 हजार को छू रहा हैं. 



मंगलवार, 17 नवंबर 2020

 एसजीपीसी की उपलब्धि का हजुरसाहिब में ठंडा स्वागत !

शुभकामनायें भी नहीं दीं ? 

रविंदरसिंह मोदी 

अभी हाल ही में तारीख 15-11-2020 सिखों की सर्वोच्च प्रतिनिधिक संस्था शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने संस्था गठन के एक सौ वर्ष पुरे कर लिए. सिख पंथ के लिए यह बड़ी उपलब्धि मानी जानी चाहिए. लेकिन हजूर साहिब नांदेड़, महाराष्ट्र में एसजीपीसी की इस उपलब्धि का ठंडा स्वागत हुआ है.  वो भी ऐसे समय, जब गुरुद्वारा तखत सचखंड बोर्ड पर एसजीपीसी के प्रतिनिधि प्रधान और मीत प्रधान के रूप में नियुक्त हैं. गुरुद्वारा तखत सचखंड बोर्ड औपचारिक रूप से एसजीपीसी की इस उपलब्धि पर शुभकामनायें भी प्रेषित नहीं की गईं ! हजूर साहब बोर्ड के किसी भी पदाधिकारी अथवा मेंबर द्वारा सोशल मीडिया पर भी शुभकामनायें जारी नहीं की गईं. इस हताशा के पीछे क्या कारण हो सकता हैं यह साधसंगत में चर्चा का विषय बना हुआ हैं. गुरुद्वारा बोर्ड कार्यालय द्वारा भी कोई प्रेस विज्ञप्ति जारी नहीं की गईं. 


गुरुद्वारा तखत सचखंड बोर्ड में एसजीपीसी के चार सदस्य प्रतिनिधित्व कर रहें हैं. चीफ खालसा दीवान संस्था का भी एक प्रतिनिधि यहाँ नियुक्त हैं. ऐसे में हजूर साहिब में एसजीपीसी की उपलब्धि को नजर अंदाज कर दिया गया. यूँ भी हुआ होगा कि शायद किसी को यह याद ही नहीं आया हो कि यह काम भी किया जा सकता हैं. एसजीपीसी के प्रधान भाई गोबिंदसिंघजी लोंगोवाल भी इस बात से थोड़े चिंतित हुए ही होंगे. श्री लोंगोवाल हजूर साहिब की साधसंगत की भावनाएं इस ख़ामोशी में खूब महसूस कर सकते हैं. खैर, इस मौके पर एसजीपीसी संस्था की इस खास उपलब्धि पर हम एसजीपीसी के प्रधान, मीत प्रधान, सेक्रेटरी, पदाधिकारी और सदस्यों को शुभकामनायें और बधाई प्रेषित करते हुए अरदास करते हैं कि गुरु महाराज सभी को सद्धबुद्धि, विवेक और सच्ची सेवा का बल बक्शे. 




सोमवार, 16 नवंबर 2020

 श्री गुरु ग्रंथसाहिब जी के 312 वें गुरुतागद्दी दिवस की शुभकामनायें !

रविंदरसिंह मोदी 

(श्री गुरु ग्रंथसाहिब जी गुरुतागद्दी 2020,  तखत सचखंड श्री हजूरसाहिब, नांदेड़)

तीन सौ बारह वर्ष पूर्व, तिथिनुसार, आज के दिन युगदृष्टा गुरु, परम तेजस्वी, दुष्ट दमन दशमेश पिता श्री गुरु गोबिंदसिंघजी महाराज ने हजूर साहिब नांदेड़ की पावन धरती पर श्री गुरु ग्रंथसाहिब जी को गुरुत्व यांनी गुरुतागद्दी प्रदान की थीं. गुरुतागद्दी प्रदान करते समय श्री गुरु गोबिंदसिंघजी महाराज ने आत्मिक भाव व्यक्त करते हुए आदेश दिया था, "आगिया भई अकाल की तबै चलायो पंथ, सभ सिखन को हुकूम हैं गुरु मानियो ग्रन्थ."

उस दिव्य और आलौकिक घटना को 312 वर्ष पूर्ण होने पर तखत सचखंड श्री हजुरसाहिब में श्री गुरु ग्रंथसाहिब जी का गुरुतागद्दी पर्व श्रद्धा और उत्साह के वातावरण में मनाया गया. हर वर्ष गुरुतागद्दी का समारोह उत्साह के वातावरण में ही संपन्न होता आया है. लेकिन इस वर्ष तकनीकि दिक्कतों का व्यवधान सामने था. पर गुरु महाराज की अनुकंपा और आशीर्वाद से उत्साह के माहौल में पर्व संपन्न हुआ. 

श्री गुरु ग्रंथसाहिब जी हमारे पथप्रदर्शक गुरु है. श्री हजूर साहिब की पावन धरती पर उनका अस्तित्व विराट आभा प्रसारित कर रहा है. गुरु ग्रंथसाहिब जी के अलौकिक ज्ञान और मार्गदर्शन से हजुर साहिब में सदैव दिव्यता का परम अहसास मिलता आया है. आज तीन सौ बारह वर्षों बाद हम वैज्ञानिक आधार पर भी गुरुबाणी की सार्थकता को महसूस करवा सकते हैं. यदि हजूर साहब से श्री गुरु ग्रंथसाहिब जी की विचारधारा का प्रचार और प्रसार प्रमाणिकता से किया जाएं तो सिख धर्म को सर्वधर्मीय हृदय में सम्मान का स्थान प्राप्त होगा. श्री गुरु ग्रंथसाहिबजी की विचारधारा हमारे पंथ के संकुचन में ठहर गईं हैं. इस विचारधारा को प्रसारित करने के लिए हजूर साहब की धरती से ही सक्षम मंच की स्थापना होनी चाहीए. राजनीतिक मनोवृत्ति के चलते धर्म की विचारधारा को अधोगति की ओर छोड़ देना किसी भी धर्म की सबसे बड़ी हानि होती है. यदि श्री गुरु ग्रंथसाहिब की विचारधारा वैश्विक नहीं होती तो शायद मैं राजनीतिक अपप्रवृत्ति को छेड़ने का कदापि अट्ठहास न करता. लेकिन सत्य यहीं है कि 64 वर्ष पुरानी हमारी धार्मिक संस्था में धर्मप्रचार कार्यों को लेकर गहरी उदासीनता छाई हुईं हैं. 

सिख धर्म का प्रचार प्रसार सिख पंथ के अंतर्गत ही हैं. यह प्रचार प्रसार और समागम भी केवल अंतर्गत सौजन्य परोसने का माध्यम हैं. यहीं तक सीमित रहने का यह प्रपंच हैं. श्री गुरु नानकदेव जी की आध्यात्मिक विचारधारा आज खुलकर उन उदासियों का भी वास्ता देने से कतरा रहीं हैं जो सिख पंथ के भीतर नहीं अपितु संपूर्ण एशिया खंड को सिक्खी का उजला आशावाद दिखाकर लौटी थीं. सिख गुरुओं, संतों, महापुरुषों और प्रामाणिक सिखों की भक्ति, अध्यात्म, सीख, मार्गदर्शन शांत सफहों में समाधिस्थ हैं. साल में एक बार, कुछ धार्मिक विचार जागृत कर बाद में वर्ष भर का अवसाद अपनाना कोई नियति नहीं हो सकती. सभी को श्री गुरु ग्रंथसाहिब जी गुरुतागद्दी दिवस की कोटि कोटि शुभकामनायें और बधाई. 

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रविवार, 15 नवंबर 2020

क्या भला किया हैं सिखों का एसजीपीसी ने ? 

 शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सौ साल

रविंदरसिंघ मोदी 


सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था होने का सम्मान शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (अमृतसर) संस्था के नाम हैं. किसी धार्मिक संस्था का एक सौ वर्ष पूर्ण करना अपने आप में एक सुनहरा इतिहास होता है. इतिहास में यह यात्रा मील का एक पत्थर मानी जानी चाहिए. सन 1920 में 15 नवंबर का दिन संस्था का स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाता है. लेकिन वर्ष 1925 में सेंट्रल गुरुद्वारा एक्ट का पंजाब सरकार द्वारा गैज़ेट जारी किया गया. उस समय पंजाब सरकार के गवर्नर के रूप में मालकम हैले थे जिन्होंने इस संस्था के कानून बनाने में अच्छी भूमिका अदा की थीं. उन्होंने उस कार्य के लिए सिखों की पांच सदस्यीय समिति का गठन भी किया था. सन 1920 से सन 1926 तक संस्था के कानून संशोधन होते रहें और संस्था को सिखों के नेतृत्व अधिकार बढ़ाने की दृष्टि से समय समय पर प्रावधान होते रहें. बड़ी बड़ी हस्तियों ने इस संस्था से अपनी राजनीति की यात्रा शुरू की थीं यह भी एक अलग इतिहास हैं. 

खैर, इस वर्ष (2020) शातकपूर्ति होने से एसजीपीसी संस्था का उत्साह वैसे सिर चढ़कर बोल रहा है. संस्था के पहले प्रधान भाई स्व. सुन्दरसिंघ मंजिठिया से लेकर अभी तक जितने प्रधान संस्था पर सेवारत रहें सभी को संस्था की प्रगति और उतार - चढ़ाव का श्रेय पहुँचता हैं. यह संस्था एक युग, एक इतिहास की साक्षी रहीं हैं. 

सिख पंथ की सर्वोच्च धार्मिक संस्था के एक सौ वर्ष पूर्ण होना वैसे एक नये आशावाद को जन्म देना है. ऐसे समय यह प्रश्न उठना स्वाभाविक भी है कि, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति से देश अथवा विश्व के सिखों से क्या अपेक्षाएं रखनी चाहिए? आखिर क्या भला किया हैं एसजीपीसी ने सिखों का? इस प्रश्न का उत्तर एसजीपीसी निष्पक्षता से दें नहीं पायेगी. सच्चाई यह हैं कि, पिछले सौ वर्षों में सिखों ने बहुत कुछ खोया हैं. पिछले सौ वर्षों में संस्था के कई अंग अलग हुए हैं. एक सौ पिचहत्तर (175) सदस्योंवाली इस संस्था का दायरा तंग और तंग होता चला गया. सिखों के बलिदान के इतिहास बनें. पाकिस्तान अलग हुआ. हमारे गुरुओं के सभी ऐतिहासिक स्थान अलग हो गए. पंजाब राज्य भी छोटा और छोटा होता चला गया. एसजीपीसी धीरे धीरे ऐतिहासिक स्थान और गुरूद्वारे खोतीं रहीं. दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी अख्तियार में नहीं रहीं. सिक्खी का पतन पंजाब में ज्यादा होता रहा, एसजीपीसी रोक नहीं पायी. 


(स्व. मास्टर तारा सिंघजी)

जिसके कारण भी आज देश में सिखों की जनसंख्या बहुत कम हैं. पिछले सौ वर्षों में अंदाजा दस से पंद्रह लाख सिखों की हत्याएं हुईं. देश विभाजन में सर्वाधिक कत्तल सिखों के हुए. सन 1984 के सिख नरसंहार तक सिखों का दमन होता ही रहा. एसजीपीसी ने क्या भूमिका अदा की हर सिख को सोचना चाहिए. केवल चढ़ावा जमा करना और पंजाब की राजनीतिक पार्टियों की हौसलाअफजाई करना संस्था का छुपा एजैंडा बन कर रह गया. स्व. मास्टर तारासिंघजी इस संस्था के लगभग अठारह (18) वर्ष प्रधान थे, जो कि सिखों के सबसे विद्यवान नेता माने जाते थे. जत्थेदार स्व. गुरचरनसिंघजी तोहरा अंदाजा सताइस (27) प्रधान के रूप में कार्यरत थे. अभी हाल में स्व. सरदार अवतारसिंघ मक्कड़ ग्यारह (11) वर्ष प्रधान की कुर्सियों पर कार्यरत थे. 

(जत्थेदार स्व. गुरचरनसिंघजी तोहरा)

विगत तीन वर्षों से भाई गोबिंदसिंघजी लोंगोवाल एसजीपीसी के प्रधान हैं. लोंगोवाल के कार्यकाल में सिखों का क्या भला हो रहा हैं सही मायने में यह एक खुली बहस का विषय है. इस संस्था के दायरे से श्री गुरु ग्रंथसाहिब जी के पावन 328 स्वरुप गायब हो जाने की घटना क्या एसजीपीसी का गौरव बढ़ाने वाली घटना हैं?  

(स्व. अवतारसिंघजी मक्कड़)

एससजीपीसी संस्था का वार्षिक आर्थिक बजट बारह सौ पांच करोड़ (1205 caror) हैं जो इस वर्ष कोविड त्रासदी के कारण 18.5% प्रतिशत कम होकर 981 करोड़ अपेक्षित किया गया हैं. एसजीपीसी सिखों की शिक्षा के नाम पर 120 से 125 करोड़ का वार्षिक आर्थिक प्रावधान करती हैं. आज देशस्तर पर कौनसी शिक्षा संस्था जानी जाती हैं?  उन संस्थाओं पर कौन पदाधिकारी हैं और उनके क्या चरित्र हैं? चर्चा है कि, शराब के प्रमोटर और बार चलाने वाले भी ऐसी संस्था के हस्तक बनें हुए हैं ! 

एसजीपीसी संस्था द्वारा लगभग 60 करोड़ का प्रावधान धर्मप्रचार पर किया जाता हैं. एक तो यह राशि धर्मप्रचार के लिए कम हैं. दूसरा यह कि संस्था ऐसा क्या धर्मप्रचार कर रहीं हैं कि पंजाब से सिख, सिक्खी से दूर भागते नजर आ रहें हैं ! धर्म सिद्धांतों को ख़ारिज कर सिख नशों की लत में मरें जा रहें हैं ! आपके धर्मप्रचार के बावजूद भी पंजाब के शिक्षा में सिक्खी इतिहास के पृष्ठ कम और कम होते चलें जा रहें हैं ! धर्म को लेकर कितनी शताब्दियां मनाईं गईं, क्या "आउटपुट" सामने आया हैं. क्यों सिखों की जनसंख्या आज कम है? काम में कितनी ईमानदारी थीं खुलासा कीजिए. पिछले सौ सालों में धर्म प्रचार पर कितनी राशि खर्च हुईं? जवाब तो एक हजार करोड़ से ऊपर का हो सकता है ! क्या हासिल हुआ?  क्या भला हुआ?  एक नहीं, दो नहीं बल्कि दस सिख गुरुओं के अमर इतिहास से सींची हुईं पंजाब की धरती पर पिछले सौ वर्षों में सिक्खी इतिहास की अमर यात्रा कैसे रहीं. इस शातकपूर्ति पर बहुत से सवालों का उठना और उठाया जाना भी स्वाभाविक हैं. 

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शनिवार, 14 नवंबर 2020

 सोमवार को खुल जायेंगे सभी धार्मिक स्थल 

मुख्यमंत्री ने कहा "त्रासदी से बचना स्वयं की जिम्मेदारी"

महाराष्ट्र में आगामी सोमवार (ता. 16-11-20) से सभी धार्मिक स्थल शुरू हो जायेंगे. मुख्यमंत्री श्री उद्धव ठाकरे ने आज यह घोषणा करते हुए सतर्क भी किया कि, किसी भी संक्रमण या त्रासदी से बचने के लिए लोगों को स्वयं सावधानी बरतनी होंगी. उल्लेखनीय हैं कि गत ता. 23 मार्च 20 से महाराष्ट्र में लॉकडाउन लागु किया गया था. जिसके बाद धार्मिक स्थलों को भी बंद रखने के आदेश जारी हुए थे. आठ से नौ माह बाद अब धार्मिक स्थल पूर्णरूप से खोले जायेंगे. मुख्यमंत्री ने साथ ही आगाह भी किया कि, धार्मिक स्थलों में मास्क का उपयोग अनिवार्य रूप से किया जाए. 

(मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने निर्धार किया था)

इस समाचार के बाद महाराष्ट्र की जनता में उत्साह का वातावरण बन गया हैं. सोमवार को पाड़वा मनाया जा रहा हैं. इस शुभ मुहूर्त पर धार्मिक स्थल खोले जा रहें हैं. एक ओर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की घोषणा का दीपावली पर्व पर स्वागत हो रहा हैं. दूसरी ओर विपक्ष ka कहना है कि मंदिर खोलने के विषय में बहुत देरी की गईं हैं. सभी त्यौहार समाप्त होने के बाद मंदिर शुरू हो रहें हैं. सरकार पक्ष का कहना हैं कि कोरोना जैसी महामारी की रोकथाम और जनता की सुरक्षा सरकार के लिए सर्वपरि थीं. सरकार ने अपना फ़र्ज अदा किया हैं. 






 खुशियों का प्रदीपन

निराशा के अंधकार का नाश हो !

रविंदरसिंह मोदी 

शुभ दीपावली पर्व 

भारतीय संस्कृति में दीपावली को प्रकाशपर्व के रूप में मनाया जाता हैं. अमावस्या की रात की कालिमा को हर्ष और उत्साह के प्रकाश से हराने की हमारी परंपरा रहीं हैं. दीपावली (दिवाली) के समय लक्ष्मी माताजी का पूजन होता हैं. श्रम घटकों की पूजा अर्चना होती हैं. परिवार के सामूहिक खुशियों का यह पर्व माना जाता हैं. 

दीपावली का ऐतिहासिक और धार्मिक पक्ष भी है कि इस दिन प्रभु रामचंद्र जी रावण जैसी दुष्प्रवृत्ति पर मात कर अपने घर अयोध्या लौट आये थे. उनके स्वागत में संपूर्ण अयोध्या नगरी में प्रदीपन हुआ था. घर - घर में दीए प्रज्जवलित किये गए थे. अयोध्या नगरी का वो भव्य प्राकृतिक प्रकाशपुंज देवता भी गगन मार्ग से देखकर प्रसन्नचित हो रहें थे. लोग एक दूसरे को मिलकर खुशियाँ बाँट रहें थे. इस कारण दीपावली पर्व को प्रकाशपर्व की स्मृति मानकर भी प्रोत्साहित किया गया. यह एक परम्परागत पर्व बन गया. आज भी त्यौहार की सार्थकता बनीं हुईं हैं. 

भारत देश में इस वर्ष कोरोना संक्रमण की विभीषिका के चलते करोड़ों लोगों के जीवन प्रभावित हुए हैं. लाखों लोगों ने जीवन और मौत से संघर्ष किया हैं. इस दौर में त्योहारों को लेकर कहीं न कहीं निराशा का दौर भी व्याप्त हो रहा हैं. यदि भारतीय जनमानस चाहे तो निराशाग्रस्त लोगों को निराशा और हताशा के दायरे से बाहर निकाला जाना कठिन नहीं हैं. यह दीपावली अपने स्वयं के लिए और औरों के जीवन में प्रकाश का प्रदीपन करने का एक स्फूर्त अवसर हैं. यह समय विपरीत परिस्थितियों से सामना करने का अवसर हैं. इसलिये जीवन में केवल दीपावली के लिए ही नहीं वरन निराशा के अंधकार के छंटने तक खुशियों के प्रदीपन की आवश्यकता हैं.

इस अवसर पर कला गुणों का विकास हो ऐसी भी भावनाएं व्यक्त करता हूँ. साथ साथ साहित्य और लेखन कार्य समृद्धि से लबालब हो. कर्म और निष्ठां की संपदा सौगुणित हो यह भी मंगल कामनायें करता हूँ. यह प्रदीपन जीवन पथ पर विकास की विस्तीर्णता को अग्रसर करें और देश था हमारा प्रांत शांति और सद्भावना को आत्मसात करें यह प्रार्थना करता हूँ. 

आप सभी को दीपावली पर्व, दिवाली, दिवाली हल्ला महल्ला, दाता बंदीछोड़ दिवस, सिमरन दिवस की हार्दिक शुभकामनायें और बधाई. 






शुक्रवार, 13 नवंबर 2020

 हजूरसाहब में तखत स्नान पर्व मनाया

श्रद्धा और सेवा का संगम !

नांदेड़ ता. 13 नवंबर 

यहाँ के तखत सचखंड श्री हजुरसाहब गुरुद्वारा में पारंपरिक पर्व तखत स्नान भक्ति और श्रद्धा के वातावरण में मनाया गया. शुक्रवार ता. 13 नवंबर को तिथि अनुसार यह धार्मिक पर्व मनाया गया जो दीपावली से एक दिन पूर्व मनाने की पुरानी प्रथा विद्यमान है. सुबह  9.30 बजे तखत सचखंड श्री हजुरसाहब के पंजप्यारे साहिबान की प्रमुख उपस्थिति में पारंपरिक तखतस्नान की अरदास की गईं. उपरांत तखत साहब के घागरिया भाई कुलप्रकाशसिंघ चिरागिया को चांदी की गागर (घागर) देकर गोदावरी नदी से पानी भर लाने के लिए भेजा. उनके साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालुनगण भी गोदावरी के नागिनाघाट पहुंचे. 

गोदावरी नदी से पहली गागर भरने के उपरांत गागर आरती की गईं. इस समय संतबाबा बलविंदरसिंघजी कारसेवा वाले की प्रमुख उपस्थिति थीं. यहाँ से अरदास उपरांत पहली गागर तखत साहब की ओर रवाना की गई. गोदावरी के जल से तखत सचखंड श्री हजूर साहब के अंगीठा साहब के स्नान करवाएं गए. उसी तरह से पुराने और ऐतिहासिक शस्त्रों की सफाई कर उन्हें धार दीं गईं. 

घागरिया सिंघ के साथ श्रद्धालुओं ने गोदावरी नदी के तीन चक्कर कर जल लाया. साथ - साथ गुरुद्वारा परिसर स्थित दो कुओं से भी पानी लाया गया.  इस सेवा में छोटे बच्चों से लेकर वृद्ध बुजूर्गों ने भी हिस्सा लिया. जत्थेदार संतबाबा कुलवंतसिंघजी, सहायक जत्थेदार संतबाबा रामसिंघजी और पंजप्यारे साहिबान के मार्गदर्शन में तखत स्नान की विविध सेवाएं शाम तक जारी थीं. 

तखत स्नान के मौके पर लंगर प्रसाद कार्यक्रम भी संपन्न हुआ. इस समय पूर्व महापौर स. बलवंतसिंघ गाडीवाले, महानगर पालिका सभागृह नेता वीरेंद्रसिंघ गाडीवाले, गुरुद्वारा बोर्ड के सचिव रवींद्रसिंघ बुंगाई, गुरुचरणसिंघ घड़ीसाज, सुरिंदरसिंघ मेंबर, रणजीतसिंघ कामठेकर, गुरमीतसिंघ महाजन, देवेंद्रसिंघ विष्णुपुरीकर, रवींदरसिंघ मोदी, सुखविंदरसिंघ हुंदल, रणजीतसिंघ चिरागिया, मनप्रीतसिंघ कुँजीवाले, भागिन्दरसिंघ घड़ीसाज, सुरजीतसिंघ खालसा, देवेंद्रसिंघ मोटरावाले, अवतारसिंघ पहरेदार, नारायणसिंघ नंबरदार, हरजीतसिंघ कडेवाले, रविंदरसिंघ कपूर, रचपालसिंघ दुकानदार, कुलप्रकाशसिंघ लिखारी, जसपालसिंघ सिद्दू, बीरेंद्रसिंघ बेदी सह बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे.








