किसान भाइयों की मंगल कामनाओं के लिए
'तखत सचखंड साहब' भी पहल करें !
रविंदरसिंघ मोदी
पंजाब का सिख, जाट किसान समुदाय परोपकारी भूमिका निभाता हैं. श्री हजूर साहब और पंजाब की दूरी भले दो हजार किलोमीटर से अधिक हो लेकिन हजूर साहिब के लंगर की सेवा के लिए किसानों का योगदान बहुत मायने रखता हैं. पंजाब से भेजे गए गेहूं, चावल, घी और चढ़ावा का सीधा संबंध हजूर साहिब के स्थानीय समुदाय से जुड़ता हैं. इसलिए आज दिल्ली में चल रहें किसान आंदोलन को लेकर हजूर साहिब में चिंतन जरुरी हो जाता हैं. पंजाब यह सिक्खी का गढ़ है और श्री हजूर साहिब सिखों का ऊर्जा स्थान है. श्री गुरु ग्रंथसाहिब की पावन ऊर्जा से पंजाब के सभी किसानों को भी शक्ति और सामर्थ्य मिलना चाहिए. हजूर साहिब की साधसंगत भी किसानों के लिए कुछ करना चाह रहीं हैं. यह बात सर्वसामान्य तक भी पहुंचनी चाहिए. उन किसानों तक भी पहुंचनी चाहिए जो अपना घर बार छोड़ कर कई रातों से रेल की पटरी पर तो कहीं सड़को पर आंदोलन लिए बैठे हैं.
उत्तर भारत के किसान विगत एकमाह से नये कृषि कानून को लेकर मूलभूत सुधार की दुहाई दे रहें हैं. आंदोलन और धरना लगातार जारी हैं. केंद्र सरकार कुछ सुनने को तैयार नहीं हैं. किसान भी अड़े हैं. आज दिल्ली की सीमा में ऐसे तैसे प्रवेश मिल पाया. अब शहर के भीतर आंदोलन शुरू है. सरकार कह रहीं है बात करेंगी लेकिन कौन बात करेगा तय नहीं है. प्रधानमंत्री मोदी जी देश में वैक्सीन की तैयारी का जायजा लेने के लिए अहमदाबाद, हैदराबाद और पुणे का दौरा कर रहें हैं.
दिल्ली के गुरुद्वारा और सिख समुदाय किसानों की सहायता के लिए अग्रसर हुए हैं. हर तरफ से किसान वर्ग के लिए मंगल कामनाये की जा रहीं हैं. ऐसे समय में तखत सचखंड श्री हजूर साहिब इस पवित्र पावन स्थान से पहल जरुरी हो जाती हैं. तखत साहब, गुरुद्वारा सचखंड बोर्ड अथवा हजूर साहिब की साधसंगत किसानों के लिए मंगल कामनायें कर सकते हैं. श्री अखण्ड पाठ साहिब का आयोजन किया जाएं तो बहुत शुभ सन्देश प्रसारित हो सकता हैं. या सिख भाइयों को चाहिए कि सिमरन दिवस के तर्ज पर ऑनलाइन दस मिनिट का मूलमंत्र जाप का देशस्तर पर आयोजन किया जाएं तो लाभकारी साबित होगा. कोरोना संक्रमण काल में किसी तरह के धरना, आंदोलन के लिए यहाँ अनुकूलता नहीं हैं यह हम सभी को अहसास हैं. इसलिए ऑनलाइन मूलमंत्र जाप बेहतर मार्ग होगा सन्देश पहुंचाने के लिए.


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