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बुधवार, 28 अक्टूबर 2020

 माता साहिब देवजी जन्मोत्सव का समापन 

कीर्तन दरबार, लंगरप्रसाद और नेजाबाजी !

(माता साहिब देवाजी का 339 वां जन्मोत्सव कार्यक्रम)

गुरुद्वारा माता साहिब देवाजी स्थान पर विगत तीन दिनों से मनाये जा रहे 339 वें 'माता साहिब देवाजी जन्मोत्सव' का समापन बुधवार (28-10-2020) की दोपहर श्रद्धा और उत्साह के वातावरण में संपन्न हुआ. तखत सचखंड श्री हजूरसाहब के मुख्य जत्थेदार संत बाबा कुलवंतसिंघ जी और आदरणीय पंजप्यारे साहिबान की उपस्थिति ने कार्यक्रम की चकाचौंध बढ़ा दीं. कार्यक्रम में सहायक जत्थेदार संत बाबा रामसिंघजी, मीत ग्रंथी भाई गुरमीतसिंघजी, भाई जगिंदरसिंघजी, ज्ञानी भाई अवतारसिंघजी शीतल, कथाकार भाई विजेंद्रसिंघजी, संतबाबा बलविंदरसिंघजी कारसेवा वाले, संतबाबा गुरदेवसिंघजी सहित विविध दल पंथ के जत्थेदार और धार्मिक हस्तियां मंच पर उपस्थित थे. 


(संत बाबा बलविंदरसिंघजी कारसेवा वाले)

ता. 26-10-20 की सुबह माताजी के जन्मोत्सव कार्यक्रम की शुरुआत हुईं थीं. आज समापन के दिन (बुधवार) को श्री अखंडपाठ साहब की समाप्ति, पाठ, कथा, कीर्तन दरबार आदि कार्यक्रम संपन्न हुए. इस अवसर पर सहायक जत्थेदार संत बाबा रामसिंघजी ने माता साहिब देवाजी का संक्षिप्त जीवन वृतांत सुनाया. उन्होंने कहा, माताजी ने गुरुद्वारा मातासाहिब देवाजी स्थान पर सतयुग में तपस्या की थी. यह ऐतहासिक और पावन स्थान है. यह खालसा पंथ की माताजी का स्थान हैं. आज उनके जन्मोत्सव को मनाते हुए समूह पंथ को शुभकामनायें. संतबाबा बलविंदरसिंघजी कारसेवा वालों ने भी उपस्थित श्रद्धालुओं को सम्बोधित किया. 



नगर कीर्तन और नेजाबाजी से तीन दिवसीय समागम का समापन किया गया. इस दौरान भव्य लंगर प्रसाद कार्यक्रम हुआ.

(समाप्त)

👇👇👇  जरूर पढ़िए 

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सोमवार, 26 अक्टूबर 2020

समाचार :

माता साहब देवाजी जन्मोत्सव प्रारंभ

पाठ, कथा, कीर्तन और धार्मिक दीवान 

(माता साहेब देवाजी 339 वां जन्मोत्सव, गुरुद्वारा माता साहेब)

हजूरसाहब, नांदेड़ 26 अक्टूबर 20

श्री गुरु गोबिंदसिंघजी महाराज के महल माता साहेब देवाजी के 339 वें जन्मोत्सव समारोह तपोस्थान और ऐतिहासिक गुरुद्वारा माता साहब देवा जी स्थान पर सोमवार (ता. 26-10-2020) की सुबह प्रारंभ हुआ. यह समारोह तीन दिनों तक चलेगा. आगामी बुधवार को दोपहर समारोह का समापन होगा. 

तपोस्थान माता साहेब देवा जी 

जन्मोत्सव कार्यक्रम की शुरुआत सोमवार की सुबह तखत सचखंड श्री हजूर साहब के मीत ग्रंथी भाई गुरमीतसिंघ जी की प्रमुख उपस्थिति में हुईं. इस अवसर पर गुरुद्वारा श्री लंगर साहब के संत बाबा बलविंदरसिंघजी कारसेवा वाले, गुरुद्वारा माता साहब देवा जी के जत्थेदार संत बाबा तेजासिंघजी और धार्मिक क्षेत्र की हस्तियां उपस्थित थीं. 


गुरुद्वारा माता साहब देवाजी के पूर्व जत्थेदार एवं शिरोमणि पंथ अकाली बूढ़ा दल 96 करोडी के पूर्व मुख्य जत्थेदार सचखंड वासी संतबाबा प्रेमसिंघजी की प्रेरणा अनुसार आज मातासाहब देवाजी का 339 वां जन्मोत्सव कार्यक्रम की शुरुआत श्री गुरुग्रंथ साहब जी के अखण्ड पाठ के पठन से हुईं. अरदास उपरांत धार्मिक दीवान कार्यक्रम शुरू हुए जिसमें भाई जगतेश्वर सिंघजी पटियाला वाले रागी जत्था द्वारा शबद - कीर्तन किया गया. पश्च्यात भाई जीवनसिंघजी व भाई सुखदेवसिंघजी लुधियानावाले रागी जत्था ने भी शब्दकीर्तन प्रस्तुत किया. स्थानीय रागी जत्थों द्वारा भी कीर्तन और पाठ प्रस्तुत किये गए. 
जन्मोत्सव समारोह में आगामी तीन दिनों तक सुप्रसिद्ध रागी, कथाकार, कीर्तनकार और धार्मिक क्षेत्र की हस्तियां, पंजप्यारे साहिबान, निहंग सिंघ दल, पंथ, संप्रदाय और गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति होगी. 
कोरोना संक्रमण की परिस्थिती देखते हुए माता साहेब परिसर में विशेष सावधानी बरतीं जा रहीं हैं. परिसर वैद्यकीय सेवा पथक भी नियुक्त किया गया हैं. सोशल डिस्टन्सिंग का विशेष ख्याल रखा गया हैं.  