सोमवार, 9 नवंबर 2020

भाटिया कमेटी का अनाकोंडा !!

रविंदरसिंघ मोदी 


यहां लोग बहुत जल्द किसी के भी बहकावे में आ जाते हैं. यदि चार - पांच लोग किसी रस्सी को निरंतर सांप बताते रहे तो अन्य लोग भी सांप ! सांप ! सांप !!! दोहराने लगते हैं. सांप निकल जाने के बाद लकीर पिटवाने वालों का हर समाज में एक हाहाकारी धड़ा होता हैं. हमारे पास बगैर सांप देखें ही तांडव मचाने वाले कुछ तत्व सक्रिय रहते हैं. परदे के पीछे के खिलाड़ी हैं, वो छुपकर बीन बजाते हैं. 

अब "भाटिया समिति" से निकला एक केचुआ पता नहीं कब कैसे बीन बाजक शक्तियों के लिए सांप बन गया? सुना हैं कि यह सांप अब 'उनके' सपनों में 'एनाकोंडा' के अवतार में उभर रहा हैं. अब एनाकोंडा तो मन्त्र जाप से भागेगा नहीं ! डिस्कवरी चैनेल के सपेरे भी इस एनाकोंडा को पकड़ नहीं पाएंगे. फिर क्या कीजियेगा ?  फिर ! हजुरसाहिब की लाठियों में बहुत दम हैं ना ! यहां की लाठियां कारगर हैं. 'बाहरी तत्व' काम पड़ने पर अक्सर यहां की लाठियों को सहलाने लगते हैं. जाहीर हैं, बाहरी ताकतों को लकीर पिटवाना नहीं है. अबके उन्हें इस अचानक उभरे, अकल्पित  एनाकोंडा को ठिकाने लगाना हैं. 

(भाटिया समिति रिपोर्ट )

हजूर साहब में एनाकोंडा को लेकर जुगाड़ जारी हैं. राजनीतिक हस्तियां गहराई में विचारतंद्रा मग्न हैं. अनाकोंडा के मुकाबले के लिए गुरुद्वारा बोर्ड कानून की धाराएं खंगालना जारी हैं. अभी यह बेचारा  'एनाकोंडा' रिपोर्ट का आवरण ओढ़कर निद्रा में हैं. लेकिन उसके जागने के डर से आशंकित शक्तियां अब मांग बढ़ा रहीं हैं कि, सरकार, अपने विशेष सपेरों से उस सोये हुए अनाकोंडा को जागने से पहले ही दबोचकर 'सरकारी पिटारे' में बंद करवा दें. सरकार! जब इस अनाकोंडा (रिपोर्ट) को किसी सरकारी पिटारे में बंद कर देगी, तब हजूरी लाठियां भी निरुपयोगी हो जायेगी ! बंद पिटारे पर सिंहासन जमाकर यह लाठियां दरबार में सजाई जाएंगी. यह लाठियां किस पर बरसेगी? जाहीर हैं, अपनों पर ही बरसेंगी ! शोशल मीडिया के महारथी शोशल मीडिया पर ही हुनर दिखाते रह जायेंगे. 90 प्रतिशत लोगों के मौन की दुहाई देंगे. 

इसलिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश सरदार जगमोहनसिंघ भाटिया कमेटी की रिपोर्ट में दर्ज सिफारिशों की भी समीक्षा का सही समय आ गया है. यह समीक्षा होनी ही चाहिए. उनके सुझावों की अनुकूल एवं अच्छी सिफारिशों पर विचार करने में क्या हर्ज है? जो बातें हजूर साहब के विरोध में हो उसे हमारे द्वारा ठुकरा दीं जाएं. गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड को चाहिए कि भाटिया समिति की रिपोर्ट तुरंत सार्वजनिक कर दें.  गुरुद्वारा बोर्ड के स्वच्छ संचालन के लिए प्रस्तुत हो रहीं कमियों को दूर करना ही होगा. बरसों से गुरुद्वारा बोर्ड संचालन में कुछ बातें बाधाएं बनकर खड़ी हैं. उनका निराकरण करना आज के समय की अनिवार्यता हो गई हैं. अब "अनाकोंडा" की वास्तविकता उन लोगों को भी पता चलनी चाहिए जो गुरुद्वारा बोर्ड प्रतिनिधि चयन में "मतदान" करते हैं. 

पंजाब और मुंबई के राजनीतिक तत्व इस अंदेखिएं एनाकॉन्डा से बुरी तरह बिफर गये हैं ! या हजूर साहब के लोगों का ध्यान बाँटने के लिए बीन बजवाई जा रहीं है? यह वास्तविकता है कि हजुरसाहब के लोगों को एकता की दुहाई देकर एनाकोंडा से भिड़ाया जा रहा हैं. बगैर वास्तविकता जानें अथवा कुछ अंतर्गत गुप्त समझौतों के कारण संभवतः आज भाटिया समिति का खुलकर विरोध जताया जा रहा हो लेकिन बीते पांच साल इस विषय पर समीक्षा के लिए कोई राजी नहीं हुआ यह भी एक विडंबना है. अब विरोध का कारण भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए. 

(आपको क्या लगता हैं..? यह लेख कैसा लगा, नीचे massage box में दर्ज करवाएं.)


शनिवार, 7 नवंबर 2020

 श्री गुरु ग्रंथसाहिब जी के स्वरुप गायब होने का मामला 

पश्च्याताप समारोह के मायने!

