संत रामसिंघजी सिंगड़ा की आहुति !
किसान आंदोलन यज्ञ में करनाल, हयाना के संत रामसिंघजी की आत्मा और देह आहुति के रूप में भेंट चढ़ गई. 'संत सिंगड़ा' के नाम से सुपरचित संत रामसिंघजी ने बुधवार, ता. 16-12-20 को सिंधु बॉर्डर पर आंदोलन के चलते ही कनपट्टी पर गोली मारकर आत्महत्या कर ली. इस समाचार से किसान आंदोलन में ही नहीं संपूर्ण देश में शोकसंवेदना प्रसारित हो उठीं. संत रामसिंघ जी ने जिसने भी यह खबर पढ़ीं या सुनी वो संवेदना से भर गया. लेकिन केंद्र सरकार के कान पर ज्यूं तक ना रेंगी. इससे पर्व भी धरने में शामिल एक किसान की मौत हो चूकी लेकिन उसकी मौत का कारण फूड पाइजन बताया जा रहा है.
खैर ! सरकार ने संत रामसिंघजी की आत्महत्या को गंभीरता से नहीं लिया यह सत्य हैं. उक्त संबंध में कोई अफ़सोस भी व्यक्त नहीं हुआ. ये कृषकों का एक तरह से अपमान कहा जाना चाहिए. बाईस दिनों से सड़क पर आंदोलन की दुनिया स्थापित किये हुए अलग अलग राज्यों के किसानों ने वैसे एक इतिहास रच दिया. आंदोलन में सबकुछ हो रहा था, कमी थीं शहादत की तो संत रामसिंघ जी के रूप में वो भी पूर्ण हो गई. सरकार के मुखिया को अब तो चुप्पी तोड़नी ही पड़ेगी. इस आंदोलन ने अभी तक तीन से चार जानें ले ली हैं. आगे यह आंदोलन और भी तीव्र होने के आसार लग रहें हैं.
अब जब सर्वोच्च न्यायलय ने भी किसानों के पक्ष को लेकर सरकार से आग्रह किया हैं कि बातचीत से समस्या को सुलझाने हेतु तुरंत कमेटी का गठन किया जाए. अब सरकार को किसानों के साथ बातचीत कर उनके सुझाव स्वीकार कर उन पर चिंतन करना चाहिए.
रविंदरसिंह मोदी
..


कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें