सरकार का निर्णय, एआईएमआईएम का विरोध!
"दुकानों
की तख्तियां मराठी में हो"
इम्तियाज जलील ने कसा तंज!
| मुख्यमंत्री श्री उद्धव ठाकरे, महाराष्ट्र : ऐतहासिक निर्णय ! |
महाराष्ट्र सरकार ने तारीख 12 जनवरी 2022 के दिन मंत्रिमंडल की विशेष बैठक में "मराठी भाषा संवर्धन पाक्षिक" को लेकर प्रदेश के सभी दुकानों की तख्तियां (बोर्ड) मराठी भाषा में लिखें जाने की अनिवार्यता लागु कर दी. मुख्यमंत्री श्री उद्धव ठाकरे के इस कदम के बाद मराठी भाषिकों में खुशी की लहर दौड़ गईं. लेकिन ए. आई. एम. आई. एम. के औरंगाबाद स्थित लोकसभा सांसद श्री इम्तियाज जलील ने इस विषय को लेकर तंज कसा हैं. उन्होंने हाल ही में एक ट्वीट कर कहा कि, चुनाव आते ही ऐसे विषय सूझते हैं. दुकानदारों के पास खाने के लिए पैसा नहीं हैं, वें दुकानों की तख्तियां (बोर्ड) कैसे बदलेंगे? सरकार को यदि भाषा पर इतना प्रेम है तो सरकार स्वयं दुकानदारों को मराठी में तख्तियां बनवाकर दें.
| औरंगाबाद के लोकसभा सांसद श्री इम्तियाज जलील (AIMIM) का ट्वीट. |
सांसद श्री इम्तियाज जलील के इस बयान के बाद औरंगाबाद में विषय तूल पकड़ेगा इसमें कोई संदेह नहीं है. साथ ही AIMIM के दबदबेवाले क्षेत्रों में विषय को लेकर विरोध छिड़ सकता है. मराठी भाषा के प्रचार और प्रसार को लेकर महाराष्ट्र सरकार द्वारा मंत्री मंडल बैठक में महाराष्ट्र दुकानें व आस्थापना कायदा 2017 में मूलभूत परिवर्तन उसे लागु किया है. सत्ताधारी शिवसेना पार्टी ने मराठी भाषा की अनिवार्यता को लेकर अक्सर आंदोलन चलाये हैं. शिवसेना की तरह ही महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने भी मराठी की अनिवार्यता को लेकर आंदोलन किये थे. लेकिन इस बार शिवसेना द्वारा दुकानों की तख्तियों को मराठी में लिखने की अनिवार्यता पर मुहर लगाकर 'मनसे' को मात दी हैं. आनेवाले समय में मुंबई महानगर पालिका और औरंगाबाद महानगर पालिका के चुनावों में मराठी विषय में तख्तियों की अनिवार्यता को लेकर राजनीतिक द्वंद छिड़ सकता हैं.
बहरहाल AIMIM के बयान पर औरंगाबाद में शिवसेना नेताओं ने अभी तक कोई जवाब जारी नहीं किया हैं. भारतीय जनता पार्टी और मनसे भी चुप - चुप हैं. सरकार द्वारा जारी निर्णय से गैरमराठी भाषिकों में विचलन दिखाई दें रहा हैं. विशेषकर मुंबई में इस निर्णय को लेकर मिलेजुले परिणाम देखने को मिल सकते हैं........
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें