श्री गुरु ग्रंथसाहिब जी के 312 वें गुरुतागद्दी दिवस की शुभकामनायें !
रविंदरसिंह मोदी
तीन सौ बारह वर्ष पूर्व, तिथिनुसार, आज के दिन युगदृष्टा गुरु, परम तेजस्वी, दुष्ट दमन दशमेश पिता श्री गुरु गोबिंदसिंघजी महाराज ने हजूर साहिब नांदेड़ की पावन धरती पर श्री गुरु ग्रंथसाहिब जी को गुरुत्व यांनी गुरुतागद्दी प्रदान की थीं. गुरुतागद्दी प्रदान करते समय श्री गुरु गोबिंदसिंघजी महाराज ने आत्मिक भाव व्यक्त करते हुए आदेश दिया था, "आगिया भई अकाल की तबै चलायो पंथ, सभ सिखन को हुकूम हैं गुरु मानियो ग्रन्थ."
उस दिव्य और आलौकिक घटना को 312 वर्ष पूर्ण होने पर तखत सचखंड श्री हजुरसाहिब में श्री गुरु ग्रंथसाहिब जी का गुरुतागद्दी पर्व श्रद्धा और उत्साह के वातावरण में मनाया गया. हर वर्ष गुरुतागद्दी का समारोह उत्साह के वातावरण में ही संपन्न होता आया है. लेकिन इस वर्ष तकनीकि दिक्कतों का व्यवधान सामने था. पर गुरु महाराज की अनुकंपा और आशीर्वाद से उत्साह के माहौल में पर्व संपन्न हुआ.
श्री गुरु ग्रंथसाहिब जी हमारे पथप्रदर्शक गुरु है. श्री हजूर साहिब की पावन धरती पर उनका अस्तित्व विराट आभा प्रसारित कर रहा है. गुरु ग्रंथसाहिब जी के अलौकिक ज्ञान और मार्गदर्शन से हजुर साहिब में सदैव दिव्यता का परम अहसास मिलता आया है. आज तीन सौ बारह वर्षों बाद हम वैज्ञानिक आधार पर भी गुरुबाणी की सार्थकता को महसूस करवा सकते हैं. यदि हजूर साहब से श्री गुरु ग्रंथसाहिब जी की विचारधारा का प्रचार और प्रसार प्रमाणिकता से किया जाएं तो सिख धर्म को सर्वधर्मीय हृदय में सम्मान का स्थान प्राप्त होगा. श्री गुरु ग्रंथसाहिबजी की विचारधारा हमारे पंथ के संकुचन में ठहर गईं हैं. इस विचारधारा को प्रसारित करने के लिए हजूर साहब की धरती से ही सक्षम मंच की स्थापना होनी चाहीए. राजनीतिक मनोवृत्ति के चलते धर्म की विचारधारा को अधोगति की ओर छोड़ देना किसी भी धर्म की सबसे बड़ी हानि होती है. यदि श्री गुरु ग्रंथसाहिब की विचारधारा वैश्विक नहीं होती तो शायद मैं राजनीतिक अपप्रवृत्ति को छेड़ने का कदापि अट्ठहास न करता. लेकिन सत्य यहीं है कि 64 वर्ष पुरानी हमारी धार्मिक संस्था में धर्मप्रचार कार्यों को लेकर गहरी उदासीनता छाई हुईं हैं.
सिख धर्म का प्रचार प्रसार सिख पंथ के अंतर्गत ही हैं. यह प्रचार प्रसार और समागम भी केवल अंतर्गत सौजन्य परोसने का माध्यम हैं. यहीं तक सीमित रहने का यह प्रपंच हैं. श्री गुरु नानकदेव जी की आध्यात्मिक विचारधारा आज खुलकर उन उदासियों का भी वास्ता देने से कतरा रहीं हैं जो सिख पंथ के भीतर नहीं अपितु संपूर्ण एशिया खंड को सिक्खी का उजला आशावाद दिखाकर लौटी थीं. सिख गुरुओं, संतों, महापुरुषों और प्रामाणिक सिखों की भक्ति, अध्यात्म, सीख, मार्गदर्शन शांत सफहों में समाधिस्थ हैं. साल में एक बार, कुछ धार्मिक विचार जागृत कर बाद में वर्ष भर का अवसाद अपनाना कोई नियति नहीं हो सकती. सभी को श्री गुरु ग्रंथसाहिब जी गुरुतागद्दी दिवस की कोटि कोटि शुभकामनायें और बधाई.
(पसंद आया तो link जरूर शेयर कीजिए )























