लंगर प्रसाद : 

मातासाहब गुरुद्वारा में जन्मोत्सव के लिए विशेष लंगर संचालित हो रहा हैं. बाबा लालसिंघजी कारसेवा वाले और गुरुद्वारा लंगर साहेब  के सेवादार अविरत रूप से यहां लंगर सेवा कर रहे हैं. ब्रेड पकोड़े और चाय का लंगर भी संचालित हो रहा हैं.  

पुलिस बंदोबस्त : 

जन्मोत्सव कार्यक्रम के संचालन हेतु मुदखेड पोलिस स्थानके के निरीक्षक श्री सुनील निकाळजे के मार्गदर्शं में भव्य पोलिस बंदोबस्त तैनात किया गया हैं. मातासाहेब परिसर में पुलिस द्वारा कोरोना को लेकर भी सुरक्षा हेतु आवाहन किया जा रहा हैं. 

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रविवार, 25 अक्टूबर 2020

हजूर साहब में दशहरा हल्ला महल्ला उत्साह से मनाया 

रविंदरसिंघ मोदी 

( तखत सचखंड श्री हजूर साहिब में दशहरा हल्ला महल्ला यात्रा का दृश्य )

तखत सचखंड श्री हजूर साहब में परंपरागत दशहरा हल्ला महल्ला हार उत्साह के साथ मनाया गया. रविवार ता. 25 अक्टूबर 20 को सुबह तड़के तखत साहब के दर्शन शरू हुए. दोपहर दशहरा महात्म श्री चंडी साहब पाठ का समापन संपन्न हुआ. तखत साहब के जत्थेदार संतबाबा कुलवंतसिंघजी और पंजप्यारे साहिबान की उपस्थिति में शास्त्र पूजन किया गया. पश्च्यात अरदास कर पारंपरिक हल्ला महल्ला यात्रा निकाली गई. यात्रा में रागी जत्थे, कीर्तन जत्थे, गुरु महाराज के घोड़े शामिल थे. संतबाबा बलविंदरसिंघ जी यात्रा में उपस्थित थे. यह यात्रा मुख्य डयोढ़ी गेट नंबर एक से गुरुद्वारा मुख्य रोड़, गुरुद्वारा चौराहा से महावीर चौक पहुंची जहाँ प्रथानुसार हल्ला कार्यक्रम संपन्न हुआ. हल्ला कार्यक्रम में बड़ी संख्या में नौजवानों ने हिस्सा लिया. देर शाम यह यात्रा तखत सचखंड हजूर साहब पहुंची. हल्ला महल्ला यात्रा में हजुरसाहब साधसंगत और नौजवान बड़ी संख्या में उपस्थित थे.  





शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2020

दशहरा हल्ला महल्ला यात्रा को 

उच्च न्यायालय की सशर्त अनुमति!

रविंदरसिंघ मोदी  

 
(तखत सचखंड श्री हजूर अबचल नगर साहिब नांदेड़)

सिखों के पावन पवित्र धार्मिक स्थल तखत सचखंड श्री हजूर अबचल नगर साहिब के तत्वावधान में पारंपरिक दशहरा हल्ला महिला यात्रा के आयोजन को मुंबई उच्च न्यायालय की औरंगाबाद खंडपीठ द्वारा सशर्त अनुमति प्रदान की गई इस निर्णय के बाद स्थानीय सिख समाज में उत्साह का वातावरण बन गया है. न्यायालय निर्णय के बाद निर्धारित दशहरा के दिन हल्ला महल्ला नगर कीर्तन यात्रा ता. 25-10-2020 निकाली जायेगी. 


( दशहरा हल्ला महल्ला यात्रा का दृश्य )

शुक्रवार तारीख 23 अक्टूबर 2020 के दिन दोपहर औरंगाबाद उच्च न्यायालय खंडपीठ में माननीय न्यायाधीश श्री एस. वी. गंगापुर कर और माननीय न्यायाधीश एस.डी. कुलकर्णी की विशेष बेंच द्वारा गुरुद्वारा तखत सचखंड बोर्ड संस्था द्वारा प्रस्तुत याचिका पर कार्रवाई शुरू की गई. इस समय गुरुद्वारा तखत सचखंड बोर्ड सचिव सरदार रविंद्रसिंह बुंगई बोर्ड के याचिकाकर्ता के रूप में उच्च न्यायालय में उपस्थित थे. गुरुद्वारा बोर्ड के प्रधान स. भूपिंदरसिंघ मनहास द्वारा इस मामले में करवाई हेतु स. रविंदरसिंघ बुंगई को नियुक्त किया गया था. गुरुद्वारा तखत सचखंड बोर्ड के वकील के रूप में सुप्रसिद्ध अधिवक्ता श्री राजेंद्र देशमुख ने मजबूती के साथ अपना पक्ष प्रस्तुत किया. उनको अधिवक्ता श्री देवांग ने सहायता की. 

श्री राजेंद्र देशमुख द्वारा अपने अनुभव का उपयोग कर कार्रवाई के दौरान सभी तथ्य प्रस्तुत किये. न्यायालय द्वारा दशहरा हल्ला नगरकीर्तन यात्रा के लिए सशर्त अनुमति देने का निर्णय दिया गया जिसके नियम बहुत ही सख्त होंगे. महाराष्ट्र सरकार ने पहले अनुमति को सिरे से नकार दिया था. न्यायालय द्वारा क्या शर्ते रखीं गई इसका खुलासा नहीं हुआ है क्योंकि निर्णय (जजमेंट) की कॉपी प्राप्त नहीं हो पाई है. इसलिए खुलासा अगले पोस्ट में विस्तार से किया जायेगा. यात्रा में शामिल होने वालों के लिए कोरोना कोविड जाँच अनिवार्य की गई ऐसी प्राथमिक जानकारी मिली है. 

यात्रा के लिए केवल दो ट्रक वाहनों का उपयोग होगा जिस पर यात्रा विराजमान होगी. कोई पैदल नहीं चलेगा ऐसा भी निर्देश दिया गया ऐसी चर्चा हैं. यात्रा मार्ग संक्षिप्त होगा जिसका अंतर डेढ़ किलो मीटर से कुछ ज्यादा होगा. गुरुद्वारा मीठी बाउली साहब के पास से यह यात्रा पंजाब भवन यात्री निवास रोड से गुरुद्वारा साहब की ओर अग्रसर होगी ऐसा कहा जा रहा हैं. जजमेंट कॉपी पढ़ने के बाद ही सत्य परिस्थिति पता चलेगी.

यह विषय धार्मिक आस्था से जुड़ा होने के कारण इस मामले सभी पहलुओं पर विचार किया गया. साथ ही कोरोना संक्रमण के हालात का जिक्र इसमें किया गया. सभी तरह की स्वस्थ सेवाओं और सुरक्षा को लेकर भी न्यायलय द्वारा निर्देश दिए गए ऐसी जानकारी गुरुद्वारा बोर्ड के सचिव स. रविंदरसिंघ बुंगाई द्वारा दी गई. 

गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड द्वारा दशहरा महल्ला से संबंधित सभी ऐतहासिक दस्तावेजों की पूर्ततः की गई. जिसका लाभ न्यायालय में याचिका करवाई संचालन के दौरान देखने को मिला. पक्ष सुनने के बाद और ऐतिहासिक प्रमाणों की पुष्टि के बाद खंडपीठ द्वारा अपना निर्णय सुनाया गया. निर्णय में सशर्त अनुमति देने की बात मा. न्यायाधीश के पैनल द्वारा की गई.

स. परमज्योतसिंघ चाहल ने बताया कि, इस याचिका के कार्यान्वयन में गुरुद्वारा बोर्ड के प्रधान स. भूपिंदरसिंघ मनहास का मुख्य मार्गदर्शन था. श्री मनहास ने भी इस सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त की. दशहरा की परंपरा अखंडित रखने का हमारा प्रयास सफल रहा ऐसी बात उन्होंने कहकर लगातार प्रयास के लिए परमज्योतसिंघ चाहल और रविंदरसिंघ बुंगाई की उन्होंने सराहना की. 



हमारे देश पर कोरोना की आफत मुफ्त में आई है..! 

वोटों के लिए कोरोना टीके का वास्ता दिया जाए, ये तो ठीक नहीं !!

रविन्दरसिंह मोदी 

(प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी बिहार चुनाव अंगर्गत सासाराम विधानसभा में प्रचार रैली में )

 भारतीय जनता पार्टी और केंद्र सरकार के लिए बिहार विधानसभा चुनाव कितने महत्वपूर्ण हैं इसका अंदाजा इस बात से हो जाता है कि, भाजपा ने अपने चुनाव घोषणा पत्र में कोरोना संक्रमण टीका (वैक्सीन) मुफ्त में उपलब्ध करवाने का मुद्दा शामिल किया. क्या कोरोना बीमारी का भी राजनीतिकरण करना योग्य हैं? क्या भारत की जनता को मुफ्त टीका नहीं मिलेगा? क्या टीका पाने के लिए भाजपा को वोट देना जरुरी हैं? चुनावी सभाओं में कोरोना और रोकथाम टीके की बातें कहकर सहानुभूति बटोरनेवाली राजनीतिक पार्टियों को यह तो विचार करना चाहिए कि, भारत की जनता को तो कोरोना कोवीड १९ संक्रमण तो मुफ्त में मिला हैं! यह बीमारी पाने के लिए किसी भी भारतीय नागरिक ने वोट नहीं दिया था! जब बीमारी मुफ्त में मिली है तो टीका भी मुफ्त में ही मिलना चाहिए ना? केंद्र सरकार की कोरोना संक्रमण को लेकर "वोट के बदले वैक्सीन" का चुनावी घोषणा पत्र जारी करते समय सरकार ने क्या केवल भावनाओं की असंवेदनाओं की हद्दें नहीं लांघी? क्या सरकार ने सरकारी दायित्व को ही चुनावी मुद्दे के रूप में शामिल नहीं किया? 

(भारतीय पार्टी का बिहार चुनावी घोषणा पात्र जारी करते समय नेतागण)

शुक्रवार, ता. २३ अक्टूबर २०२० को प्रधानमंत्री ने बिहार के सासाराम चुनावी सभा के माध्यम से बिहार की जनता को संबोधित किया. उन्होंने बिहार में कोरोना संक्रमण से लड़ रही नितीश कुमार सरकार की सराहना करने में कोई कसर नहीं छोड़ी. मुख्यमंत्री नितीश कुमार ने कोरोना काल में सरकार के कार्यों का जिक्र कर अपने सरकार  केंद्र सरकार की पीठ थपथपाली. ऐसे समय प्रधानमंत्री भूल गए कि देश में कोरोना से किस राज्य की जनता सबसे अधिक पीड़ित और त्रस्त हैं. देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या ७७ लाख ६२ हजार से अधिक हो गईं हैं. देश में अब तक कोरोना संक्रमण से एक लाख १७ हजार ३०६ मौतें दर्ज हो चुकी हैं. जिन्होंने प्राण गंवाएं हैं उन्होंने तो मुफ्त में ही गंवाएं. इन मौतों की जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या केंद्र सरकार ने कोरोना से मरने वालों के परिवारों को कोई आर्थिक सहायता प्रदान की ? क्या संक्रमित मरीजों को फिर से उबरने के लिए मुफ्त दवाइयां या कोरोंटीन समय का वेतन अदा किया? नहीं! अब वैक्सीन मुफ्त में देकर केंद्र सरकार क्या सन्देश देना चाह रहीं हैं? 

(प्रधानमंत्री ने अभी तक कोई वैक्सीन को अधिकृत नहीं किया हैं. फिर घोषणापत्र में उसे शामिल क्यों किया गया है?)

वर्तमान समय में महाराष्ट्र कोरोना संक्रमण के हालात अकथनीय हैं. केंद्र सरकार ने कभी महाराष्ट्र के कोरोना हालातों की समीक्षा नहीं की हैं. प्रदेश में कोरोना संक्रमितों की संख्या १६ लाख २५ हजार से अधिक हैं. पिछले २४ घंटों में ७ हजार ५३९ नए मामले दर्ज हुए हैं वही चौबीस घंटों में १९८ लोगों ने जान भी गंवाई हैं. आइसीएमआर के निर्देशों के तहत वैक्सीन का कार्य जारी हैं लेकिन प्रभावशाली वैक्सीन कब उपलब्ध होगी उस संबंध कोई ठोस जानकारी अभी उपलब्ध नहीं हैं. केंद्र सरकार ने भी वैक्सीन को लेकर तिथि घोषित नहीं की हैं कि कब वैक्सीन उपचार का हिस्सा बनेगी. वैक्सीन तो उपलब्ध नहीं है फिर वो विषय घोषणापत्र का हिस्सा क्यों? इसीलिए की मतदाता कोरोना संक्रमण का भय भूलकर घरों से बाहर निकल आये. यदि मतदाता घरों से बाहर नहीं निकलेंगे तो सरकार कैसे बनेगी? 

(अब विपक्ष इस तरह से भाजपा को आड़े हाथों ले रहा हैं) 

गुरुवार, 22 अक्टूबर 2020

उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल 

शुक्रवार को दशहरा हल्ला महल्ला आयोजन पर निर्णय 

रविन्दरसिंघ मोदी 

 ( तखत सचखंड श्री हजुरसाहब दशहरा महल्ला )

सिखों के पवित्र पावन स्थान तखत सचखंड श्री हजुरसाहब की पुरानी परंपरा के तहत यहां दशहरा हल्ला महल्ला नगरकीर्तन यात्रा के आयोजन को अनुमति देने के संबंध गुरुद्वारा तखत सचखंड बोर्ड द्वारा गुरुवार, ता. २२ अक्टूबर २०२० को मुंबई उच्च न्यायालय की औरंगाबाद खंडपीठ में याचिका प्रस्तुत की गई. जिसे न्यायालय द्वारा स्वीकार कर लिया गया. गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड के सचिव स. रविंदर सिंघ बुंगाई ने यह याचिका गुरुद्वारा बोर्ड के याचिकाकर्ता  के रूप में प्रस्तुत की. जिस पर न्यायालय द्वारा शुक्रवार ता. २३ अक्टूबर २०२० के दिन सुनवाई होगी. 

 गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड की ओर से विधितज्ञ एडवोकेट श्री राजेंद्र देशमुख याचिका पर अपना पक्ष रख रहें हैं. संभवतः शुक्रवार को दशहरा हल्ला महल्ला यात्रा को सशर्त अनुमति मिलने की उम्मीद हैं. लेकिन इस विषय में महाराष्ट्र सरकार किस तरह से पक्ष रखती है उस पर बहुत कुछ निर्भर होगा. स्वाभाविक हैं कि इस विषय में नांदेड़ के जिल्हाधिकारी और नांदेड़ महानगर पालिका को भी उच्च न्यायालय द्वारा प्रश्न किया जायेगा. महाराष्ट्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में अपना पक्ष रखते हुए अनुमति देने के लिए असमर्थता व्यक्त की थीं.

 
(औरंगाबाद उच्च न्यायालय खंडपीठ)

 उल्लेखनीय है कि बुधवार, ता. २१ अक्टूबर को मुंबई मंत्रालय के आपत्ति व्यवस्थापन मंत्रालय द्वारा कोरोना कोवीड १९ के हालातों का जिक्र कर अनुमति देने से इंकार कर दिया था. जिसके बाद गुरुद्वारा बोर्ड ने आज सर्वोच्च न्यायालय नियमों अंतर्गत मुंबई उच्च न्यायालय के औरंगाबाद खंडपीठ में याचिका प्रस्तुत की. यह याचिका फास्टट्रैक कोर्ट के विशेष कक्ष में सुनी जाएगी और २३ अक्टूबर को दोपहर तक कोई नतीजा निकलकर सामने आएगा. स. रविन्दरसिंघ बुंगाई ने फ़ोन पर जानकारी देते हुए आशा जताई कि कल सारी परिस्थिति अनुकूल हो और दशहरा हल्ला महल्ला की परंपरा के तहत  नगरकीर्तन यात्रा को अनुमति मिल जाये. दूसरी ओर हजुरसाहब की साधसंगत की निगाह भी अनुमति की ओर लगी हुई हैं.

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बुधवार, 21 अक्टूबर 2020

मंत्रालय से दशहरा हल्ला महल्ला को अनुमति नहीं !!

मुंबई उच्चन्यायालय से उम्मीद 

रविंदरसिंघ मोदी 

(दशहरा महोत्सव फाइल फोटो)

तखत सचखंड श्री हजुरसाहब के तत्वावधान में आयोजित होनेवाले पारंपरिक दशहरा हल्ला महल्ला नगरकीर्तन यात्रा को अनुमति देने के विषय में महाराष्ट्र सरकार के आपत्ति व्यवस्थान विभाग (मंत्रालय) ने बुधवार, ता. 21-10-2020 को अपील को ख़ारिज कर दिया. कोरोना संक्रमण अनियंत्रित अवस्था में होने का हवाला देकर यह अनुमति नकार दी है. जिसके बाद अब इस विषय को लेकर मुंबई उच्चन्यायालय में आशाएं पल्लवित है. 

उपर्युक्त संबंध में गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड के समन्वयक सदस्य, पूर्व न्यायाधीश स. परमज्योतसिंघ चाहल ने इस बात का स्पष्टीकरण दिया कि, महाराष्ट्र सरकार के डिजास्टर मैनेजमेंट विभाग (मंत्रालय) ने गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड का पक्ष सुनने के बाद महाराष्ट्र सरकार की निर्धारित भूमिका के तहत नगरकीर्तन यात्रा आयोजन को अनुमति नकार दी है. 


उल्लेखनीय है कि, गत दिनों गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड नांदेड़ द्वारा देश के सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर कर 'दशहरा हल्ला महल्ला नगरकीर्तन यात्रा' के आयोजन को अनुमति प्रदान करने की अपील की थीं. यह विषय धार्मिक भावना और मर्यादा अंतर्गत होने के कारण सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गुरुद्वारा बोर्ड की अपील पर पूरा ध्यान दिया गया. लेकिन महाराष्ट्र में कोविड 19 कोरोना संक्रमण के हालात को लेकर अंतिम निर्णय महाराष्ट्र सरकार और राज्य के उच्च न्यायालय की सोच पर निर्धारित कर दिया गया. 

जिसके तहत संबंधित विषय को लेकर गुरुद्वारा बोर्ड द्वारा मुंबई मंत्रालय अंतर्गत आपत्ति व्यवस्थापन विभाग के सामने अनुमति को लेकर विषय प्रस्तुत किया गया था. विभाग के प्रमुख संचालक अधिकारी श्री किशोर निंबालकर द्वारा उनके न्यायिक कक्ष में गुरुद्वारा बोर्ड का पक्ष सुना गया. स. परमज्योतसिंघ चाहल ने गुरुद्वारा बोर्ड का पक्ष प्रस्तुत करते हुए तखत सचखंड श्री हजूर साहब की मर्यादा और परंपराओं का हवाला देकर सरकार द्वारा दशहरा हल्ला महल्ला यात्रा को अनुमति देने की अपील की. श्री निंबालकर ने अपने निर्णय में कहा कि, महाराष्ट्र में कोरोना संक्रमण के हालात अनियंत्रित है जिसके कारण सरकार इस तरह की अनुमति प्रदान करने में असमर्थ है. महाराष्ट्र में किसी भी तरह के धार्मिक आयोजन को फिलहाल अनुमति देना मुनासिब नहीं होगा. श्री निंबालकर ने आपत्ति व्यवस्थापन कानून २००५ की धाराओं के तहत अपना निर्णय स्पष्ट किया. जिसमे कहा गया है कि किसी भी धार्मिक, सामाजिक कार्यक्रम को अभी अनुमति नहीं दी जा सकती. तारीख ३० सितंबर २०२० को सरकार ने आदेश जारी किया हुआ है जिसमे महाराष्ट्र में ३१ अक्टूबर २०२० तक लॉकडाउन घोषित किया हुआ हैं.

