श्री गुरु नानक देवजी को वैश्विक संत की उपाधि मिले
लंगर सेवा संकल्पना विश्व में प्रसारित हो !
रविंदरसिंह मोदी
सिख पंथ के संस्थापक सतगुरु नानकदेवजी महाराज का हम 551 वां प्रकाशपर्व मना रहें हैं. पिछले वर्ष को साढ़े पांच शताब्दी के रूप में मनाया गया. पिछला वर्ष दिक्कतों से भरपूर रहा. समस्त मानवता पर संक्रमण संकट कायम रहा. ऐसे समय में गुरु नानकदेव जी के तत्वों ने समस्त सिख पंत की अलख जगाये रखी. कोरोना संक्रमण काल में सिख पंथ द्वारा लाखों, करोड़ों लोगों की लंगर के माध्यम से सेवा की गईं. आज भी यह सेवा जारी है. आज हम जब गुरु नानक देव जी महाराज का प्रकाशपर्व मना रहें हैं तब गौरवांतित भी हैं. सिख पंथ अपनी धर्म - धारणाओं से कहीं दूर नहीं रहा. गुरु नानकदेव जी की विचारधारा के अनुरूप सिख पंथ की सेवाएं जारी हैं. भारत देश में ही नहीं बल्कि विश्व के बड़े - बड़े देशों में सिख पंथ ने लंगर सेवा का प्रचार प्रसार प्रत्यक्ष कृति के जरिये कर दिखाया. अब समय आ गया हैं कि, श्री गुरु नानक देव जी और उनकी विचारधारा को वैश्विक मान्यता दिलाये. श्री गुरु नानकदेवजी को विश्व संत की उपाधि दिलाई जाएं. साथ ही लंगर सेवा की प्रथा को वैश्विक सेवा प्रथा के रूप में मान्यता भी दिलाई जाएं.
इस कार्य के लिए विश्व के सभी सिख एक विचारधारा को लेकर आज से ही कार्य में जुट जाएं. भारत सहित उन सभी देशों में जहां सिखों ने गुरुद्वारों की स्थापना की हैं, उन सभी स्थानों से यह पहल शुरू होनी चाहिए कि श्री गुरु नानकदेव जी महाराज को विश्व गुरु संत के रूप में प्रचारित किया जाए. यह मिशन सिखों को पूरा करना चाहिए. आनेवाले 552 वें प्रकाशपर्व तक श्री गुरु नानकदेव जी के संतत्व को पूर्ण क्षमता से हर सिख को यह मिशन लेकर चलना चाहिए और समय - समय पर उसे प्रचारित करते रहना होगा. उम्मीद हैं आप इस मांग और संकल्पना का स्वागत करेंगे. आपकी राय अवगत कराए. धन्यवाद. इस पोस्ट को अधिक से अधिक शेयर कीजियेगा.


कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें