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बुधवार, 23 जून 2021

 "ग्रहण" वेब-सीरीज सिखों के प्रति साजिश तो नहीं? 

रविंदरसिंघ मोदी 

ता. 24 जून 2021 को वेब -सीरीज "ग्रहण" का नया सिलसिला शुरू किया जा रहा हैं. "ग्रहण" का प्रचार प्रसार भी बड़ेस्तर का हैं. ग्रहण के ट्रेलर विज्ञापन में एक पगड़ीधारी सिख को हिंसक रूप में प्रदर्शित किया जा रहा हैं. इस विषय में सिखों के सभी संघटनों द्वारा विरोध शुरू किया गया हैं. संदेह हो रहा हैं कि फ़िल्म, वेब सीरीज और राजनीतिक मीडिया में सिखों की प्रतिमा को ख़राब करने का प्रयास किया जा रहा है. 

बताया जा रहा हैं कि वेब सीरीज "ग्रहण" की कहानी वर्ष 2016 में घटित बोकारो घटना पर आधारित हैं. जो आई. पी. एस. अधिकारी अमृता सिंह के इर्दगिर्द घूमती हैं. कहानी के अन्य पात्र जो पगड़ीधारी सिख हैं, वें सन 1984 के सिख विरोधी घटनाओं का बदला लेने के लिए प्रयास करते हैं. लेकिन जब तक यह कहानी आँखों से नहीं देखीं जाती तब तक शायद हमें मूल धारणा और 'कंटैन्स' का पता नहीं चल पायेगा. 

मेरी व्यक्तिगत सोंच यह हैं कि पिछले छह से सात वर्षों में फ़िल्म निर्माता, फ़िल्म निर्देशक, कहानीकार, राजनीतिक मीडिया द्वारा सिखों की मूल प्रतिमा को खलनायक और कमजोर सख्शियत के रूप में उभरने का पूरा प्रयास किया जा रहा हैं. सिखों का व्यक्तित्व सेवाभावी, सीमा का प्रहरी और मददगार के रूप में प्रदर्शित होता आया हैं. बहादुरी, शौर्य और ईमानदारी में सिखों को प्रतीक के रूप में जाना जाता रहा हैं. अब सिखों की प्रतिमा कमजोर और नकारात्मक दर्शाने का एक षड़यंत्र सा खेला जा रहा हैं. "ग्रहण के बहाने सिख समाज की प्रतिमा पर ग्रहण लगाने का यह प्रयास हो रहा हैं. 

आपको याद होगा कि संजय बारू की पुस्तक "दि एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर" फ़िल्म (मूवी) बनाकर डॉ. मनमोहनसिंघ जी की प्रतिमा को कमजोर बताया गया. ऐसे दृश्य पेश किये गए, ऐसे तथ्य परोसे गए जिससे डॉ मनमोहन सिंघ एक अशक्त और लाचार प्रधानमंत्री के रूप में प्रचारित हो. उन्हे नोबल पुरस्कार या अन्य कोई पुरस्कार नहीं मिले इसलिए शायद राजनीतिक मिडिया का यह पैतरा खेला गया था. अनुपम खेर ने बहुत दिल लगाकर डॉ मनमोहन सिंघ जी की भूमिका फ़िल्म में निभाई थीं. और भी बहुत सी फ़िल्में हैं जिनमें सिखों की प्रतिमा को कमजोर आंका गया हैं. सेंसर बोर्ड "धर्म का मर्म" कब समझेगा? मैं ऐसी मानसिकता का तीव्र निषेध करता हूँ जो किसी धर्म, जाति और व्यक्तित्व की प्रतिमा से खिलवाड़ करते हैं. डॉ मनमोहन सिंह एक बुद्धिजीवि हैं. उनके खिलाफ बुद्धिजीवियों का षड़यंत्र योग्य नहीं. इससे देश की प्रतिमा भी बिगाड़ने का दुःसाहस कहा जाएं तो गलत नहीं होगा.  


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