बीबी जगीरकौर की सोंच कितनी सही, कितनी गलत!
रविंदरसिंह मोदी
(तखत श्री केशगढ़ साहिब, आनंदपुर साहिब में बयान जारी करते हुए बीबी जगीरकौर और एसजीपीसी के पदाधिकारी)
दैनिक दी ट्रिब्यून (अंग्रेजी) की एक ख़बर यदि सही है तो निश्चित ही सिख जगत की छवि को दाँव पर धरने वाली वो ख़बर साबित होगी. ट्रिब्यून ऑनलाइन समाचार में कहा गया है कि श्री आनंदपुर साहिब में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की नई प्रधान बीबी जगीरकौर ने पत्रकारों के सामने यह स्पष्ट किया कि, एसजीपीसी द्वारा आगामी अप्रैल माह में आयोजित होनेवाले गुरु श्री तेगबहादुर जी प्रकाशपर्व चार सौ सालाना शताब्दि कार्यक्रम का न्यौता प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को नहीं भेजा जायेगा !
यह समाचार पढ़कर और सुनकर हर कोई आवाक हुए बगैर नहीं रह सकता. बीबी जगीर कौर का यह वक्तव्य भले ही वर्तमान में चल रहें किसान आंदोलन में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की भूमिका को लेकर जारी किया गया होगा. लेकिन उनका यह वक्तव्य सिख जगत की छवि पर प्रतिकूल असर डाल सकता है. बीबी जागीर कौर के इस वक्तव्य पर पंजाब में कोई हंगामा नहीं बरपा बल्कि स्तब्धता छा गई. उक्त विषय पर शिरोमणि अकाली दल के नेतागण भी चुप्पी साधे दिखाई दे रहें हैं. यानि बीबी जगीरकौर द्वारा की गई जल्दबाजी का शिरोमणि अकाली दल द्वारा समर्थन नहीं किया गया. लेकिन यह विषय इसलिए भी गंभीर लग रहा है कि बीबी जगीरकौर शिरोमणि अकाली दल कोर कमेटी की सदस्या भी है. उनका वक्तव्य भारतीय जनता पार्टी द्वारा गंभीरता से लिया जायेगा इसमें कोई संदेह नहीं रह जाता. कहना ना होगा कि यह विषय 2022 में पंजाब में होनेवाले विधानसभा चुनावों के समय भी गहरा असर कर सकता है.
बीबी जागीरकौर सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था का नेतृत्व कर रहीं है. उन्हें चाहिए कि, सिख पंथ की छवि को नुकसान पहुंचाएं, ऐसे वक्तव्य जारी ना करें. गुरु श्री तेगबहादुर जी का चार सौ सालाना प्रकाशपर्व केवल शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का निजी कार्यक्रम नहीं हैं बल्कि समस्त सिख जगत का कार्यक्रम हैं. गुरु तेगबहादुर जी का बलिदान "तिलक, जंझू राखा" यानि हिन्दू धर्म रक्षार्थ हुआ था. गुरूजी का आगामी प्रकाशपर्व सिख धर्म और अन्य धर्मों को एकत्र लाने का बढ़िया अवसर साबित होगा. यदि ऐसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम को लेकर अभी से नकारात्मक वक्तव्य जारी करना उस चतुर्थ शताब्दि को प्रभावित करना होगा. निश्चित ही अन्य राजनीतिक दल बीबी जागीरकौर के वक्तव्य को सिख पंत की राजनीतिक भूमिका मानकर चलेंगे.
जैसे कि देश में इस समय वातावरण गर्म हैं. राजधानी दिल्ली को किसान आंदोलनकारियों ने चारों छोरों से घेरा हुआ है. किसान आंदोलन में पंजाब के भी कृषक बड़ी संख्या में सक्रिय भूमिका निभा रहें हैं. इन किसानों में सिख भी बड़ी संख्या में शामिल हैं. बीबी जागीरकौर द्वारा उन सिखों और किसानों को आकर्षित करने की दृष्टि से यह वक्तव्य जारी किया हो लेकिन इस समय तो यह गलत प्रतीत हो रहा हैं. देश के प्रधानमंत्री को कार्यक्रम का न्यौता नहीं दिया जाना एक गलत कदम साबित हो सकता हैं. इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में तो सभी राजनीतिक नेताओं और पार्टियों को न्यौता दिया जाना चाहिए. यह कार्यक्रम सिख पंत और समाज संघठन की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल कर सकता है. यदि शिरोमणि अकाली दल द्वारा बीबी जगीरकौर की इस सोंच का समर्थन किया जाता है तो सिख पंथ का इससे बड़ा दुर्भाग्य कोई और नहीं होगा.
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