श्री चाहल ने इस संदर्भ में बताया कि, अभी हमारे सामने मुंबई उच्चन्यायालय का विकल्प शेष है. सुप्रीम कोर्ट द्वारा अपने निर्णय मे उच्चन्यायालय का विकल्प निर्देशित किया हुआ है. गुरुद्वारा बोर्ड इस विकल्प को भी आजमाएगा. गौरतलब है कि दशहरा हल्ला महल्ला के आयोजन को लेकर सिख समाज उत्साही हैं. सभी की भावनाएं हैं कि दशहरा हल्ला महल्ला का आयोजन किया जाए. अब उच्चन्यायालय पर सभी की आशाएं केंद्रित होना स्वाभाविक हैं. 

मंत्रालय के निर्णय की प्रतियां..... पढियेगा. 









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मंगलवार, 20 अक्टूबर 2020

 संतबाबा प्रेमसिंघजी का व्यक्तित्व प्रेरणास्त्रोत : संतबाबा कुलवंतसिंघजी 

पहली बरसी कार्यक्रम संपन्न !

(गुरुद्वारा माता साहेबदेवाजी बरसी कार्यक्रम)

 हजूर साहब 20 अक्टूबर 2020

तखत सचखंड श्री हजुरसाहब के जत्थेदार संतबाबा कुलवंतसिंघजी ने मंगळवार, ता. 20 अक्टूबर को गुरुद्वारा मातासाहब देवाजी में आयोजित संतबाबा प्रेमसिंघजी की पहली बरसी कार्यक्रम के दौरान उपस्थित साधसंगत को संबोधित करते हुए कहा कि, संतबाबा प्रेमसिंघजी एक सामान्य सेवक से गुरुद्वारा मातासाहिब देवाजी गुरुद्वारा के जत्थेदार बनें और आगे चलकर उन्होंने बूढा दल के जत्थेदार पद को प्राप्त किया. लगभग चालीस वर्षों के संघर्ष, सेवा और समर्पण के कारण उनका व्यक्तित्व उभरकर सामने आया. बाबाजी का व्यक्तित्व सही मायने में प्रेरणास्त्रोत था.

उन्होंने आगे कहा, संतबाबा प्रेमसिंघ जी ने धार्मिक क्षेत्र में अपना मकाम कायम किया. बाबाजी ने नाम सिमरन, बाणी पठन और सेवा को ध्यान में रखा. उन्होंने सदा सभी का आदर सत्कार किया. हजूर साहब में उन्होंने अन्य संतों के साथ अच्छा व्यवहार स्थापित किया था. उनकी तरह ही मातासाहब इस स्थान की सेवा बाबा तेजासिंघजी भी निभाएंगे ऐसी पूरी उम्मीद है. 

कार्यक्रम में संतबाबा बलविंदरसिंघजी कारसेवावाले ने भी संबोधित किया. साधसंगत को नाम जपाने के बाद बाबाजी ने कहा, सेवा एक जिम्मेदारी होती है. सभी संत अपने सामर्थ्य के हिसाब से सेवा निभाते है. संतबाबा प्रेमसिंघ जी ने मातासाहब के लिए पूरा जीवन समर्पित कर दिया. आज उनकी बरसी के मौके पर उनको याद कर हर कोई धन्यता महसूस कर रहा है.


इस अवसर पर गुरुद्वारा मातासाहब देवाजी स्थान पर बरसी कार्यक्रम में तखत सचखंड हजूर साहब के मीत जत्थेदार संतबाबा ज्योतिंदरसिंघजी, हेडग्रंथी भाई कश्मीरसिंघजी, मीतग्रंथी भाई गुरमीतसिंघजी, पंजप्यारे भाई जगिंदरसिंघजी, ज्ञानी भाई अवतारसिंघजी शीतल, संतबाबा बलविंदरसिंघजी कारसेवावाले, जत्थेदार संत बाबा तेजासिंघजी मातासाहेबवाले, ज्ञानी हरदीपसिंघ कथाकार, ज्ञानी बक्षीसिंघ कथाकार, गुरुद्वारा बोर्ड सदस्य गुरमीतसिंघ महाजन, मनप्रीतसिंघ कुंजीवाले, राजिंदरसिंघ पुजारी,  गुरमीतसिंघ बेदी, हरजिंदरसिंघ, गुलाबसिंघ, भारतसिंघ,  जसबीरसिंघ बुंगाई, राजसिंघ रामगढ़िया सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे. 