एसजीपीसी निशाने पर 

रविंदरसिंघ मोदी 

शिरोमणि अकाली दल डेमोक्रेटिक द्वारा ता. 08-11-2020 को पश्च्यापात समागम मनाया जा रहा है. पूर्व सांसद सरदार सुखदेवसिंह ढींढसा के नेतृत्व में यह कार्यक्रम अमृतसर नगरी में आयोजित हो रहा. पिछले दिनों शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी अमृतसर की टॉस्क फोर्स और श्री गुरु ग्रंथसाहिब जी के 328 लापता स्वरूपों का हिसाब मांगने धरने पर बैठें जत्थेबंदियां, निहंगसिंघ और सिखों के बीच हुईं हिंसक झड़प के बाद यह कदम उठाया जा रहा हैं. गुरुद्वारा श्री अटारी साहिब (पातशाही 6 वीं ) स्थान पर यह समागम सम्पन्न करवाया जाना है. भाई मोहकमसिंघजी और भाई मनजीतसिंघजी भोसा और अन्य हस्तियां आयोजन में सहायक की भूमिका में हैं. 


स्पष्ट है कि यह कार्यक्रम सांकेतिक है. इसलिए पंजाब सरकार भी इस आयोजन में दिक्कतें पैदा नहीं करेंगी. लेकिन यह कार्यक्रम शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान भाई गोबिंदसिंह लोंगोवाल की धार्मिक सत्ता के लिए चुनौति प्रस्तुत कर सकता है, इसलिए कार्यक्रम को लेकर पंजाब की साधसंगत में खासी उत्सुकता दिखाई दें रहीं हैं. "पश्च्याताप" के मायने क्या हैं इस विषय को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में बहस छिड़ीं हुईं हैं. पंजाब के वर्तमान हालात को देखते हुए और आगामी विधानसभा चुनावों की सुगबुगाहट देखते हुए श्री गुरु ग्रंथसाहिब जी की बेअदबी और श्री गुरु ग्रंथसाहिब जी के 328 स्वरूपों के लापता होने का विषय प्रमुख रूप से राजनीतिक पार्टियों का एजैंडा रहेगा इसमें कोई शक नहीं हैं. 


पंजाब में शिरोमणि अकाली दल (बादल) और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की लोकप्रियता में निरंतर कमी नापी जा रहीं हैं. शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी कार्यप्रणाली में "सत्ता" का उन्माद सर्वोपरि देखा गया हैं. सिखों के पांचों तखतों पर और दिल्ली गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी पर साम्राज्य स्थापित करने का अहम भी साधसंगत की नाराजगी की मुख्य वजह दिखाई दें रहीं हैं. साधसंगत से यह भी आरोप लग रहें है कि भाई गोबिंदसिंह लोंगोवाल "बादल" पार्टी के आगे नतमस्तक हैं. जिसके कारण ही गत दिनों अमृतसर में धरना दें रहीं जत्थेबंदियां और साधसंगत पर लाठियां बरसाईं गई थीं. 

जाहीर है पश्च्याताप समागम में उन बातों का हिसाब तो पूछा ही जायेगा. गौरतलब है कि, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी प्रशासन के अंतर्गत श्री गुरु ग्रंथसाहब जी के दुर्लभ 328 बीड साहब के गायब (चोरी) होने का मामला सुर्खियों में आया था. उक्त प्रकरण में सिख जत्थेबंदियों द्वारा एसजीपीसी से सवाल पूछने के लिए सिख जत्थेबंदियां धरना धरे बैठीं थीं. ता. 15-10-2020 के दिन एसजीपीसी कार्यालय के बाहर तैनात टॉस्क फोर्स द्वारा धरना दें रहें लोगों पर हमला बोला गया. सिखों की दस्तारों को गिराया गया जिसमें पंथ की बदनामी का चित्र देश ने मीडिया के माध्यम से देखा. जत्थेबंदियों द्वारा आरोप लगाया गया हैं कि, एसजीपीसी के प्रधान भाई गोबिंदसिंघ लोंगोवाल ने राजनीतिक नेताओं के संकेतों के तहत ही धरना दें रहें लोगों पर हमला करवाया. पत्रकारों के साथ  हाथापाई की घटना को भी अंजाम दिया गया.इन घटनाओं के कारण  एसजीपीसी के खिलाफ रोष व्यक्त हो रहा हैं. 

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गुरुवार, 5 नवंबर 2020

Social and political Serve 

सामाजिक और राजनीतिक सर्वेक्षण 


हजुरसाहिब की वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक हालातों का जायजा लेने हेतु Vision media & publicize services द्वारा एक छोटा सा सर्वे आयोजित किया गया हैं. अठारह वर्ष पूर्ण कोई भी हजूर साहब निवासी सिख व्यक्ति महिला अथवा पुरुष हिस्सा लें सकता हैं. जिसमें आपको चार सवालों के जवाब भेजनें हैं.  

प्रश्न A -  हजूर साहब के सिख समाज में वरिष्ठ, सक्षम और अनुभवी नेता (महिला अथवा पुरुष) आप किसे मानते है ?  

प्रश्न B - राजनीति में सबसे सक्रिय युवा नेता (पुरुष) कौन है ? 

प्रश्न C -  समाज सेवा में कौन व्यक्ति सबसे सक्रिय कार्य कर रहा अथवा कर रहीं हैं ? 

प्रश्न D - विधान परिषद में किस सिख नेता (पुरुष अथवा महिला) को भेजा जाना चाहिए? 

उत्तर में आपको नीचे massage box में ऑप्शन a, b, c, d.

A - लिखकर पसंदीदा नाम लिखना हैं 

B - लिखकर पसंदीदा नाम लिखना हैं 

C - लिखकर पसंदीदा नाम लिखना हैं 

D - लिखकर पसंदीदा नाम लिखना है. 

ऑप्शन के उत्तर आप hajursahib.blogspot.com पर massage box में अपने नाम और मोबइल नंबर के साथ भेज दें. अथवा व्हाट्सअप नंबर 9420654574 पर भी ऑप्शन + answer भेज सकते हैं. आपका नाम गुप्त प्रणाली में रहेगा. अंतिम तारीख 12-11-2020.


https://youtu.be/mjHpPpaMwMo



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मंगलवार, 3 नवंबर 2020

रविंदरसिंघ मोदी खत्म हो गया ?

 रविंदरसिंघ मोदी ख़तम हो गया?

आलोचना तो होनी ही चाहिए !


