संत बाबा कुलवंतसिंघजी ने जत्थेदार के रूप में बाईस साल की सेवा पूर्ण की !
23 वें साल में पदार्पित हुए !
| संतबाबा कुलवंतसिंघजी, जत्थेदार जी. |
आज से 22 वर्ष पूर्व तारीख 12 जनवरी, 2000 के दिन तखत साहब के साबका जत्थेदार संतबाबा हजुरासिंघजी का स्वास्थ्य विचलित हो जाने के कारण उन्हें अस्पताल में उपचार हेतु दाखिल करवाना पड़ गया था. संतबाबा हजुरासिंघजी ने उनकी जीवन यात्रा त्याग दीं. उस आपातस्थिति में संतबाबा कुलवंतसिंघजी तखत साहिब की सेवा में प्रविष्ठ हुए थे. तारीख 13 जनवरी को संतबाबा कुलवंतसिंघजी के सेवा में शामिल होने का संस्मरण ताजा किया जाता हैं. आज इस महान स्थान पर बाबाजी ने 22 वर्षों की सेवा पूर्ण कर लीं. तखत साहब पर जत्थेदार के रूप में दीर्घकाल सेवा करनेवाले जत्थेदारों की सूची में संतबाबा कुलवंतसिंघजी पाँचवें पायदान पर विद्यमान है.
| (संतबाबा कुलवंतसिंघजी) |
इस महान तखत की सेवा में सर्वाधिक सेवा करने का भाग्य साबका जत्थेदार भाई साहब (संतबाबा) चढ़त सिंघजी को जाता है. जिन्होंने 50 सालों तक अखंड सेवा निभाई थीं. संतबाबा हीरासिंघजी ने 26 सालों तक सेवा निभाई. उनके पश्च्यात संतबाबा जोगिंदरसिंघजी मोनी बाबाजी ने 25 वर्षों तक जत्थेदार पद पर सेवा में योगदान दिया था. उनके बाद 23 वर्षों की दीर्घसेवा संतबाबा मानसिंघजी के भाग्य में रहीं थीं. संतबाबा कुलवंतसिंघजी द्वारा 22 वर्षों की निरंतर सेवा अपने आप में एक इतिहास है. सबसे उल्लेखनीय पहलु यह है कि बाबाजी के जत्थेदार पद पर सेवारत रहते हुए हजुरसाहिब की धरती पर अटल गुरु, धन धन श्री गुरु ग्रन्थसाहिबजी के गुरुतागद्दी का भव्य - दिव्य त्रिशताब्दि समारोह संपन्न हुआ. सिख इतिहास से जुड़ी कुछ अन्य शताब्दियां भी इस दौरान मनाई गईं. इंग्लैंड की एक संस्था द्वारा संतबाबा कुलवंतसिंघजी को तीन वर्ष पूर्व में सर्वशक्तिशाली सिख की उपाधि घोषित कर बहुमान पेश किया गया. जो वास्तव में हजुरसाहब के सिखों के लिए भी गौरव का क्षण था.
देश के पांच तख्तों की तुलना में श्री हजुरसाहिब स्थित तखत साहब की सेवा को पारंपरिक दायित्व के रूप में संचालित करना बेहद कठीण बात है. इस सेवा की अनुपालना के लिए तत्परता, समर्पण और साधना की आवश्यकता होती हैं जो भाग्यशाली हस्तियों को ही प्राप्त होती हैं. श्री गुरु गोबिंदसिंघजी महाराज के जागृत सिंहासन साहिब की प्रतिदिन की सेवा, शस्त्रं सजाने की नियमित सेवा, भोग और अन्य परंपरागत सेवाओं को समयानुसार निभाना बहुत ही कठीण दायित्व हैं. साथ ही श्री गुरु ग्रंथसाहिब जी महाराज के नियमित प्रकाश की सेवा समय से सुखासन सेवा तक की सभी विधियों का संचालन आदि भी जत्थेदार साहिब और आदरणीय पंजप्यारे साहिबान के संयुक्त सहकार्य में संचालन होता हैं. यहाँ की मर्यादा, परंपराएं और उत्सव प्रणाली भिन्न हैं. यहाँ के धार्मिक गतिविधियों का संचालन अपने आप में एक गरिमा की बात है. इस स्थान पर सेवा का दायित्व निभा रहें संतबाबा कुलवंत सिंघजी को सेवा का बल और ऊर्जा यूँ ही मिलते रहे. गुरु गोबिंदसिंघजी महाराज का आशीर्वाद बाबाजी के सिर रहें इस अरदास के साथ हार्दिक शुभकामनायें और बधाई.
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