पुलिस द्वारा की गई अमानवीय पिटाई में सिखलीगर सिख की मौत
कौन खड़ा रहेगा सिखलीगरों के उत्थान के लिए ?
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महाराष्ट्र पुलिस ने बेहद शर्मनाक और अमानवीय घटना को अंजाम दिया हैं. मराठवाड़ा संभाग के परभणी शहर के पास बलसा गांव में ता. १ दिसंबर की सुबह कत्ता सिंघ पिता जसमत सिंघ दुदानी नामक ५० वर्षीय सिखलीगर सिख की पुलिस द्वारा डंडे बरसाएं जाने के बाद मौत हो गई. ये गरीब सिख परिसर के एक गुरुद्वारा और निशान साहिब को तोड़ने से मना कर रहा था.
प्राप्त जानकारी के मुताबिक मुताबिक ता. एक दिसंबर की सुबह परभणी शहर से सटे पिंगली इलाके में बलसा ग्रामपंचायत में कैनाल किनारे सिचाई विभाग की सरकारी जमीन पर से पुलिस और प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने की मुहीम शुरू की गयी. सुबह लगभग ९ बजे के समय सरकारी अतिक्रमण पथक पुलिस को लेकर वहाँ पहुंचा. पथक के कर्मचारियों ने आव देखा ना ताव देखा मकान तोड़ने शुरू कर दिए.
अतिक्रमण पथक द्वारा प्रोक्लीन (जे.सी.बी.) मशीन की सहायता से मकान हटाने शुरू किये गए. यह मशीन जैसे ही निशान साहिब के पास पहुंची कत्तासिंघ ने निशान साहिब तोड़ने का विरोध किया. कत्तासिंघ दुदानी ने निशान साहब का कसकर पकड़ लिया और कहा कि यह हमारा पावन चिन्ह हैं इसे न तोड़े. तब पुलिस ने सत्ता सिंघ पर लाठियां भांजनी शुरू कर दी. उसकी सहायता के लिए दूसरे लोग पहुंचे लेकिन पुलिस ने लाठीचार्ज करते हुए सभी की धुनाई कर दी. उन्होंने महिलाओं को भी नहीं बक्शा. कत्ता सिंघ अभी भी निशान साहब से चिपका हुआ था तो उसकी पीठ और सिर पर पुलिस ने डंडे बरसायें. जिससे वो बेहोश हो गया.
पुलिस ने उसे खींचकर दूर किया. लेकिन जैसे ही ये संकेत मिले की वो गंभीर रूप से घायल हो चूका है तो लाठी चार्ज बंद कर पुलिस ने उसके परिवार से वायरल हुए हैं.
परिवार ने कुछ युवकों के साथ मिलकर आखरी सांसें गिन रहे कत्ता सिंघ को तुरंत परभणी शहर के सरकारी अस्पताल में उपचार हेतु भर्ती करवाया लेकिन उपचार के चलते ही रात में उसकी मौत हो गई. जिसके बाद जैसे सिखलीगर समाज में मातम सा फ़ैल गया.
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घटना के बाद सिखलीगर समाज को तुरंत सहायता नहीं मिल पायी. पुलिस ने बहुत डराया. जिला प्रशासन ने भी उल्टा मामला बनाने और अपने अधिकारी एवं कर्मचारियों को तथा मारपीट में शामिल पुलिस के अधिकारी और पुलिस को बचाने का बहुत प्रयास किया.
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ता. ३ दिसंबर को गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड के मीत प्रधान भूपिंदर सिंघ मिन्हास, गुरुद्वारा मेंबर गुरमीत सिंह महाजन, सरजीत सिंघ गिल, रणजीत सिंह कायहाँ की जमींन पर विगत तीस वर्षों से सिखलीगर समाज के लगभग ३० परिवार मकान बनाकर रह रहे थे. उनके द्वारा वहाँ पूजापाठ के लिए एक गुरुद्वारा भी उनके द्वारा बनाया गया था. गुरुद्वारा परिसर में एक बड़ा निशान साहिब लगाया गया था. विगत तीस वर्षों से यहाँ के निवासी टैक्स भी चूका रहे हैं.
कहामठेकर, डी.पी. सिंह, गुरविन्दर सिंह वाधवा, सुखविंदर सिंह हुंदल, गुरप्रीत सिंह सोखी, कर्नल सिंह गाड़ीवाले, गुरमीत सिंह बेदी, मनप्रीत सिंह कुँजीवाले, जसपाल सिंह गाड़ीवाले सहित बड़ी संख्या में सिख समाज के लोग घटनास्थल पर पहुंचे. बोर्ड के मीत प्रधान भूपिंदर सिंह मिन्हास ने मृतक के परिवार की सांत्वना की. बोर्ड मेम्बरों द्वारा यह निर्णय भी अवगत करवाया गया कि हजूर साहिब बोर्ड द्वारा मृतक के परिवार को एक लाख की आर्थिक सहायता की जाएगी. साथ ही जिन परिवारों के मकान तोड़ दिए गए हैं उन्हें २५ हजार की मदत की जाएगी. साथ ही खुले में पड़े परिवारों के लिए सचखंड बोर्ड एक महीने तक दोनों समय का लंगर लगाएगा.
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इस घटना से मराठवाड़ा के सभी जिलों में सिखलीगर परिवार रोष में है. सरकार द्वारा बगैंर सुचना के इस तरह से ठण्ड के दिनों में मकान तोड़ दिए जाने से महिला और छोटे बच्चे भी खुले में आ गए हैं. ता. २ दिसंबर को परभणी के जिला कलेक्टर को साधसंगत की ओर से एक ज्ञापन सौपकर मामले की जाँच कराने और गरीब सिखलीगर समाज को दुबारा मकान बनाकर देने की मांग की गई. इस समय जिलाधीश कार्यालय के सामने नारेबाजी की गई.
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यहाँ सबसे बड़ा प्रश्न ये उठ रहा हैं कि महाराष्ट्र प्रदेश में सभी ओर सिखलीगर समाज उपेक्षित और वंचित हैं. बार - बार ये समाज पुलिस बर्बरता से कांप जाता हैं. पुलिस भी सिखलीगर को पकड़कर पहले पिटाई कर देती है बाद में पूछताछ करती हैं. सिखलीगर समाज पर हुए अन्याय को लेकर लड़ने के लिए उस संभ्रांत सिखों की जरुरत हैं जो स्वयं को उच्च प्रति के सिख मानते हैं. हालांकि सिखलीगर समुदाय ऐसा है जो केश और ककार रखता हैं. सिखलीगर समाज ने कभी केश कत्तल कर सिक्खी छोड़ी नहीं. १९८४ के कठीण दौर में भी सिखलीगर समाज ने सितम झेले पर सिक्खी नहीं छोड़ी. सिखलीगर समाज के उत्थान के लिए सिख समाज को एकजुट होकर लड़ने की जरुरत हैं. हजूर साहिब के सिक्खो पर बहुत कुछ निर्भर करता हैं. राजनीति को अलग रखकर आज पुलिस बर्बरता की घटना को गंभीरता से लेने की जरूरत हैं. उसी तरह सिखलीगर समाज और समुदाय के नेताओं से भी प्रार्थना है की इस विषय को संजीदगी से ले. गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड के चुनाव से प्रभावित होकर कोई काम न करें. सबसे पहला काम तो बेघर हुए सिखलीगर परिवारों को सरकारी आवास बनवाकर दिलाने का हैं. सामूहिक रूप से ये प्रयास सभी को करना होगा.
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