ख़बर बड़ी रोचक है! मैं भी अवसाद का आलम त्यागकर खुश हुए बगैर नहीं रह पाया. लोगों में बड़ी शिद्दत के साथ यह ख़बर फैलाई जा रहीं है कि पत्रकार रविंदरसिंघ मोदी का सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव ख़तम हो गया हैं. सिख समाज में अब उसका कोई अस्तित्व नहीं रहा इस आशय की बातें पूरी ईमानदारी से फैलाई जा रहीं है. अपने अस्तित्व की मौत की बात सुनकर मैं सही मायने में खुश हुआ. यह ख़बर तो किसी अख़बार के किसी कोने का हिस्सा होनी चाहिए ताकि लोग संवेदना तो जता सकें. खैर! कौन किस मंशा से, किस अपेक्षा से ऐसी चर्चाओं को प्रोत्साहन दें रहा हैं मुझे सही मायने में कोई ख़बर नहीं हैं. शायद मेरा अलिप्त रहना भी कुछ लोगों को नागवार गुजर रहा हो?  

पिछले एक वर्ष से लगातार सिख समाज में संचालित बहुत से व्हाट्सअप ग्रुप में कुछ प्रभावी राजनीतिक तत्व और कुछ गैर सिख राजनीतिक प्रोत्साहित संघठन मेरी आलोचना करने और बदनाम करवाने का उद्योग प्रामाणिकता से कर रहें थे. मुझे, हमारे किसी भी आलोचक सिख भाई को जवाब देना नहीं था, क्योंकि मेरे और समाज के संबंध राजनीतिक समीकरणों पर आधारित नहीं थे. सभी की आलोचना मैंने विनम्रतापूर्वक स्वीकार की है और आज भी कर रहा हूँ. अगस्त 2020 के बाद मैंने गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड द्वारा स्थापित मीडिया एडवाइज़र पद से अपना त्यागपत्र सौंप दिया क्योंकि मैंने एक वर्ष के लिए ही यह पद केवल और केवल धर्मप्रचार के प्रोत्साहन के लिए स्वीकार किया था. एक वर्ष पूर्ण हुआ. मैं फिर से अपने पुराने पेशे 'पत्रकारिता' में शामिल हो गया. अब इस बात की भी नाराजी समाज को और विशेष कर राजनीति में सक्रिय कुछ नेताओं को क्यों होनी चाहिए?  

हमने क्या कभी किसी का राजनीतिक अस्तित्व ख़तम किया हैं ? Qक्या राजनीति में किसी की आलोचना कर चुनावी टिकट कटवाएं हैं?  मुझे पता नहीं कि सिख समाज के कितने व्हाट्सप्प ग्रुप्स में मेरे बारे में असभ्य बातें कही गई और कही जा रहीं हैं. कौन कर रहा हैं यह भी नहीं जनता. कौन करवा रहा हैं यह भी नहीं जानता. मैं जिस ग्रुप में नहीं हूँ वहाँ ये कृत्य किये जा रहे हैं. संदेह हैं कि बहुत से तत्व व्यावसायिक तौर पर भी आलोचना उद्योग में जुटे हुए होंगे. लेकिन मैं किसी भी सिख भाई की आलोचना का अनादर नहीं करूँगा. मैं आपकी आलोचनाओं में भी अपने स्वयं की गलतियां खोज रहा हूँ. अपनी कमजोरी, गलती, सफलता - असफलता के विषय में आलोचना बहुत मायने रखती हैं. इसलिए सिख समाज के युवा वर्ग को मैं धन्यवाद देता हूँ. लेकिन उन तत्वों से मेरी नाराजगी जरूर रहेगी जो अपनी पहचान छुपाकर मुझ पर शब्दास्त्र चला रहे हैं और करवा रहे हैं. साथ ही कुछ लोग, कुछ गैर सिख संघटनों को खुश करने के लिए भी मेरी आलोचना में विश्वास कर रहें हैं. उन्हें भी दिल से प्रणाम, आप खुश रहिएगा. 

मेरी असमय मौत की ख़बर मुझे स्वीकार हैं. क्योंकि मैं किसी व्यक्ति विशेष, राजैनितक दल, जिले के लोकल लीडर को प्रभावित करने के लिए काम नहीं कर रहा हूँ. मेरे रहने या नहीं रहने से इस समाज को कोई खासा फर्क नहीं पड़ेगा. मेरा स्वयं का हठी धर्म है जो मैं सिख समाज के सामाजिक मुद्दों को लेकर काम करता आया हूँ. यह हठी धर्म मेरी व्यक्तिगत आवधारणा पर आधारित है. कुछ आलोचक अनावश्यक रूप से मेरे नाम का समावेश बुद्धिजीवि के रूप में कर रहे हैं, सच मानियेगा मैं भी उनकी तरह ही इस संभ्रम का बोझ उठा रहा हूँ. सच्चे बुद्धिजीवि तो वो हैं जो मेरे अस्तित्व की मौत का चुपचाप जश्न मना रहें हैं. पर मुझे मेरे अस्तित्व की मौत स्वीकार है. इस मौत के लिए तीन - तीन राजनीतिक दल और एक गैर सिख संघठन को एक साल परिश्रम करना पड़ा. मुंबई से इशारे मिलते रहे, पंजाब से संकेत मिलते रहें और मुझ पर छींटाकशी होती रहीं. सुना है अब कुछ लोग भी इस आलोचना उद्योग से निवर्त्त होना चाह रहें है. कब तक मोहरे बनें रहना चाहेंगे. अंततः मैं यहीं प्रार्थना करूँगा कि यदि मेरे अस्तित्व पतन से समाज का भला होता होगा तो सौ बार मेरा अस्तित्व समाप्त कीजिए. राजनीतिक शक्तियों को उबरने के लिए सामाजिक कार्यकर्ताओं का पतन होना ही चाहिए. 