बरसी अवसर पर श्री गुरु ग्रन्थसाहब जी के पाठ की समाप्ति, कीर्तन दरबार, कथा और अरदास कार्यक्रम हुए. उल्लेखनीय है कि, संतबाबा प्रेमसिंघजी ता. 19-10-2019 के दिन एक सड़क हादसे का शिकार हो गये थे, जिसमें उन्होंने संसार को अलविदा कह दिया था. बाबा जी की पहली बरसी ता. 20-10-2020 को मनाई गई






शनिवार, 17 अक्टूबर 2020

 हजूर साहब में दशहरा महात्म पर्व प्रारंभ 

तखत साहब में "श्री चंडी साहब पाठ" शुरू 

श्री हजूर साहब में परंपरागत दशहरा महात्म और हल्ला महल्ला पर्व की शुरुआत हो गई है. शनिवार, ता. 17 अक्टूबर 2020 से लेकर ता. 25 अक्टूबर 2020 तक यह पारंपरिक त्यौहार चलेगा. ता. 25 अक्टूबर को दशहरा त्यौहार मनाया जायेगा. 

(तखत सचखंड श्री हजुरसाहब में दशहरा महात्म श्री चण्डीसाहब पाठ प्रारंभ हुए )

वरात्रि की पहली तिथि पर तखत सचखंड श्री हजूर साहब में "श्री चंडी साहब" के पाठ आरंभ हुए. श्री दशम ग्रन्थ साहब अंतर्गत वीर रस पर आधारित चुनिंदा बाणियों का संच "दशहरा महात्म" के उल्लेख से जाना जाता है. दशहरा के अवसर पर तखत सचखंड और यहां के परिसर में श्री चंडी साहब के पाठ प्रथा के तहत आयोजित होते हैं. यह कई वर्ष पुरानी प्रथा और तखत साहब की मर्यादा भी है. 

(तखत सचखंड श्री हजूर साहब, नांदेड़)

(तखत सचखंड श्री हजूर साहब, नांदेड़)

तखत सचखंड श्री हजूर साहब गुरुद्वारा के अतिरिक्त शहर में अन्य स्थानों पर भी पाठ शुरू हुए. जिनमें गुरुद्वारा सिख छावनी नगिनाघाट, गुरुद्वारा मातासाहब देवाजी, गुरुद्वारा बाबा भुजंग सिंघ शहीदपूरा, भाई संतोखसिंघ जी विद्यालय अबचल नगर, बुंगा बंजरगाह बंजारा आश्रम,  गुरु नानक नगर नंदीग्राम सोसाइटी और अन्य निजी स्थानों पर पाठ की शुरुआत हुई. इन पाठ का समापन दशहरा के दिन दोपहर के समय होगा. 

(भाई संतोखसिंघजी विद्यालय, अबचल नगर, नांदेड़)

(बुंगा बंजरगाह, परशनसिंघ महंत)


(श्री गुरु नानक नगर, नंदीग्राम सोसायटी, नांदेड़)
 

शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2020

 दशहरा हल्ला महल्ला की पहल देशव्यापी हो तो सफलता !

दिल्ली की साधसंगत भी करें सरकार से मांग 

रविंदरसिंघ मोदी

(हजुरसाहब के परंपरागत दशहरा हल्ला महल्ला की फाइल फोटो)

तखत सचखंड श्री हजूर अबचल नगर साहब इस धार्मिक स्थल पर मनाये जानेवाले परंपरागत हल्ला महल्ला नगरकीर्तन यात्रा का विषय अब देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत हैं. इस याचिका को स्वीकृत कर न्यायालय क्या निर्णय करेगा अभी हम कुछ कह नहीं सकते. कुलमिलाकर यह विषय अब संविधानिक दायरे में चला गया हैं. सर्वोच्च न्यायालय के पास प्रस्तुत विषय, धार्मिक तथ्य, अखंड परंपरा, श्रद्धा-भावना, इतिहास, जनभावना और अल्पसंख्यक धार्मिक अधिकार यह सिख पंथ का प्रबल पक्ष होना चाहिए. यूँ कहा जाए तो अनुचित ना महसूस किया जाए, कि यह बात एक तरह से श्री हजूर साहब की यह दो - तीन सौ वर्षों की अखंड मर्यादा, परंपरा और सांस्कृतिक योगदान के कसौटी की यह घड़ी हैं. 

