गुरुधामों से फिरौती !
रविंदरसिंघ मोदी
सिख जगत के लिए गहन चिंता का विषय प्रस्तुत हुआ है. किसी अज्ञात शक्ति द्वारा बिहार की राजधानी पटना शहर स्थित गुरुद्वारा बाल लीला साहब (मैनी संगत) को उध्वस्त कर देने की धमकी देते हुए 50 करोड़ रुपयों की राशि बतौर फिरौती मांगी गई है. स्वतंत्र भारत मे यह पहला मामला होगा जब एक गुरुद्वारा (गुरुधाम) से फिरौती की मांग की गई है. यह विषय राजनीतिक साजिश भी हो सकता है और अपराध नियत भी. बिहार में रंगदारी और फिरौती मांगने का प्रचलन नया नहीं है. आपराधिक तत्व ऐसे हथकंडे अपनाते रहते हैं. लेकिन सेवाभावी, बहादुर सिख कौम के ऐतिहासिक गुरुद्वारा को इस तरह से पत्र भेजकर 50 करोड़ की रंगदारी का प्रयत्न करना या तो किसी बड़े आपराधिक संघठन का काम हैं अथवा पटना साहिब गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की कोई अंतर्गत साजिश हो सकती हैं. क्योंकि पत्र में उल्लेख किया गया हैं कि यदि फिरौती अदा नहीं हुई तो गुरुद्वारा बाललीला साहिब पर आक्रमण किया जायेगा अथवा प्रबंधक कमिटी के पदाधिकारियों को मौत के घाट उतार दिया जायेगा. पत्र में जो संपर्क नंबर दिया गया था वो किसी सरकारी कर्मचारी का है जिसे यह मामला ज्ञात ही नहीं है. बिहार सरकार, विशेष कर मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के लिए भी यह विषय चुनौतिपूर्ण है. पुलिस मामले की जाँच कर रही हैं. रंगदारी का यह विषय गंभीरता से लिया जाना चाहिए.
आश्चर्य की बात तो यह है कि सिखों की सर्वोच्च नेतृत्व संस्था शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी उपर्युक्त विषय में मौन धारण किये हुए है. गुरुद्वारा बाल लीला साहिब यह ऐतिहासिक गुरुद्वारा है जो दशमेश पिता श्री गुरु गोबिंदसिंघजी महाराज के बाल लीला का ऐतिहासिक प्रमाण है. राजा फतेहचंद मैनी और उनकी धर्मपत्नी विशंभरी देवी मैनी रानी को गुरु गोबिंदसिंघजी ने यहीं वर दिया था और उनकी गोद में खेलकर उनके हाथों छोले - पुरी खाई थीं. कहा जाता है कि इसी स्थान से कुछ दूरी पर गंगा तट पर पंडित शिवदत्त को बाल गोबिंदराय में श्रीकृष्ण के दर्शन हुए थे. इस दृष्टि से यह स्थान बहुत महत्वपूर्ण है. सिख इतिहास की यह एक धरोहर भी है. श्री गुरु गोबिंदसिंघजी का जन्म सन 1666 में पटना में हुआ था. सन 1666 से सन 1671 तक गुरु जी, माता गुजरी जी का यहाँ निवास रहा था. गुरु तेगबहादुर साहब भी इस स्थान से जुड़े थे और बहुत बार उन्होंने यहाँ निवास किया था. इस स्थान पर वर्ष 2019 में संत बाबा कश्मीरसिंघजी भूरीवाले द्वारा कारसेवा के माध्यम से एक भव्य गुरुद्वारा ईमारत का निर्माण करवाया गया. मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार द्वारा गुरुद्वारा की नई ईमारत का उद्धघाटन करवाया गया था.
उपर्युक्त घटना से सिख कौम में चिंता और चिंतन का वातावरण है. क्योंकि ऐसी घटना के जरिये सिख कौम को उकसाकर रास्ते पर लाने का एक प्रयास है. अभी हाल में बिहार से करीब पश्चिम बंगाल और असम में चुनाव हुए है. इन चुनावों में धर्म और क्षेत्रीयता को लेकर लोगों में दरार पड़ गई है. ऐसे समय में सिखों को उकसाकर किसी नई घटना को को अंजाम देने का प्रयास कुछ अज्ञात शक्तियों का रहा होगा. सिख कौम इन षड़यंत्र को समझकर आगे का कदम उठाएंगे ऐसी आशा की जा सकती है.
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