रविंदर सिंघ मोदी एक सीधा, साधा और मामूली व्यक्ति है. ऐसे वजूद का पतन और खात्मा होना ही चाहिए. मैं, ऐसी चर्चा, ऐसी खबरों से नाराज नहीं हूँ. शहर के हर चौराहा, हर नुक्कड़, हर गली और घर - घर मेरी आलोचना होनी चाहिए. आपके आरोप, आपकी घृणा, आपका तिरस्कार, आपकी अवहेलना स्वीकार हैं. मुझे आज भी लग रहा है कि मैंने समाज के लिए कुछ नहीं किया! मैंने कभी कोई योगदान नहीं दिया हैं! मुझे मेरा अस्तित्व पतन स्वीकार है, सौ बार स्वीकार हैं. धन्यवाद.

(आपको ब्लॉग कैसा लगा जरूर बताइयेगा)



 महत्वपूर्ण समाचार - 3 नवंबर 

जिस पर एक नज़र डाली जाए. 

अजीत समाचार 👇

🖕🖕 सिख पंथ के चतुर्थ गुरु श्री रामदास जी का प्रकाशपर्व श्रद्धा के वातावरण में मनाया गया. श्री हरिमंदिर साहब में श्रद्धालओं ने दर्शन किये और दिनभर शबद कीर्तन, कथा और परिक्रमा जैसे कार्यक्रम संपन्न हुए. गुरु रामदास जी ने अमृतसर सरोवर का निर्माण करवाया था. उस सरोवर में श्री हरिमंदिर साहब दरबार साहब का निर्माण पंचम गुरु श्री अर्जुन देव जी ने करवाया, जो आज सिक्खी का बड़ा केंद्र है. 


पंजाब केसरी 👇



ता. 02-11-2020
👇पंजाब केसरी 👇
.........समाप्त.......




रविवार, 1 नवंबर 2020

 पंजाब में समयावधि से पूर्व होंगे चुनाव?

रविंदरसिंह मोदी 

( मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह )

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदरसिंह इस बात पर गहन विचार - विमर्श कर रहे हैं कि पंजाब विधानसभा के चुनाव समयावधि से पूर्व यानी वर्ष 2021 की शुरुआत में ही करवाए जाए. उन्होंने महामहिम राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद से मुलाक़ात का कार्यक्रम भी नियित किया है पंजाब में चुनाव करवाने की पेशकश की जाए. लेकिन इस कार्यक्रम में आम आदमी पार्टी के विधायक शामिल नहीं होना चाह रहे हैं. पंजाब विधानसभा में आम आदमी पार्टी के बीस विधायक हैं. यदि वें कांग्रेस के चुनाव प्रस्ताव पर साथ आते हैं तो महामहिम राष्ट्रपति चुनाव आयोग के पास वो प्रस्ताव प्रेषित कर सकते है.

(धरना दें रहे पंजाब के किसान)

पंजाब विधानसभा में कुल 117 सीटों में कांग्रेस पार्टी के 77 विधायक हैं. आम आदमी पार्टी का समर्थन प्राप्त होने पर यह संख्या 97 हो जायेगी. उधर शिरोमणि अकाली दल बादल के पास कुल 15 विधायक हैं और उसकी सहकारी भाजपा के केवल 3 विधायक हैं. कुलमिलाकर कांग्रेस का पलड़ा भारी हैं. पंजाब विधानसभा में कांग्रेस सरकार के पास स्पष्ट बहुमत उपलब्ध हैं. ऐसे में निर्धारित पंचवार्षिक पूर्ण करने के बजाए मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह पंजाब की जनता के सिर चुनाव क्यों लादना चाह रहे हैं? 


इस तरह की सोच के पीछे मुख्य कारण हैं कि, वर्तमान समय में पंजाब के किसान केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में आंदोलन संचालित कर रहे हैं. किसानों की नाराजगी भांपते हुए शिरोमणि अकाली दल की नेता श्रीमती हरसिमरत कौर बादल ने आनन - फानन में अपने केंद्रीय मंत्री पद का त्यागपत्र सौंप दिया था. पंजाब में जाट किसानों का मतप्रतिशत अधिक होने के कारण सभी समीकरण किसानों के वोटों पर आकर रुक जाते हैं. संभवतः कैप्टेन अमरिंदर सिंह किसानों की केंद्र के प्रति नाराजी को 'कॅश' करना चाहते हैं. वैसे पंजाब विधानसभा की मियाद मार्च 2022 तक हैं यानी अभी पंद्रह महीनों की कालावधि शेष है. चर्चा हैं कि आनेवाले तीन से चार दिनों में कैप्टेन अमरिंदर सिंह दिल्ली का रुख अपना सकते हैं. 

नवज्योतसिंह सिध्दू को मनाने के प्रयास ! 


तेजतर्रार वक्ता एवं राजनेता नवज्योतसिंह सिध्दू ने कैप्टेन अमरिंदरसिंह से नाराजगी के चलते एक वर्ष पूर्व अपने मंत्रीपद का त्यागपत्र सौंप दिया था. पिछले दिनों किसान आंदोलन के समय नवज्योतसिंह सिद्धू के भाषण काफ़ी लोकप्रिय हुए. आमआदमी पार्टी के साथ साथ भाजपा ने भी उन्हें पार्टी में शामिल होने की दावत दीं. शिरोमणि अकाली दल भी उनसे मतभेद भुलाने को तैयार हो गया. समय की गंभीरता देखते हुए कैप्टेन अमरिंदरसिंह ने सिद्धू के सामने दुबारा से कैबिनेट मंत्रीपद स्वीकारने के लिए प्रस्ताव भेज दिया. दीपावली पर्व के बाद पंजाब मंत्रिमंडल का विस्तार संभव हैं ऐसा कहा जा रहा हैं. 


https://youtu.be/_jfnW-Wk0uU


Vision media & publicize services

Nanded


https://www.youtube.com/channel/UCOy6XPhBT09sdeYBEmDVSXg



  होली हल्ला महल्ला यात्रा मार्ग की दुरुस्ती करें : मनबीरसिंघ ग्रंथी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार समूह) के युथ प्रदेश सचिव स. मनबीर...