ऐसे समय में सिख पंथ को चाहिए कि धार्मिक अधिकारों के निर्वहन की स्वतंत्रता हेतु संविधानिक मूल्यों की प्रदत्तता प्राप्त हो इसलिए सर्वधर्मीय समर्थन जुटाया जाए. जब तक हमारी परंपराओं, मर्यादा, इतिहास, जीवनशैली, सामाजिक योगदान, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक सदभावयुक्त आचरण का देश के कोने - कोने तक सक्षम रूप से प्रचार - प्रसार नहीं हो जाता तब तक हमारी धार्मिक भावनाओं को ना स्वीकृति मिल सकती हैं और ना सम्मान. दशहरा हल्ला महल्ला यात्रा परंपरागत होने का विषय महाराष्ट्र, तेलंगाना, पंजाब और कुछ राज्यों के सिखों तक ही विस्तारित हैं. अन्य धर्म या केंद्र सरकार हमारी परंपराओं से अनभिज्ञ हैं यह सबसे बड़ा वास्तव हैं. हमारे प्रचार - प्रसार का तंग दायरा सर्वथा इसके लिए सबसे बड़ा कारण हैं. हमारे सोशल मीडिया का उपयोग भी संकुचित और व्यक्तिगत धारणाओं तक सीमित हैं यह भी एक कड़वी सच्चाई हैं. हमारा प्रचार - प्रसार केवल अपने लिए या निश्चित समूह के लिए हैं. देश की एक सौ तीस करोड़ जनता को दो प्रतिशत जनसंख्यावाले किसी धर्म, पंथ या समूह की धार्मिक आस्थाओं में क्या दिलचस्पी हो सकती हैं? राजनीतिक पार्टियां भी वहीं अपनी दिलचस्पी प्रदर्शित करती हैं जहां मतों का समीकरण हो. अन्य धर्म, जाति, समूह की संलिप्तता भी उन पंथ और समूहों के प्रति कम हो जाती हैं जिनकी जनसंख्या आंदोलन के रूप में प्रभाव नहीं डालती. मेरी व्यक्तिगत सोच पर आधारित यह कुछ बातें आज की अटल सच्चाई हैं की ओर संकेत करती हो. हो सकता हैं कि आपकी सोच अलग हो. मैं अन्य सभी की व्यक्तिगत भावनाओं को भी सम्मानपूर्वक स्वीकार करता हूँ कि इस विषय में जानकर लोग मंथन करें. 

(दशहरा हल्ला महल्ला की फाइल फोटो)

कहने का तात्पर्य यहीं हैं कि तखत सचखंड श्री हजूर साहब की मर्यादा, परंपरा, इतिहास और जीवनशैली को वैश्विक रूप से प्रस्तुत करने का यह सही समय आ गया हैं. यह विषय सर्वोच्च न्यायालय की परिधि में अंतर्भूत हो जाने के कारण हमें भी हमारे धार्मिक तथ्यों के साथ तैयार रहना होगा. वैसे तो इस विषय का निराकरण महाराष्ट्र सरकार के संज्ञान में प्रथम प्रस्तुत करना योग्य होता. महाराष्ट्र में कोरोना संक्रमण के हालात बेकाबू होने का हवाला देकर सरकार द्वारा आनेवाली तिथि 31-10-2020 तक लॉकडाउन अमल में रखा गया हैं. राज्य में धार्मिक स्थल और कुछ अन्य क्षेत्र प्रतिबंधित आदेश अंतर्गत हैं. कुछ राजनीतिक पार्टियों ने धार्मिक स्थल खोले जाने को लेकर अभी - अभी प्रदेश में बड़ा आंदोलन भी किया था. मंदिर, मस्जिद, चर्च आदि के प्रतिनिधि भी आंदोलन में शामिल हुए थे. इस आंदोलन से सिख पंथ नदारद रहा!! सिख पंथ की मांग महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री तक प्रस्तुत होनी चाहिए थी जिसके लिए पिछले दिनों हुआ आंदोलन एक मंच साबित हो सकता था. आज जब दशहरा हल्ला महल्ला यात्रा निकाले जाने की बात हैं, सिख पंथ सबसे अलग - थलग खड़ा दिखाई दें रहा है. कारण तलाशें जाए ! 


 

दिल्ली की साधसंगत संज्ञान लें :

यदि आज दशहरा हल्ला महल्ला की परंपरा अखंडित रखनी हो तो देश भर की सिख संगत, श्री गुरु नानक नामलेवा संगत और सिख धर्म में आस्था रखनेवाले सभी धर्मों और जातीय समूहों के समर्थन की भी आवश्यकता हैं. हमारे सिख सांसद, सिख विधायक और जनप्रतिनिधि भी विषय की प्रस्तुति को लेकर आगे आये. विषेश रूप से दिल्ली के हमारे सिख नेतागण और धार्मिक आगू भी सर्वोच्च न्यायालय के संज्ञान में धार्मिक तथ्य परोसने के लिए अग्रसर हो जाए. सर्वोच्च न्यायालय में प्रैक्टिस कर रहें सिख अधिवक्ता (वकील) भी पंथ के प्रति मर्यादा का अहसास रखकर स्वयं इच्छा से अपना पक्ष रखने हेतु आगे आये. तभी इस मामले में पूर्ण सफलता अर्जित हो सकती हैं. हमारा न्यायिक पक्ष सक्षम होना अनिवार्य हैं. तभी संविधानिक संस्थाएं हमारी मान्यताओं पर मुहर लगाएगी.  दिल्ली की साधसंगत यदि वहां की मीडिया में दशहरा हल्ला महल्ला के परंपरागत इतिहास  मर्यादा का विषय मीडिया में प्रचारित करती हैं तब केंद्र सरकार और संविधानिक संस्थानों तक हजुरसाहब के सिखों की मांग पहुंचेगी. यदि विनम्रता और संयमी भूमिका के तहत यह विषय उठाया जाये तो निश्चित ही परंपरागत दशहरा हल्ला महल्ला निकालने जाने को सफलता प्राप्त हो सकती हैं.

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